पाबंदी का निकला धुआं, खूब चले पटाखे
गाजियाबाद। पाबंदी के बाद भी धनतेरस पर खूब पटाखे चले। दुकानदारों ने चोरी छिपे पुलिस प्रशासन की नाक के नीचे जमकर बिक्री की। शाम से पटाखे फूटने लगे और देर रात चले।
गाजियाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शुक्रवार को 300 पहुंचने पर जिला प्रशासन ने पटाखों की बिक्री, भंडारण और प्रयोग पर रोक लगा दी है। करीब 30 दुकानदारों ने ग्रीन पटाखे के लिए अस्थाई लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इन्हें 200 के नीचे एक्यूआई होने पर ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए अस्थाई लाइसेंस प्रदान करने की व्यवस्था की गई थी। लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से एक्यूआई में लगातार बढ़ोतरी होने के बाद रोक लगा दी गई थी।
घर से ऑनलाइन बिक्री
कुछ पटाखा कारोबारियों ने दुकान लगाने की बजाय ऑनलाइन बिक्री का रास्ता ढूंढ निकाला। चोरी छिपे ऑनलाइन बिक्री जमकर की गई। सोशल मीडिया पर ग्रीन पटाखा के नाम से दुकानदारों ने बिक्री की। ऑन डिमांड पटाखे लोगों तक पहुंचाए गए।
हापुड़, सहारनपुर में मंगाए गए पटाखे
गाजियाबाद में सभी प्रकार के पटाखों पर प्रतिबंध लगने के बाद सहारनपुर, हापुड़ और अमरोहा से पटाखे की खेप जिले में पहुंची है। सूत्रों की माने तो दुकानदारों को मूक सहमति मिली है। पकड़े जाने पर ही कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बाहर से पटाखे ट्रांसपोर्ट की गाड़ियों में भरकर लाए जा रहे हैं।
दिवाली से पहले ऑरेंज जोन में पहुंचा प्रदूषण
साहिबाबाद। पांच साल में पहली बार दिवाली से पहले रविवार को शहर का एक्यूआई ऑरेंज जोन में 270 दर्ज किया गया है। लोनी का एक्यूआई रेड जोन में 337 पर रिकॉर्ड हुआ जो अस्थमा के मरीजों के लिए घातक है। यहां स्टेशन पर देखा जाए तो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनसीआर में लागू ग्रैप के दूसरे चरण के नियम पूरी तरह से धराशाई हो रहे हैं। खुले में जल रहा कूड़ा और ई-वेस्ट व टूटी सड़कों से उड़ती धूल अधिकारियों की सख्ती की पोल खोल रहे हैं।
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा का कहना है कि प्रशासन ने प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए सभी प्रकार के पटाखे फोड़ने और बेचने पर पाबंदी लगा दी है। इससे प्रदूषण स्तर में कमी आएगी। हालांकि हवा की तेज होने से भी धूल-मिट्टी और धुएं के कण तेजी से नीचे गिरते हैं। पांच साल में पहली बार शहर का एक्यूआई 270 रहा। आंकड़ों को देखें तो दिवाली से पहले 23 अक्तूबर तक शहर के एक्यूआई का औसत 161 यानी येलो श्रेणी में रिकॉर्ड हुआ। इसी तरह इंदिरापुरम का एक्यूआई 268, वसुंधरा का 262 और संजय नगर का सबसे कम 213 पर दर्ज किया। चिंता की बात है कि लोनी के एक्यूआई में कमी नहीं हो रही। यहां स्टेशन पर प्रदूषण की स्थिति लगातार खराब श्रेणी में पहुंची हुई है। उत्सव शर्मा का कहना है कि लोनी के प्रदूषण को कम करने के लिए ग्रैप नियमों को सख्ती के साथ लागू करने के लिए कहा गया है।
पांच सालों में दिवाली से पहले और बाद का एक्यूआई
वर्ष पहले बाद में
2017 261 412
2018 318 422
2019 199 396
2020 355 448
2021 230 470