राजनीति के लिए प्रयोगशाला बन चुका यूपी : धर्मपाल सिंह
साहिबाबाद। भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश संगठन मंत्री धर्मपाल सिंह ने अपना दायित्व संभालने के बाद पहले भाषण में कहा कि उत्तर प्रदेश राजनीति की प्रयोगशाला बन चुका है। सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को यह समझने की जरूरत है कि देश की राजनीति में प्रदेश का अलग स्थान है। यहां मिली सफलता से हम सबको प्रतिष्ठा मिली है। हमारा अगला मिशन 2024 का लोकसभा चुनाव है। हम जैसे पहले एकजुट होकर काम करते रहे हैं, वैसे ही किया तो इसमें भी सफलता निश्चित ही मिलेगी।
वसुंधरा स्थित सिल्वर होटल में रविवार को की गई पश्चिम और ब्रज क्षेत्र की संगठनात्मक बैठक में धर्मपाल सिंह ने अपने संक्षिप्त भाषण में संगठन की मजबूती पर फोकस रखा। उन्होंने कहा कि संगठन की ताकत के दम पर हर चुनौती का सामना किया जा सकता है। हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले जलशक्ति एवं खाद्य नियंत्रण मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि संगठन में कोई कहीं जाता नहीं है, बल्कि संगठन समय-समय पर नई जिम्मेदारी देता है। यही जिम्मेदारियां हमें आगे बढ़ाती हैं। पहले समय में जो भी गलतियां हुईं, उन्हें आज ही भूल जाएं, क्योंकि मजबूत संगठन से ही सरकार बनती है।
बैठक में झारखंड के महामंत्री संगठन कर्मवीर, पश्चिम के क्षेत्रीय अध्यक्ष मोहित बेनीवाल, ब्रज के क्षेत्रीय अध्यक्ष रजनीकांत माहेश्वरी, पश्चिम के प्रभारी जेपीएस राठौर, ब्रज के प्रभारी अश्विनी त्यागी, 38 जिलों के जिलाध्यक्ष, महानगर, केंद्र व प्रदेश के कई मंत्री, विधायक, एमएलसी शामिल हुए। केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह, नोएडा के सांसद महेश शर्मा, प्रदेश राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप और गाजियाबाद के पांचों विधायक मौजूद रहे। मंच का संचालन मोहित बेनीवाल ने किया।
किसान आंदोलन के बावजूद मिली जीत एतिहासिक : ब्रजेश
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में किसान आंदोलन जैसी तमाम चुनौतियों को पार कर जीत दर्ज करना एतिहासिक रहा। यह संगठन की नीति और पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की मेहनत का फल है। 2024 में संगठन के दम पर प्रदेश में सभी 80 सीटें जीतकर कार्यकर्ता अपनी शक्ति को प्रदर्शित करेंगे।
सरकार से बड़ा होता है संगठन : केशव
बोले, संगठन में मंडल और बूथ स्तर पर करना होगा काम
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि संगठन सरकार से बड़ा होता है। विपक्ष हताश और निराश है लेकिन हमें जीत के भ्रम में नहीं रहना है। कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास होना ठीक है मगर अति उत्साह खराब होता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में बड़ी चुनौतियां थीं। देश विरोधी ताकतें भी सक्रिय हो गई थीं। विपक्ष ने यह भ्रम फैलाया कि भाजपा को यूपी में रोक लिया तो दिल्ली में मोदी को रोक लेंगे। उससे भी कहीं ज्यादा चुनौतियां 2024 के लोकसभा चुनाव में होंगी। उन्हें अभी से दूर करते हुए संगठन में मंडल व बूथ स्तर पर काम करना होगा।
केशव के बोलते ही शुरू हो गईं अटकलें
जैसे ही केशव प्रसाद मौर्य का भाषण खत्म हुआ, वैसे ही सामने बैठे भाजपा पदाधिकारियों के बीच अटकलें शुरू हो गईं कि कहीं वह फिर से प्रदेश अध्यक्ष तो नहीं बनने जा रहे हैं। कारण यह था कि उनका पूरा भाषण संगठन की ताकत बताने पर था। वह मिशन 2024 के लिए संगठन की मजबूती का ब्लू प्रिंट लेकर आए थे। उन्होंने मंडल और बूथ स्तर तक काम करने की योजना पेश की। इसी से यह चर्चा चल पड़ी कि वह नए प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे चल रहे हैं।