जांच की आंच से डरे अधिकारी, नहीं खर्च करेंगे मद
- पंचायती राज विभाग ने संसाधन के लिए दिए थे 5 करोड़
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। अधिकारियों में तालमेल का अभाव कहें या पूरब के जिलों में शुरू की गई पीपीई किट घोटाले की जांच। पंचायती राज विभाग के पांच करोड़ बजट से मिले 2.50 करोड़ रुपये खर्च करने को तैैयार नहीं है। बजट मिलने के दो महीने बाद भी अधिकारी जांच के डर से डिमांड फाइल पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं हैं।
पंचायती राज विभाग द्वारा दो महीने पहले पैसे जारी कर दिए थे। इस मद में दिसंबर तक कोविड उपचार के लिए डाक्टरों की नियुक्ति, वेंटीलेटर, एचएनएफसी, बाईपेप मशीन, रेमडेसिवीर इंजेक्शन व कोरोना मरीजों के उपचार में काम आने वाली जरूरी दवाएं खरीदना था। स्वास्थ्य विभाग ने जरूरत के अनुसार लिस्ट भी प्रशासन एवं पांच सदस्यीय चयन समिति को भेज दी थी। पहले तो कमेटी की मीटिंग ही नहीं हुई। बाद में पूर्वांचल के जिलों में पीपीई किट खरीद घोटाले की जांच शुरु हो गई। इसके बाद जिले के अधिकारियों ने इस फंड को ठंडे बस्ते में डाल दिया। अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस फंड की कोई जरूरत नहीं है। इस फंड से जो कुछ भी खरीदा जाना था वह सब विभाग के पास पहले से मौजूद है। एक अधिकारी का कहना है कि एनएचएम की ओर से जो फंड जिले को मिला है, अभी उसी में एक से डेढ़ करोड़ रुपये बचा है। पहले उसे खर्च किया जाएगा और यदि इसके बाद भी कोई जरूरत पड़ी तो पंचायती राज विभाग से मिले फंड को खर्च किया जाएगा।
वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि पंचायती राज विभाग से मिले फंड को अपात स्थिति के लिए बचाकर रखा गया है। जब जिले में कोरोना संबंधी कोई जरूरी व्यवस्था करनी होगी जो शासन या केंद्र से नहीं मिल सकेगी, तब उस फंड का प्रयोग किया जा सकता है। फंड का पैसा लैप्स नहीं होगा।
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आशुतोष यादव