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गाजियाबाद: भ्रष्टाचार की नींव पर बन रही थी अवैध फैक्टरी की इमारत

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भ्रष्टाचार की नींव पर बन रही थी अवैध फैक्टरी की इमारत
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गाजियाबाद। लोनी के रूपनगर में जिस निर्माणाधीन फैक्टरी का लिंटर गिरने से दो लोगों की जान गई, वह भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी थी। उसे बनाने के लिए न तो अनुमति ली गई थी और न ही उसका नक्शा पास कराया गया था। इस अवैध निर्माण पर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अफसर आंख मूंदे रहे। हादसे के बाद जीडीए उपाध्यक्ष ने अवर अभियंता सीपी शर्मा और सुपरवाइजर शेर सिंह को निलंबित कर दिया। साथ ही प्रवर्तन प्रभारी मानवेंद्र सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए संस्तुति की गई है।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के सचिव बृजेश कुमार ने बताया कि प्रवर्तन प्रभारी औपचारिकता पूरी करने के लिए संबंधित जोन में तोड़फोड़ कर देते हैं। लोनी क्षेत्र में पिछले दो साल में कई अवैध कालोनियां विकसित हो चुकी हैं, इसके बावजूद कार्रवाई सिर्फ आठ अवैध निर्माण के खिलाफ हुई है। यह स्थिति उस समय है, जब हर जोन में अवैध निर्माण की निगरानी के लिए सुपरवाइजर से लेकर अधीक्षण अभियंता और पीसीएस अधिकारियों की पूरी फौज की जिम्मेदारी तय होती है। जीडीए के ही एक अधिकारी का कहना है कि विभाग के पास इतनी सुविधाएं नहीं हैं कि सबको घर उपलब्ध करा सकें, ऐसे में अगर अवैध निर्माण पूरी तरह से बंद कर दिया जाए तो लोगों को रहने में परेशानी हो जाएगी।
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हादसे के बाद ही सक्रिय होते हैं अफसर
जीडीए बोर्ड सदस्य भाजपा नेता पवन गोयल का कहना है कि जिले में लगातार अवैध निर्माण हो रहे हैं। बिना नक्शा पास कराए लोग मिलीभगत कर निर्माण कर रहे हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत भी कई। कार्रवाई के नाम पर नोटिस और निर्माण ढहाने के नाम पर औपचारिकता की जाती है। दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
लिंटर गिरते ही निकली चीखें... बचाओ-बचाओ
18.20 मजदूर कर रहे थे काम, पहले दिवारें गिरीं और फिर छत नीचे आ गई
लोनी। रूपनगर में फैक्टरी की छत का लिंटर डाले जाने के दौरान 18 से 20 मजदूर काम कर रहे थे। दस से ज्यादा छत पर थे और बाकी नीचे। तभी अचानक दीवारें ढह गईं और अगले ही पल लिंटर धड़ाम से गिर पड़ा। आसपास खड़े मजदूर चीखते हुए भागने लगे। देखते ही देखते इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। इसमें दबे मजदूरों की जोर से चीख सुनाई देने लगी, बचाओ... बचाओ। करीब 15 मिनट तक ये चीखें गूंजती रहीं। इसके बाद आसपास के लोग आए और उन्होंने मलबा हटाकर मौत के मुंह में फंसी जिंदगी को बाहर निकालना शुरू किया। बचाव अभियान देर रात तक चलता रहा। संवाद
थोड़ी सी देर और होती
तो वे पांच नहीं बच पाते
रूपनगर में रहने वाले जमील ने बताया कि छत का लिंटर गिरते ही सबसे पहले पहुंचे लोगों में वह भी शामिल था। वहां कई लोग मलबे में दबे थे। पांच लोग बुरी तरह चीख रहे थे। ये मलबे में ऊपर की तरफ थे। ये लोग छत के साथ ही गिरे थे। उन तक पहुंचना बहुत मुश्किल था। उनके ऊपर भारी पिलर लटके हुए थे, जो कभी भी गिर सकते थे। अगर उन पांच लोगों को वहां से निकालने में थोड़ी सी देर और हो जाती तो उनकी जिंदगी बच पाना मुश्किल था। पिलर गिरते ही कुछ भी हो सकता था। आसपास के लोगों ने पुलिस के आते ही बचाव अभियान शुरू कर दिया। लोगों ने हाथ से मलबे से पत्थरों को हटाया और उन पांचों को बाहर निकाला। उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उनकी जान बच गई। पांचों को गुरु तेग बहादुर अस्पताल रेफर किया गया है।
चार मजदूरों ने टिन शेड
पर कूदकर बचाई जान
लोनी। लिंटर गिरने के दौरान ही चार मजदूर पास के टिन शेड पर कूद गए। उनकी जान बच गई। इसके बाद उन मजदूरों ने मलबे में दबे अपने साथियों को बचाने का प्रयास भी किया। मौके पर पहुंचे पड़ोस के दुकानदारों ने बताया कि टिन शेड से उतरकर पहुंचे मजदूरों ने ही शोर मचाकर आसपास से लोगों को बुलाया। उन्होंने बताया कि अगर वे ऐन वक्त पर न कूदते तो मलबे में दब जाते और उनकी जान खतरे में पड़ जाती। बचाव अभियान आसान नहीं था। एनडीआरएफ और लोनी पुलिस ने लिंटर में डले सरिये को गैस कटर से काटकर मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए काफी देर तक जद्दोजहद की। इससे पहले डॉग स्क्वॉड की जांच में भी दो से तीन लोगों के फंसे होने की आशंका व्यक्त की गई, जिसमें एक बच्चा भी शामिल बताया गया। पुलिस आयुक्त अजय मिश्रा ने निर्माणाधीन फैक्टरी पर घटना का जायजा लेकर तत्काल बचाव राहत कार्य शुरू करने के निर्देश दिए। हादसे के बाद से देर रात तक जेसीबी की मदद से मलबे को हटाने का काम चलता रहा।
कमजोर दीवारों पर ही डाल दिया था लिंटर
एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने बताया कि बिल्डिंग की दोनों दीवारें पहले से बनी थीं। उन दीवारों के ऊपर हाल ही पिलर बना कर लिंटर डाला जा रहा था। पिलर ताजा होने से लिंटर पर लोड पड़ते ही छत भरभराकर गिर गई, जिससे यह हादसा हुआ। जाहिर है कि दीवारें कमजोर थीं।
रूप नगर क्षेत्र के रहने वाले लोगों के मुताबिक करीब एक माह से प्लाट पर फैक्टरी बनाने का निर्माण कार्य चल रहा था। दीवार बनाने के बाद 15 दिन पूर्व पांच फुट मिट्टी का भराव कराया गया। भराव पूरा होते ही लिंटर के लिए सेटरिंग बांधनी शुरू करा दी गई। शनिवार शाम सेटरिंग का कार्य पूरा हुआ तो रविवार सुबह लिंटर डालने का कार्य शुरू किया गया। सुबह नौ बजे लिंटर डालने के लिए लेबर प्लाट पर पहुंची। करीब दस बजे से लिंटर डालने का कार्य शुरू किया गया। चार बजे तक सेटरिंग पर मसाला डालने का 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो सका तभी अचानक लिंटर नीचे गिर गया।
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पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि प्लॉट मालिक मदनलाल शर्मा और उसका दामाद आकाश शर्मा दोनों निर्माण कार्य पूरा कर फैक्टरी को किराए पर देना चाहते थे। डीसीपी रवि कुमार का कहना है कि घटनास्थल पर फंसे लोगों को निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया है। लापरवाही किस स्तर से हुई और हादसे का कारण क्या था। सभी तथ्यों पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। प्लॉट मालिक जावली निवासी मदन लाल शर्मा और उसके रिश्तेदार आकाश से भी पूछताछ की जाएगी
दर्दनाक हादसा
सुबह नौ बजे : मजदूर काम के लिए आए।
सुबह दस बजे : लिंटर डाला जाना शुरु हुआ।
दोपहर चार बजे : लिंटर तेजी से गिर गया।
सवा चार बजे : पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
साढ़े चार बजे : मलबे से मजदूर निकाले गए।
छह बजे : एनडीआरएफ की टीम पहुंची।
सवा छह बजे : डीएम और पुलिस कमिश्नर पहुंचे।
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