फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत पड़ी भारी

विज्ञापन
विज्ञापन
बुलंदशहर। डिबाई थाना क्षेत्र की एक महिला को चार लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाना महंगा साबित हुआ है। महिला ने अदालत में याचिका डाली थी कि उसका मुकदमा दर्ज कराया जाए, लेकिन जब अदालत ने महिला और उसके पति के बयान लिए तो दोनों के अलग अलग बयान मिलने और अन्य साक्ष्य भी झूठे पाए जाने पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश नहीं दिए। बल्कि अदालत ने आदेश दिया है कि महिला ने अदालत के समक्ष झूठे साक्ष्य दिए है। इसलिए महिला के खिलाफ अदालत में परिवाद दायर किया जाए। जानकारी के अनुसार डिबाई थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट संजीव कुमार की अदालत में एक याचिका डाली। जिसमें उसने रुपकिशोर उर्फ भोला, पवन कुमार, चेतन लोधी और विवेक पर आरोप लगाया कि इन लोगों ने २४ जनवरी की शाम खेत पर पिस्टल के बल पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। महिला ने इस बाबत डिबाई थाने पर भी एक शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। जिसके बाद महिला ने न्यायालय की शरण ली। अदालत में सुनवाई के दौरान महिला और उसके पति से सवाल-जवाब हुए। महिला और उसके पति के बयान अलग अलग पाए गए। जिससे साबित हुआ कि महिला ने झूठा प्रार्थना पत्र अदालत को दिया है। जिसके बाद न्यायाधीश संजीव कुमार ने आदेश दिया कि महिला के खिलाफ धारा 340 (न्यायालय की कार्रवाई में झूठे साक्ष्य पेश करना) सीआरपीसी के तहत आने वाली धारा 193, 209, 195 (न्यायालय में झूठ बोलना, गलत साक्ष्य देना) में परिवाद दर्ज किया जाए। बता दें कि धारा 195 में क्राइम के अनुसार, आजीवन कारावास तक की सजा है। इन बिंदुओं पर फंसी महिला - महिला से पूछा कि वह जनवरी माह में सर्दी के मौसम में खेत पर क्यों गई। जवाब मिला कि किसी ने चारा तो नहीं काटा। देखने गई। अदालत ने पूछा पति क्यों नहीं गया। जवाब मिला कि पति महिला के मायके में एक जन्मदिन में गया हुआ था। - जब पति से अलग ले जाकर पूछा गया कि वह जन्मदिन में किस तारीख पर गया। जवाब मिला कि वह तो दो साल से ससुराल ही नहीं गया। - महिला से पूछा गया कि जब इतनी बड़ी घटना हो गई थी तो उसने ग्रामीणों को क्यों नहीं बताया। उसी समय पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी। महिला का जवाब मिला कि उसे रास्ते में कोई नहीं मिला। जबकि उसे रास्ते में कई लोग मिले थे। पुलिस का नंबर अपने पास नहीं होने की महिला ने बात बताई। जबकि 100 नंबर उस समय सभी के पास होता था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें