दश लक्षणं के तहत शनिवार को मनाया गया उत्तम तप
- टीएचए के जैन मंदिरों में प्रतिदिन हो रही पूजा अर्चना
- प्रतिदिन होने वाले सत्संग से ऑनलाइन जोड़ा जा रहा लोगों को
माई सिटी रिपोर्टर
साहिबाबाद। पयूषण पर्व के तहत शनिवार को उत्तम तप धर्म मनाया गया। जैन धर्म के मुताबिक सांसारिक विषय-भोगों की अभिलाषा से विरक्त होकर अनादि कर्म बंध से सिद्ध-स्वरुप निर्मल आत्मा को अनशनादि बारह प्रकार के तप से तपाकर कर्म-मल रहित करना ही उत्तम तप है।
इस धर्म के तहत कहा गया है कि गृहस्थ भी यदि तप भावना निभाता रहे तो रोगादि कष्ट आने पर उसे फिर डर नहीं लगता। तप का अभ्यास हो जाने के कारण वृद्ध अवस्था आने पर उसकी बुद्धि चलित नहीं होती। वसुंधरा जैन मंदिर के सचिव सुनीश जैन ने बताया कि कोविड-19 संक्रमण के दौरान हालांकि लोगों की भीड़ मंदिर में इकट्ठी नहीं की जा रही। जबकि ऑनलाइन प्रतिदिन सुबह-शाम श्रद्धालु मंदिर में होने वाले पूजा-आरती व प्रवचन से जुड़ते हैं। सुनीश जैन ने बताया कि दरअसल जैन धर्म में दश लक्षणं पर्व को सर्वोपरि माना गया है। इस पर्व को जीवन में आत्मसात करना ही जैन समाज का सर्वोच्च धर्म माना गया है। ऐसे में इस पर्व को पूरे समाज में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वहीं इंदिरापुरम जैन मंदिर में भी सुबह-शाम पूजा अर्चना की जा रही है और ऑनलाइन लिंक के जरिए समाज के लोगों को इस पूजा से जोड़ा जा रहा है। वहीं अलग-अलग दिनों में समाज के लोग मंदिर पहुंचकर भी दर्शन कर रहे हैं।
इनसेट
हर रोज होता है सैनिटाइजेशन
जैन मंदिर को प्रतिदिन सैनिटाइज किया जाता है। इसके साथ ही मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु के लिए मंदिर प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक व्यक्ति का बिना मंदिर में प्रवेश करने के लिए मास्क अनिवार्य किया गया है।
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