लोनी में भी चला था पावर ऑफ अटार्नी का खेल
गाजियाबाद। पावर ऑफ अटार्नी का खेल लोनी में भी लंबे समय से चल रहा है। लोनी में क्षेत्र में वर्तमान वित्तीय वर्ष में अब तक करीब छह हजार से ज्यादा पावर ऑफ अटार्नी हो चुकी हैं। लोनी में पावर ऑफ अटार्नी के माध्यम से सरकारी जमीन को भी बेचा गया है। हालांकि एसआईटी की जांच के दायरे में लोनी को नहीं रखा गया। 2019 में यहां पावर ऑफ अटार्नी से फर्जीवाड़ा करके सरकारी जमीन बेचने के एक मामले में तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार समेत जमीन बेचने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
लोनी क्षेत्र दिल्ली के सबसे ज्यादा नजदीक है। ऐसे में दिल्ली के पावर ऑफ अटार्नी के सबसे ज्यादा मामले लोनी में ही पंजीकृत किए जा रहे हैं। इसके बावजूद सिर्फ गाजियाबाद सदर तहसील में कार्रवाई की गई है। इस मामले में सदर तहसील बार एसोसिएशन के पदाधिकारी शासन के अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक वर्मा ने बताया कि लोनी में वर्ष 2019-20 में 11696, वर्ष 2020-21 में 7480 और 2021-22 में 10038 और 2023 में अब तक 6200 से ज्यादा पावर ऑफ अटार्नी हो चुकी हैं। बीते तीन साल में करीब 35 हजार पावर ऑफ अटार्नी अकेले लोनी क्षेत्र में हुई हैं। उनका कहना है गौतमबुद्धनगर में गाजियाबाद से ज्यादा पावर ऑफ अटार्नी हुई हैं, लेकिन शासन में बैठे कुछ अधिकारियों ने न तो गौतमबुद्धनगर में किसी पर कार्रवाई की और न ही लोनी क्षेत्र में जांच हुई। उनका कहना है कि हाईकोर्ट में 14 मार्च को होने वाली सुनवाई से पहले रीज्वाइंडर दाखिल कर वह लोनी के आंकड़ों को भी पेश करेंगे और शासन के पक्षपात पूर्ण रवैये का मामला उठाएंगे।
सब-रजिस्ट्रार समेत कई लोगों पर दर्ज हुई थी एफआईआर
सितंबर 2019 में लोनी के तत्कालीन तहसीलदार और कानूनगो ने सरकारी जमीन को पावर ऑफ अटार्नी के आधार पर बेच देने का मामला पकड़ा था। इस मामले में कई हेक्टेयर जमीन मंडोला के रहने वाले एक व्यक्ति ने दिल्ली और खेकड़ा, बागपत के रहने वाले कुछ लोगों को बेच दिया था। इस मामले में जांच हुई तो फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। तत्कालीन तहसीलदार और कानूनगो ने लोनी के तत्कालीन सब-रजिस्ट्रार समेत सात लोगों के खिलाफ फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अब यह सब-रजिस्ट्रार प्रमोशन के बाद एक पड़ोसी जिले में एआईजी के पद पर तैनात हैं।