ऑपरेशन का नहीं किया इंतजाम... ओटी में रखा गोदाम का सामान
गाजियाबाद। ऑपरेशन टेबल पर चादरें, पास में कूड़ेदान, थोड़ी दूरी पर कंस्ट्रेटर के डिब्बे और जगह-जगह रखा अन्य सामान... देखते ही लगता है कि यह किसी अस्पताल का गोदाम है लेकिन ऐसा है नहीं। यह संयुक्त अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर का ऑपरेशन थियेटर (ओटी) है, जिसमें 14 साल में सिर्फ दो महीने ही ऑपरेशन किए गए हैं। कर्मचारियों ने इसे गोदाम की तरह इस्तेमाल करना शायद इसलिए ही शुरू किया है क्योंकि ऑपरेशन तो इसमें होते ही नहीं है। हों भी तो कैसे जब यहां सर्जन की तैनाती ही नहीं है।
ट्रॉमा सेंटर बसपा के शासन काल में 2008 में इस दावे के साथ शुरू किया गया था कि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार मिलेगा लेकिन 14 साल बाद भी दावों के हकीकत में बदलने का इंतजार खत्म नहीं हुआ है। ट्रॉमा सेंटर के बाद भी शुरू किए गए ऑपरेशन थियेटर में पहला ऑपरेशन 2020 में हुआ। वह भी इसलिए क्योंकि तब स्त्री रोग विभाग की ओटी में मरम्मत का काम चल रहा था। यह दो महीने चला, इसलिए स्त्री रोग विभाग के ऑपरेशन ट्रॉमा सेंटर के ओटी में किए गए। इसके बाद फिर से ताला लगा दिया। पिछले कुछ समय से ट्रॉमा सेंटर के कर्मचारियों ने गोदाम का बचा सामान इसमें रखना शुरू कर दिया।
इनकी है आवश्यकता : एक न्यूरो सर्जन, दो जनरल सर्जन, दो आर्थोपेडिक सर्जन, दो कार्डियोलॉजिस्ट, चार इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर, दो एनेस्थेटिस्ट, दो ओटी टेक्निशियन, स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय। डिजिटल एक्सरे मशीन और वेंटीलेटर भी नहीं हैं।
मशीन खराब... एक्सरे भी बंद
ट्रॉमा सेंटर की एक्सरे मशीन खराब पड़ी है। यहां एक्सरे भी नहीं हो पा रहे हैं। एक्सरे के लिए दो टेक्नीशियन रखे गए थे। एक की सड़क हादसे में मौत हो गई। एक्सरे मशीन खराब होने पर दूसरे की ड्यूटी ईसीजी मशीन पर लगा दी गई। यहां से एक्सरे के मरीज जिला एमएमजी अस्पताल में भेज दिए जाते हैं।
तीन सरकारें बदलीं...ऑपरेशन शुरू न हुए
ट्रॉमा सेंटर बसपा के शासन में बना। इसके बाद सपा की सरकार आई और फिर दो बार भाजपा की लेकिन ट्रॉमा सेंटर में ऑपरेशन शुरू नहीं हो पाए। वर्ष 2016 में दो एक्सरे टेक्नीशियन, दो आर्थोपेडिक सर्जन और स्टाफ नर्स तैनात किए गए थे लेकिन आवश्यकता के हिसाब से ये नाकाफी थे। यह सेंटर सामान्य अस्पताल की सामान्य इमरजेंसी की तरह काम कर रहा है। माइनर ओटी में टांके लगाए जाते हैं लेकिन मुख्य ऑपरेशन थियेटर को गोदाम की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
कुछ दिन के लिए रखे हैं कंस्ट्रेटर
संयुक्त अस्पताल के सीएमएस विनोद चंद्र पांडेय का कहना है कि जितना स्टाफ और चिकित्सक हैं, उनके सहारे ही ओटी का प्रयोग किया जा रहा है। बीच-बीच में माइनर ऑपरेशन किए जाते हैं। इसे गोदाम नहीं बनाया है। कुछ समय के लिए कंस्ट्रेटर रखे हैं। इन्हें निकालकर वार्ड में लगाया जाएगा।