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लॉकडाउन में आर्थिक तंगी से परेशान व्यापारी ने किया आत्मदाह

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बुलंदशहर। लॉकडाउन के कारण व्यापार ठप होने से कर्जदार हुए एक व्यापारी ने आर्थिक तंगी सेे परेशान होकर मंगलवार देर रात अपने घर में खुद को आग लगा ली। गंभीर रुप से झुलसने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, मृतक के परिजनों में हादसे के बाद कोहराम मचा हुआ है। जानकारी के अनुसार नगर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सरायधारी निवासी रियाजुद्दीन (३५) पुत्र फखरूद्दीन अलमारी और सेफ का कारोबार करते थे। उन्होंने मकान के निचले हिस्से में ही एक कारखाना खोला हुआ था। जिसमें सेफ-अलमारी बनाने व बेचने का कारोबार करते थे। लॉकडाउन से पूर्व रियाजुद्दीन का परिवार भी खुश था और व्यापारी भी ठीक चल रहा था। लेकिन, लॉकडाउन के दौरान रियाजूदीन का कारोबार एकदम ठप हो गया था। जिस कारण उसने जो माल दिल्ली और मेरठ से उठाया हुआ था। उसके रुपये देने का दबाव उन पर पड़ रहा था। जिसके बाद उन्होंने कुछ व्यापारियों और सूदखोरों से रकम उधार ली और माल देने वालों का कर्ज निपटाया था। अनलॉक में उसने फिर से कारोबार शुरू किया। कारोबार शुरू होते ही सूदखोरों ने कर्ज की मांग शुरू कर दी। कई बार कर्जदार उसकी बेइज्जती भी करके गए। जिसके बाद रियाजुद्दीन मानसिक तनाव में आ गया। बताया गया कि मंगलवार की रात सभी परिवार के लोग एक समारोह में शामिल होने के लिए गए थे। इसी दौरान रियाजुद्दीन ने खुद को कमरे में बंद करके आग लगा ली। पड़ोसियों ने घर से धुआं उठता देखा तो पुलिस को सूचना दी। लेकिन, मौके पर पुलिस के पहुंचने से पूर्व वह बुरी तरह झुलस चुका था। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। मानसिक तनाव ने लील ली जिंदगी लॉकडाउन के कारण व्यापार ठप होने से रियाजुद्दीन काफी परेशान था। परिजनों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि बीते कुछ दिनों से आर्थिक तंगी और कर्जदारों के दबाव के चलते वह काफी तनाव में रहने लगा था। घर पर परिजनों से भी ठीक से बात नहीं करता था और न ही खाना ठीक से खा रहा था। परिजन उन्हें काफी समझाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, इस तनाव से वह बाहर नहीं निकल पा रहा था। यही कारण रहा कि उसने मौत को गले लगा लिया। गर्भवती है पत्नी, मृतक का चल रहा था उपचार बताया गया कि मृतक रियाजुद्दीन की पत्नी गर्भवती है। घर में खुशियों के आने से पहले ही गम का पहाड़ टूट पड़ा। रियाजुद्दीन के अवसाद में रहने के कारण उसका पूर्व में दिल्ली के एक अस्पताल में भी उपचार चला था। यही नहीं, बीते दिनों से उसका नगर के ही एक निजी अस्पताल में भी उपचार चल रहा था। डिप्रेस्ड व्यक्ति को न छोड़ें अकेला जिला अस्पताल में कार्यरत मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. स्वाति यादव ने बताया कि हानि और लाभ का सिलसिला जीवनभर चलता रहता है। ऐसे में व्यक्ति को हर पहलू का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। हानि के बाद प्रयास करने से लाभ भी व्यक्ति को अवश्य मिलता है। साथ ही यदि कोई व्यक्ति किसी तनाव या अवसाद में है तो परिजनों और दोस्तों को उसकी बातों को सुनकर उन्हें मोटिवेट करना चाहिए। अवसादग्रस्त व्यक्ति को कभी अकेला नहीं छोडऩा चाहिए। आवश्यकता पडऩे पर मनोचिकित्सक की सालाह लेनी चाहिए। कोट पड़ोसियों की सूचना मिलने पर रियाजुद्दीन के घर पहुंचे थे। उसके घर से धुंआ उठ रहा था। कमरे में जाकर देखा तो रियाजुद्दीन का शरीर बुरी तरह से झुलस चुका था। जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी। शव पोस्टमार्टम को भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ही खुलासा हो सकेगा कि उसने कौन सा ज्वलनशील पदार्थ अपने ऊपर उड़ेलकर आत्मदाह किया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है। - योगेंद्र कुमार सिंह, नगर कोतवाल
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