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Ghaziabad: तेंदुए के पंजे के निशान मिलने के बाद किसानों में दहशत, नहीं जा रहे खेत, तलाश में जुटा वन विभाग

Wed, 01 Mar 2023 04:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद

सार

वन विभाग की टीम ने किसान योगेंद्र के गन्ने के खेत में पिंजरा लगा दिया है। पिंजरे में मृत नीलगाय के मांस के टुकड़े हो लटकाया गया है। माना जा रहा है कि तेंदुआ मांस की लालच में पिंजरे में आएगा और अंदर लटकाए गए मांस के पास पहुंचते ही पिंजरे का गेट बंद हो जाएगा।
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विस्तार
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गाजियाबाद के मुरादनगर के नूरपुर गांव में मंगलवार सुबह नीलगाय का शिकार करने वाले तेंदुए की तलाश में वन विभाग की टीम ने गांव में डेरा डाल दिया है। तेंदुए के पद चिन्ह मिलने के बाद गांव में एहतियात के तौर पर अकेले निकलने से मना कर दिया गया है।
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मौके पर निरीक्षण में पाया गया है कि तेंदुए ने नीलगाय पर हमला करने के बाद उसे करीब 100 मीटर तक खींचा है। वन विभाग की टीम ने किसान योगेंद्र के गन्ने के खेत में पिंजरा लगा दिया है। पिंजरे में मृत नीलगाय के मांस के टुकड़े हो लटकाया गया है। माना जा रहा है कि तेंदुआ मांस की लालच में पिंजरे में आएगा और अंदर लटकाए गए मांस के पास पहुंचते ही पिंजरे का गेट बंद हो जाएगा।

मौके पर पहुंचे डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर मनीष सिंह ने बताया कि उन्हें मंगलवार दोपहर तेंदुए की सूचना गांव के लोगों ने दी थी। मौके पर पहुंचकर वन विभाग की टीम ने शाम करीब 4:00 बजे पिंजरा लगा दिया। इसके बाद खेत के आसपास 8 जवान लगाए गए हैं। दो शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है पहली शिफ्ट शाम छह बजे तक रहेगी। दूसरी शिफ्ट रात में नजर रखेगी। उधर मेरठ की स्पेशल टीम को ही अलर्ट पर रखा गया है।
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गांव में दहशत, खेतों में नहीं जा रहे किसान

तेंदुआ निकलने की सूचना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि वह कल से अपने खेत पर नहीं जा रहे हैं। किसान नरेश का कहना है कि गन्ने की छिलाई का काम चल रहा है लेकिन कल से गन्ना छीलने वाले खेतों पर आने से मना कर रहे हैं। किसान वीरेंद्र चौधरी ने बताया कि शाम के बाद घरों से बच्चों को निकलने नहीं दिया जाता है। रात में लाइट जला कर रखी जा रही है।

गाड़ी है न गन, निजी वाहन का ले रहे सहारा
वन  वन विभाग के पास ना तो गाड़ी है और ना ही ट्रेंकुलाइजर गन, निजी वाहन से टीम मौके पर पहुंच रही है। वन विभाग में दो रेंजर एक फॉरेस्ट अफसर और एक एसडीओ रैंक के अधिकारी हैं। टीम के पास वाहन के नाम पर जिला वन अधिकारी के पास ही एक गाड़ी है। अन्य अधिकारियों के पास निजी वाहन ही सहारा है। जिला वन अधिकारी मनीष सिंह का कहना है कि वाहनों के लिए मुख्यालय को कई बार पत्र लिखा जा चुका है। ट्रेंकुलाइजर गन मेरठ से मंगाई जाती है। इसके अलावा विशेषज्ञ टीम भी मेरठ से बुलाई जाती है। ड्रोन के लिए मेरठ से संपर्क किया जा रहा है।
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