प्रदूषण नियंत्रण प्रबंधन के कमीशन ने प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में लागू होने वाले ग्रेडेड रेस्पांस एक्शन प्लान (ग्रेप) में अहम बदलाव किए हैं। नए नियम के तहत अब लोगों को मौसम की तरह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) का पूर्वानुमान जारी किया जाएगा। वहीं, प्रदूषण की बेहद गंभीर श्रेणी में यानी 450 के पार एक्यूआर होते ही कार्यालयों में 50 फीसदी घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) अनिवार्य होगा। आयोग के नए नियम एनसीआर में एक अक्तूबर से लागू हो जाएंगे।
पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी उत्सव शर्मा ने बताया कि पिछले दिनों आयोग की बैठक में ग्रेप को लेकर अहम संशोधन किए गए हैं, जिसके तहत ग्रेप लागू होने पर सड़कों से स्वाइपिंग मशीन के जरिये धूल हटाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही मिट्टी की धूल दोबारा वायुमंडल में ना उड़े इसके लिए पानी का छिड़काव भी जरूरी है। खुले में कूड़ा जलाने पर प्रतिबंध पहले से ही लागू है। डीजल जनरेटर पर भी ग्रेप में पाबंदी लागू हो जाती है, हालांकि इमरजेंसी सेवा में लगे जनरेटरों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होता है।
उनके मुताबिक, प्रदूषण की बेहद गंभीर श्रेणी पर कार्यालयों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा। स्कूल, कॉलेज समेत सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो जाएंगे। डीजल वाहनों पर प्रतिबंध रहेगा और दिल्ली में आवश्यक सेवा को छोड़ ट्रकों पर पाबंदी रहेगी।
इसी तरह गंभीर श्रेणी यानी एक्यूआई 401-450 के दौरान एक जनवरी 2023 से एनसीआर में सिर्फ पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी चलने वाले उद्योग ही चलेंगे। निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। एक्यूआई 301 से 400 की खराब श्रेणी में होटलों में तंदूर पर प्रतिबंध रहेगा और बिजली आपूर्ति जरूरी होगी।