टोनर रिफिलिंग ‘घोटाले’ की 2014 से होगी जांच
गाजियाबाद। टोनर रिफिलिंग में सामने आए ‘घोटाले’ के अब जीडीए में 2014 से अब तक खर्च रकम और इससे संबंधित दस्तावेजों की जांच होगी। जीडीए वीसी कंचन वर्मा ने छह साल के दौरान हुए खर्च की जांच कराने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि टोनर रिफिल और भुगतान की प्रक्रिया की जांच की जाएगी। इसकी जांच जीडीए के वित्त नियंत्रक को सौंपी गई है। जीडीए के कंप्यूटर अनुभाग में प्रिंटर के लगे टोनर की रिफिलिंग पर 10 माह में 16 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया था। बीते दिनों इसकी जांच कराई गई तो पाया गया कि प्रत्येक टोनर को रिफिल कराने पर 950 रुपये का खर्च दिखाया गया, इसमें 450 रुपये स्याही रिफिल कराने और 500 रुपये ब्लेड बदलवाने पर खर्च दिखाया गया। जांच टीम ने पाया कि बाजार में टोनर में स्याही भरने पर 150 रुपये और ब्लेड बदलने पर 300 रुपये खर्च आता है। यानी प्रत्येक टोनर पर 500 रुपये अतिरिक्त खर्च दिखाया गया। यही नहीं टोनर को रिफिल कराने के लिए टेंडर भी कॉल नहीं किया गया था और न ही इसका स्टॉक रजिस्टर बनाया गया था। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 2014 से इसी प्रक्रिया से टोनर को रिफिल कराया जा रहा है। ऐसे में जीडीए वीसी ने अब वर्ष 2014 से अब तक टोनर की रिफिलिंग पर खर्च की प्रक्रिया की जांच कराने का निर्णय लिया है।