खर्च किए एक करोड़ फिर भी कम नहीं हुए कुत्तों के हमले
गाजियाबाद। नगर निगम पिछले दस साल में आवारा कुत्तों की नसबंदी पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर चुका है लेकिन न तो कुत्तों के काटने के मामले कम हो रहे हैं और न ही संख्या। एक संस्था की ओर से तीन साल पूर्व कराए गए एक सर्वे में गाजियाबाद नगर निगम सीमा में 30 हजार आवारा कुत्ते बताए गए थे। तीन साल बाद अब कुत्तों की संख्या 36 हजार से ज्यादा पहुंच गई है।
2013 में आवारा कुत्तों के काटने की घटना बढ़ी तो नगर निगम ने पीपल फॉर एनिमल संस्था को कुत्तों की नसबंदी का ठेका दिया। संस्था ने चार फरवरी 2013 से 18 मई 2013 तक साढ़े तीन महीने में मात्र 315 आवारा कुत्तों की नसबंदी की। तीन जून से तीन सितंबर तक महज 178 नसबंदी हुई। 2015 में कुत्तों की नसबंदी की रफ्तार और धीमी हो गई। एक जनवरी 2015 से सितंबर 2015 तक आठ महीने में 588 यानी हर महीने 71 की नसबंदी हुई। 2013 से 2019 तक पीएफए संस्था की ओर से करीब 17702 कुत्तों की नसबंदी का दावा किया गया है। 2020 से 2022 तक महज 372 आवारा कुत्तों की नसबंदी की गई। निगम अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान कोरोना संक्रमण होेने से नसबंदी का काम धीमी गति से हुआ।
कुत्तों की आक्रामकता होती है कम
पशु चिकित्सक डॉ. विजय पाठक का कहना है कि नसबंदी के बाद कुत्तों की आक्रामकता कम हो जाती है। इसके अलावा जनसंख्या में कमी आएगी। कुत्तों की नसबंदी का अभियान क्षेत्रवार चलाने पर सफलता मिलेगी।
10 साल में नसबंदी पर खर्च
साल संख्या दर खर्च
2013- 2019 तक 17702 500 रुपये प्रति नसबंदी 8851000
2019-2022 तक 372 750 रुपये प्रति नसबंदी 279000
अक्तूबर 2022 से 1562 749 रुपये प्रति नसबंदी 1169938
पांच करोड़ से बनेगा नया एबीसी सेंटर
उप मुख्य नगर पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनुज का कहना है कि प्रताप विहार में नया एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। करीब पांच करोड़ रुपये की डीपीआर बनाकर शासन को भेजी गई है। नया सेंटर बनने पर एक दिन में 100 कुत्तों की नसबंदी की जा सकेगी।
हर महीने एआरवी लगवाने पहुंच रहे 2500 लोग
मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. मनोज चतुर्वेदी का कहना है। हर महीने जिला एमएमजी एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने करीब 2500 लोग पहुंच रहे हैं। वहीं, नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि हर महीने 15 से 20 शिकायतें आ रही हैं। शिकायत मिलने पर टीम भेजकर कुत्तों का पकड़ा जाता है और एबीसी सेंटर लाकर नसबंदी की जाती है।
इन इलाकों से सबसे अधिक शिकायतें
राजनगर एक्सटेंशन, क्रासिंग रिपब्लिक, शालीमार गार्डन, वैशाली