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वाहनों के चालान में आई तेजी... छह लाख मामले अदालत में विचाराधीन
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आशुतोष यादव
गाजियाबाद। नियमों का पालन नहीं करने पर यातायात पुलिस की सख्ती बढ़ गई है। सख्ती बढ़ने के साथ ही अदालत में चालान की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन होने के बावजूद वाहनों के चालान का भुगतान कराने वाहन स्वामी नहीं आ रहे हैं। वर्तमान में गाजियाबाद की वर्चुअल अदालत में गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बिजनौर, शामली और मुजफ्फरनगर के छह लाख चालान के मामले विचाराधीन हैं। सभी वाहन स्वामियों को अदालत से नोटिस मेसेज के माध्यम से भेजा जा चुका है। सबसे अधिक गाजियाबाद और मेरठ के दो-दो लाख चालान हैं। सबसे कम शामली के 21 हजार चालान हैं।
कोर्ट में पहुंचने पर आरोप पत्र माना जाता है चालान
अधिवक्ता राजकुमार चौहान का कहना है कि कोई भी चालान अदालत में पहुंचता है तो वह आरोप पत्र (चार्जशीट) माना जाता है। अदालत चाहे तो मुकदमा चलाकर आरोपी को जेल भी भेज सकती है। अधिवक्ता ने बताया कि कि चालान आने पर अदालत पहले आर्थिक दण्ड भुगतने का विकल्प देती है। अगर वाहन स्वामी चुनौती देता है कि उसके वाहन का पुलिस या संभागीय परिवहन के अधिकारी ने गलत तरीके से चालान किया है तो सुनवाई का पूरा मौका मिलता है।
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प्रतिदिन एक हजार वाहनों का होता है चालान
अपर पुलिस उपायुक्त यातायात रामानंद कुशवाहा का कहना है कि यातायात पुलिस प्रतिदिन एक हजार से 1100 वाहनों के चालान अलग-अलग स्थानों पर करती है। लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक भी किया जाता है। चालान होने के बाद एक सप्ताह के अंदर ही अदालत में भेज दिए जाते हैं।
चालान होने पर परिवहन संबंधित कोई काम नहीं होता
सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) राघवेंद्र सिंह ने बताया कि किसी भी वाहन पर चालान विचाराधीन होने पर वाहन स्वामी न तो गाड़ी बेच सकता है, न ही ट्रांसफर कर सकता है।
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स्वयं कर सकते हैं चालान का भुगतान
वीकोर्ट डॉट जीओवी डॉट इन पर उत्तर प्रदेश ट्रैफिक चालान पर क्लिक करके कोई भी अपने नाम, मोबाइल नंबर, मोबाइल पर आए मेसेज का चालान देख सकता है। साथ ही अर्थदंड का भुगतान कर सकता है। भुगतान के तीन दिन बाद स्वत: हट जाता है।
जिले के अनुसार चालान की संख्या
गाजियाबाद दो लाख
मेरठ दो लाख
सहारनपुर 80 हजार
मुजफ्फरनगर 60 हजार
बिजनौर 40 हजार
शामली 21 हजार
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