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Ghaziabad News: सिद्धार्थ विहार की समितियों पर लगाया 170 करोड़ का समायोजन शुल्क

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सिद्धार्थ विहार की समितियों पर लगाया 170 करोड़ का समायोजन शुल्क
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वसुंधरा। आवास विकास परिषद ने सिद्धार्थ विहार योजना की 12 समितियों को 170 करोड़ का समायोजन शुल्क लगाकर नोटिस भेज दिया है। इसके विरोध में 10 समितियों के पदाधिकारी मंगलवार को आवास विकास के वसुंधरा दफ्तर पहुंचे और अपनी समस्या अधीक्षण अभियंता राकेश चंद्रा के सामने रखी। स्पष्ट जवाब न मिलने पर पदाधिकारी परेशान हो गए। उनमें से एक ने पेट्रोल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। वहां मौजूद बाकी लोगों ने उन्हें ऐसा करने से रोक लिया।
उत्तर रेलवे दूर संचार सहकारी आवास समिति के सचिव जगवीर चौधरी ने बताया कि आवास विकास पिछले 25 सालों से समितियों का शोषण कर रहा है। 80 प्रतिशत भूमि देने के बजाय केवल 50 प्रतिशत अविकसित भूमि दी गई। उस पर भी 1.5 प्रतिशत का विकास शुल्क लगाया जा रहा है और अब करोड़ों रुपये के समायोजन शुल्क का नोटिस भेजकर समितियों के पदाधिकारियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है, जो 2002 के शासनादेश के खिलाफ है। मंगलवार को आवास विकास के अधीक्षण अभियंता से मुलाकात कर अपनी बातें रखीं। इसके बाद समिति के पदाधिकारी आवास विकास के संपत्ति प्रबंधक सुनील शर्मा के सामने अपनी समस्या रखी। जब स्पष्ट जवाब नहीं तो सभी पदाधिकारी आवास विकास के प्रांगण में खड़े हुए और आविप के खिलाफ नारे लगाए।
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इसी बीच एक पदाधिकारी पेट्रोल की केन लेकर आया और अपने ऊपर पेट्रोल उड़ेल लिया। इसके बाद माचिस जलाकर आग लगाने की कोशिश की। समय रहते वहां मौजूद पदाधिकारियों ने युवक को पकड़ लिया। ऐसे में एक बड़ी घटना होने से बच गई।
15 दिसंबर को हजारों की संख्या में पहुंचेंगे
समितियों के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर जल्द ही समायोजन शुल्क को निरस्त नहीं किया जाता तो वे 15 दिसंबर को हजारों की संख्या में वसुंधरा के आवास विकास के दफ्तर पहुंचेंगे और अधिकारियों का घेराव करेंगे।
10 से ज्यादा समितियों की हो रही जांच
हाल ही में मेरठ में बीजेपी के नेता सुनील भराला ने आवास विकास की सिद्धार्थ विहार योजना में सहकारी आवास समितियों पर 170 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाया था। जिसके बाद से यह मामला चर्चा में आया है। समिति पदाधिकारियों का कहना है कि समितियों को लेकर शासन स्तर से एक बार पहले जांच हो चुकी है, जिसमें सभी को क्लीनचिट मिल चुकी है। पदाधिकारियों का आरोप है कि इस मामले में फिर से जांच की जा रही है ताकि समितियों को फंसाया जा सके। अभी जांच जारी है, इससे पहले ही लोगों को समायोजन शुल्क के नोटिस मिल गए हैं।
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ये हैं सिद्धार्थ विहार की समितियां
-उत्तर प्रदेश दूरसंचार सहकारी आवास समिति
-काफमो सहकारी आवास समिति
-आदर्श सहकारी आवास समिति
-लोकसभा कर्मचारी सहकारी आवास समिति
-पंचशील सहकारी आवास समिति
-फ्रेंडस रेलवे सहकारी आवास समिति
-एनआर कर्मचारी सहकारी आवास समिति
-केंद्रीय जल आयोग सहकारी समिति
-शताब्दी सहकारी आवास समिति
-न्यू जागृति एंक्लेव आवास समिति
-आदर्श प्रगतिशील सहकारी गृह निर्माण समिति
बिल्डरों को बेच दी जमीन
पदाधिकारियों का कहना है कि सभी समितियों की जमीनें प्रतीक ग्रैंड समेत कई बड़ी सोसायटियां जहां बनी हुई है, वहां समितियों की जमीनें थी, लेकिन आविप ने समितियों की जमीन का समायोजन कर उन्हें बिल्डरों को बेच दिया। 2014 में जब यहां जमीन बेचने पर स्टे लगा तो आविप ने समितियों को डंपिंग ग्राउंड वाली जगह दे दी। अब उसी जमीन पर करोड़ों का शुल्क लगाया जा रहा है।
समायोजन शुल्क को मुख्यालय से लगाया गया है, डिवीजन स्तर से समायोजन शुल्क की गणना करके मुख्यालय भेजी गई थी। - राकेश चंद्रा, अधीक्षण अभियंता
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