गौड़ सिद्धार्थम सोसायटी में बिल्डर और आवास विकास परिषद के खिलाफ हुआ प्रदर्शन
साहिबाबाद। सिद्धार्थ विहार की गौड़ सिद्धार्थम सोसायटी के लोगों ने शुक्रवार को बिल्डर और आवास विकास परिषद के खिलाफ प्रदर्शन कर विरोध जताया। लोगों का आरोप है कि सोसायटी के लोग बिल्डर और आवास विकास के अधिकारियों के बीच फंस गए हैं।
सोसायटी में प्रदर्शन करने वाले संजीव सिंह राठौर का आरोप है कि बिल्डर ने हाल ही में 1500 और नई रजिस्ट्री की है। जिनमें से एक हजार लोगों को फ्लैट्स की चाबी मिल गई है। 500 लोग अभी फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं जो 500 परिवार सोसायटी में रह रहे हैं। उन्हें आधारभूत सुविधाएं भी नहीं मिल पा रही है। सोसायटी में बिजली, पानी, लिफ्ट, आईजीएल कनेक्शन और साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। अगर इन सुविधाओं की मांग की जाती है तो बिल्डर की ओर से समाधान करने के बजाय धमकी मिलती है। प्रदर्शन में धीरज गुप्ता, यशपाल, हिमांशु, सुधीर गुप्ता, संजीव सहगल, गंजेद्र कुशवाहा, अजय भारद्वाज, गौरव भाटिया, दीपेंद्र सिरोही, रंजीत कुमार, रोहित, अमित समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
लोगों के साथ बैठक करें बिल्डर
प्रदर्शन करने वाले लोगों की मांग है कि बिल्डर सोसायटी के सभी लोगों के साथ बैठक करें और उन्हें बताएं कि आवास विकास परिषद ने सोसायटी में नोटिस क्यों चस्पा किए हैं। साथ ही बिल्डर की सोसायटी के लोगों के प्रति जो जिम्मेदारी है। उन्हें पूरा करें। वहीं सोसायटी के कुछ लोग इलाहाबाद जाएंगे ताकि उन्हें पूरा मामला समझ आ सके। अभी बिल्डर की ओर से कुछ नहीं बताया गया है।
क्या बोले निवासी
मैं एक साल से सोसायटी में रह रहा हूं। जिस समय फ्लैट लिया था, उस समय बिल्डर ने गंगाजल की सप्लाई होने का वादा किया था, अब पानी का टीडीएस 1350 तक पहुंच गया है। हर चार महीने बाद आरओ का फिल्टर बदलवाना पड़ता है। -- धनेश कुमार सिंह, निवासी
मैं सोसायटी में चौथी मंजिल पर रहता हूं। मेरे टावर में जो पहला तल है, वह खाली पड़ा है। उसमें जलभराव और सीलन की वजह से मच्छर पनप रहे हैं। घर में बच्चे हैं, उनके बीमार होने का डर रहता है। रखरखाव के दफ्तर में लगातार शिकायत की जा रही है, लेकिन कोई समाधान नहीं होता। -- धीरज गुप्ता, निवासी
मैं पिछले नौ महीने से सोसायटी में रह रही हूं। मध्यम परिवार के लोग ऐसी सोसायटी में इसलिए आते हैं ताकि उन्हें सुविधाएं और सुरक्षा मिले लेकिन जब से रजिस्ट्री पर रोक लगी है तब से पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है। ऐसा लग रहा है कि सारे जीवन की कमाई इस सोसायटी में फंस गई है।-- अलबीना, निवासी
कुछ लोगों को बी तीन के नाम पर दूसरी बिल्डिंग में पार्किंग दे दी है। ऐसे में उन्हें पार्किंग के लिए सोसायटी के मुख्य द्वार से 500 मीटर से एक किलोमीटर तक घूमकर जाना पड़ता है। सोसायटी से सीधे पार्किंग के लिए कोई कनेक्टिविटी नहीं है।-- गजेंद्र कुशवाहा, निवासी
ये है मामला
गौड़ सिद्धार्थम परियोजना पर करीब 350 करोड़ रुपये से भी अधिक का बकाया और पूर्णता प्रमाणपत्र नहीं लेने के चलते आवास विकास परिषद ने रजिस्ट्री पर रोक लगा दी है।