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Ghaziabad News: यूसीपीआई संस्था से जुड़े दंपती के खातों का रिकॉर्ड खंगालने में जुटी पुलिस टीमें

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यूसीपीआई संस्था से जुड़े दंपती के खाते खंगालने में जुटी पुलिस
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इंदिरापुरम। कनावनी में यूपी मिशन के तहत यूसीपीआई संस्था से मिलकर धर्मांतरण का पाठ पढ़ाने वाले दंपती के बैंक खातों की भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस की तीन टीमें दंपती के पुराने इतिहास को भी खंगाल रही हैं। जांच में सामने आया है कि जॉन संतोष और उसकी पत्नी ने कनावनी में पांच हजार मासिक किराये पर जो हॉल लिया था, उसके लिए मकान मालिक या दंपती ने पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया था। उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि दंपती ने बेसमेंट में बच्चों को पढ़ाने के लिए क्लासरूम बनाया था।
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डीसीपी ट्रांस हिंडन जोन डॉ. दीक्षा शर्मा का कहना है कि जॉन संतोष और उनकी पत्नी के बैंक खातों की जांच की जा रही है। पुलिस मामले में और सुराग जुटाने के लिए सभी एंगल से जांच कर रही है। दो टीमें दंपती के पास पढ़ने वाले बच्चे, उनके अभिभावक और शिकायतकर्ता के अलावा अन्य लोगों के बयान दर्ज कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह मामला हाईप्रोफाइल हो सकता है। लिहाजा पुलिस अधिकारी इसकी गंभीरता से जांच कर रहे हैं। फिलहाल पुलिस अधिकारी सभी अहम सुराग जुटाने के बाद कोर्ट में दंपती को रिमांड पर लेने के लिए अर्जी डाली जाएगी। फिलहाल अधिकारी मामले में ज्यादा कुछ बोल नहीं रहे हैं। गौरतलब है कि जॉन संतोष निवासी सेक्टर-5 वसुंधरा ने पत्नी के साथ मिलकर धार्मिक प्रचार-प्रसार, मीटिंग व प्रार्थना के लिए कनावनी में किराये पर हॉल लिया हुआ था। दोनों 1996 से वसुंधरा में रहकर यहां काम कर रहे थे। जॉन संतोष केरला के शेरून फेलोशी चर्च में पादरी था। यहां कनावनी में मिशन से जुड़े लोग एकत्रित होकर मीटिंग करते थे। पुलिस पूछताछ में दोनों ने बताया कि वह प्रदेश में लोगों को अलग-अलग तरीके से बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करते थे। संस्था की प्रदेश, जनपद, शहर और ब्लॉक स्तर पर टीमें बंटी हुईं हैं। दंपती ने यह भी बताया कि इन दिनों वह छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाई के बहाने हॉल में बुलाते थे। इनकी संस्था यूसीपीआई के एक-एक पदाधिकारियों को 20-20 लोगों को धर्म के लिए प्रेरित करने का लक्ष्य मिला था। आरोप यह भी था कि दोनों कनावनी के हॉल में बच्चों को बिस्कुट और लड्डू देने के बाद उनके धर्म को मानने के लिए कहते थे। रोजाना बच्चों से कहा जाता था कि वहां जो भी पढ़ाई करते हैं उसे अपने अभिभावकों से जरूर बताएं।
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