फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फफर्जी दस्तावेज पर की 20 साल नौकरी, एमएमएच इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य निलंबित

विज्ञापन
विज्ञापन
फर्जी दस्तावेज पर की 20 साल नौकरी, एमएमएच इंटर कॉलेज प्रधानाचार्य निलंबित
विज्ञापन

गाजियाबाद। फर्जी दस्तावेज पर 20 साल तक नौकरी करने के मामले में एमएमएच इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अवधेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश एसटीएफ की आठ माह की लंबी जांच में गाजियाबाद और बुलंदशहर के दो अलग-अलग विद्यालयों से छठवीं से 12वीं तक की पढ़ाई का फर्जीवाड़ा सामने आया। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में अधिक अंक वाली अंकतालिका का इस्तेमाल कर मई 2003 में हापुड़ के सरस्वती विद्यालय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता पद पर नियुक्ति पाई।
अवधेश कुमार अक्तूबर 2013 से एमएमएचवी इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य पद पर नियुक्त थे। यूपी एसटीएफ अपर पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर एसटीएफ अपर पुलिस अधीक्षक ने जिला विद्यालय निरीक्षक गाजियाबाद को कार्रवाई के निर्देश दिए। फिर डीआईओएस राजेश श्रीवास के आदेश और एसटीएफ की जांच का हवाला देते हुए विद्यालय प्रबंधक विनय कृष्ण मोहन ने बुधवार को निलंबन के आदेश जारी कर दिए गए। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले में प्रधानाचार्य के खिलाफ विधिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।
विज्ञापन

बीएड और पीएचडी एक साथ की
प्रधानाचार्य के फर्जी दस्तावेज की शिकायत उत्तर प्रदेश एसटीएफ में फरवरी 2022 में की गई। फिर एसटीएफ ने मार्च 2022 में मामले की जांच शुरू की। मामले में एसटीएफ यूनिट गौतमबुद्धनगर अपर पुलिस अधीक्षक राज कुमार मिश्र ने जांच शुरू की। जांच में दो जनपदों के अलग-अलग विद्यालयों से छठवीं से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई करने का मामला तो सामने आया। दूसरी ओर प्रधानाचार्य ने चौ. चरण सिंह विश्वविद्यालय से एक समय में बीएड और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। जबकि नियमानुसार कोई भी अभ्यर्थी दो उपाधियां एक साथ नहीं ले सकता है।
शिकायत पर नहीं की कार्रवाई, 2019 में दी क्लीन चिट
मामले में मुख्य शिकायतकर्ता सुबह फाउंडेशन के निशांत त्यागी की शिकायत पर एसटीएफ ने जांच की। उससे पहले विद्यालय के गणित विषय के प्रवक्ता कपिल कुमार और शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रवक्ता अरुण कुमार ने जिला विद्यालय निरीक्षक और प्रबंधन से कई बार शिकायत की। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 2014 से लगातार शिकायत की गई, लेकिन विभागीय अधिकारियों की सांठगांठ से कोई कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी ओर अब निलंबन की कार्रवाई करने वाले विद्यालय प्रबंधन समिति ने 30 मार्च 2019 की बैठक में शिकायत पर जांच के बाद क्लीन चिट दे दी थी। शिकायत कर्ताओं ने छठवीं में भी दाखिला फर्जी ट्रांसफर सर्टिफिकेट के आधार पर लेने का आरोप लगाया है।
फंस सकते हैं तत्कालीन शिक्षा अधिकारी
फर्जी दस्तावेजों की जांच में लापरवाही बरतने के मामले में माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मुश्किल बढ़ सकती है। यूपी एसटीएफ की जांच को संज्ञान लेते हुए शासन में संयुक्त सचिव राम प्रताप विमल ने शिक्षा निदेशक को मामले की जांच कर विस्त़ृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें शिकायत के दौरान तैनात अधिकारियों की जांच संबंधी रिपोर्ट तलब की है।
विज्ञापन

आदेश पर प्रबंधन ने की निलंबन की कार्रवाई
डीआईओएस राजेश श्रीवास ने बताया कि यूपी एसटीएफ की जांच के मिले पत्र के बाद एमएमएचवी प्रबंधन को कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। उसी क्रम में विद्यालय प्रबंधन ने प्रधानाचार्य के निलंबन की कार्रवाई की है। विद्यालय की ओर से ही आगे विधिक कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें