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Ghaziabad News: बंदरों की समस्या से निजात दिलाएगा नगर निगम

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बंदरों की समस्या से निजात दिलाएगा नगर निगम
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गाजियाबाद। बंदरों को पकड़ने के लिए अब नगर निगम को वन विभाग से एनओसी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जनवरी में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम से बंदरों को हटा दिया गया है। जिला वन अधिकारी मनीष सिंह ने बताया कि बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी स्थानीय निकाय की होती है। बंदरों के बढ़ते उत्पाद से शहरवासी परेशान हैं। नगर निगम में हर महीने 15 से 20 शिकायतें बंदरों से संबंधित दर्ज कराई जा रही हैं। नगर निगम वन्यजीव होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। पीड़ित लोग कभी वन विभाग तो कभी नगर निगम का चक्कर लगाते हैं। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आशीष त्रिपाठी का कहना है कि बंदरों को पकड़ने के लिए तीन साल पहले एनओसी वन विभाग से मांगी गई थी, एनओसी भी मिली थी लेकिन कुछ ही दिनों में पीएफए के हस्तक्षेप के बाद वन विभाग ने एनओसी कैंसल कर दी थी। दो हजार बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग से एनओसी मांगी गई थी। डॉ. आशीष ने बताया कि अधिनियम में यदि संशोधन हुआ है तो उसका अध्ययन कर बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई की जाएगी।
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विजयनगर और बजरिया में सबसे अधिक उत्पात
नगर निगम में बंदरों से संबंधित सबसे अधिक शिकायतें विजयनगर और बजरिया से हैं। विजयनगर सेक्टर नौ ई ब्लाक में रविवार को बंदरों ने कई लोगों की बालकनी में लगे पौधे नोच लिए। राम अवतार शर्मा की बालकनी में सूख रहे कपड़े उठा ले गए। केबल को उखाड़ दिया। पार्क में बंदरों के आने के बाद बच्चों को खेलना कूदना बंद हो गया है। बजरिया निवासी विकास गौड़ का कहना है कि बंदर झुंड में आते हैं, उनको भगाने की कोशिश करने पर वह दौड़ा लेते हैं।
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फरवरी में आईं शिकायतें
सिटी जोन 03
विजयनगर : 05
मोहनगर जोन : 02
कविनगर जोन : 02
वसुंधरा जोन : 03
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