सरकारी अस्पतालों की हालत सुधारिये योगी जी...
गाजियाबाद। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हर वर्ष करोड़ों का बजट खर्च किया जाता है फिर भी मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल रही है। सभी अस्पताल रेफर सेंटर बने हुए हैं। कहीं चिकित्सकों की कमी हैं तो कहीं आईसीयू और आधुनिक मशीनों की कमी है जिसकी वजह से अधिकतर मरीजों को दिल्ली और आसपास के जिलों के अस्पताल में भेजा जा रहा है।
चिकित्सकों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों में उपकरण रखे-रखे खराब हो रहे हैं। कहीं चिकित्सक हैं तो वहां भवन और उपकरण नहीं हैं। तीन जिला अस्पताल हैं, जिसमें से सिर्फ एक अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट हैं। बाकी स्थानों पर अल्ट्रासाउंड मशीनें बंद पड़ी हैं।
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केस - 1
जोया को दिल्ली किया रेफर, नहीं मिला इलाज
संयुक्त जिला अस्पताल में गंभीर हालत में ढबारसी से 10 वर्षीय जोया को लाया गया था। चिकित्सकों का कहना था कि उसके दोनों फेफड़े खराब थे और आईसीयू की जरूरत थी। इसलिए उसको चाचा नेहरू अस्पताल दिल्ली रेफर किया गया। मरीज के पिता का कहना था कि दिल्ली जाने पर उसको वहां से भी यह कहकर भेज दिया गया कि अस्पताल में बेड नहीं है।
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केस-2
एक वर्ष की बच्ची बिना उपचार के लौटी
विजयनगर में एक वर्षीय बच्ची को कुत्ते ने बुरी तरह से चेहरे पर काट लिया था। बच्ची को प्लास्टिक सर्जन की जरूरत थी इसलिए नोएडा के पीजीआई अस्पताल रेफर किया गया लेकिन वहां से भी मरीज को वापस भेज दिया गया।
एमएमजी अस्पताल
- हृदय रोग विभाग बंद, एक भी चिकित्सक नहीं
- सिटी स्कैन मशीन बिजली कनेक्शन की वजह से नहीं हो सका स्थापित
- बर्न वार्ड के लिए प्लास्टिक सर्जन और स्टाफ की कमी
- 13 चिकित्सकों की कमी
- ब्लड बैंक में एफरेसिस मशीन के लाइसेंस का इंतजार
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संयुक्त अस्पताल
- रेडियोलॉजिस्ट, दंत रोग विशेषज्ञ 20 चिकित्सकों की कमी
- 2008 में बना ट्रॉमा सेंटर मरहम पट्टी तक सीमित
- ट्रामा सेंटर की एक्सरे मशीन खराब