उद्घाटन तो हो गया पर चिकित्सकों का करना होगा इंतजार
गाजियाबाद। राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान के उद्घाटन के बाद भी अभी मरीजों को सुविधा के लिए चिकित्सकों का इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल पांच चिकित्सकों के सहारे ही अस्पताल की ओपीडी संचालित हो रही है। कपिंग थेरेपी को शुरू करने के लिए भी स्टाफ की मांग की गई है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी की संबद्धता की प्रक्रिया जनवरी से शुरू की जाएगी।
निर्माण के तीन महीने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यूनानी संस्थान का लोकार्पण किया। तीन महीने में अभी अस्पताल में महज पांच चिकित्सक तैनात हुए हैं।
संस्थान के सीईओ प्रो. जुल्कीफल ने बताया कि ओपीडी में महिला रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ इलाज कर रहे हैं हृदय रोग के मरीजों का स्वयं इलाज कर रहे हैं। विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के बाद छात्रों का दाखिला शुरू होगा। इसके बाद एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और खून की जांच शुरू होगी।
इस वर्ष नहीं शुरू हो पाएगी कपिंग थेरेपी
सीईओ ने बताया कि कपिंग थेरेपी या हिजामा चिकित्सा के लिए भी अभी स्टाफ की जरूरत है जिसकी डिमांड भेजी गई है। 15 नवंबर से इसे शुरू करने की योजना बनाई गई थी। चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई है, लेकिन अभी थेरेपी शुरू करने केलिए पैरामेडिकल स्टाफ की जरूरत है। जनवरी तक स्टाफ की तैनाती की उम्मीद है। इसके बाद औषधीय मालिश सहित स्टीम बाथ, हिप बाथ, सोना बाथ आदि की सुविधाएं भी शुरू होंगी।
इनसेट:
662 मरीज पहुंचे इलाज कराने
लोकार्पण के बाद सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में 662 मरीज पहुंचे। आम दिनों में जहां 340 से लेकर 400 मरीज पहुंचते थे वहीं उद्घाटन के बाद 250 मरीज अधिक पहुंचे। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण शाम को 5:30 बजे तक ओपीडी चलती रही। इसमें सबसे अधिक सर्दी-जुकाम और सांस के रोगी पहुंचे।
----------
सायरन बजने पर मची अफरातफरी
11 बजे अस्पताल में अचानक सायरन बजने पर अफरातफरी मच गई। मरीज और संस्थान के अधिकारी भी केबिन से बाहर निकल कर आ गए। लोगों को लगा कि किसी बच्चे ने अलार्म का बटन दबाया है या किसी ने धूम्रपान किया है जिसकी वजह से फायर अलार्म बजा है। बाद में सभी को बताया गया कि मॉक टेस्ट किया जा रहा था।
----------
दूसरे जिले के मरीजों का एक बजे बाद भी होगा रजिस्ट्रेशन
अस्पताल में सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर एक बजे तक मरीजों का पंजीकरण किया जाता है लेकिन जो मरीज दूसरे जिलों के होंगे वह एक बजे के बाद भी आएंगे तो उनका पंजीकरण किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इसकेलिए अन्य जिलों के मरीजों को अपना आधार कार्ड या कोई और प्रमाणपत्र दिखाना होगा।
-----
381.42 करोड़ की लागत से बने इस संस्थान में हैं 14 विभाग हैं। यहां पर विद्यार्थी परास्नातक के साथ डाक्टरेट भी कर सकेंगे। इस अस्पताल में 200 बेड के साथ उच्च तकनीक और उपकरणों से लैस आईसीयू भी है। 10 एकड़ में बने इस अस्पताल में छात्र अनुसंधान भी कर सकेंगे जिसके लिए 50 करोड़ की लागत से लैब भी बनाया गया है। छात्र-छात्राओं के लिए 154 छात्रावास बने हैं और 73 स्टाफ क्वार्टर हैं। इसमें आईसीयू, पांच ऑपरेशन थियेटर, प्रसूति विभाग, ब्लड बैंक, डिजिटल एक्सरे कक्ष, एमआरआई, सीटी स्कैन, इमरजेंसी, नर्सरी और प्राकृतिक चिकित्सा का भी इंतजाम है।