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सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रहीं शुगर और दर्द की दवाएं

सार

सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रहीं शुगर और दर्द की दवाएंगाजियाबाद।पूरे जिले में शुगर के मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।पहले जहां सरकारी अस्पतालों में भी इंसुलीन के इंजेक्शन, रेबीज के लिए सीरम सहित अन्य कई दवाएं मिलती थी वह मिलनी बंद हो गई हैं।
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सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रहीं शुगर और दर्द की दवाएं
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अधिकतर दवाएं नहीं मिल रही हैं। इलाज के लिए सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। पूरे जिले में शुगर के मरीजों को दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके अलावा पेट से संबंधित, दर्द के मलहम मरीजों को बाहर से ही खरीदने पड़ रहे हैं।
उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाइज कॉरपोरेशन की सप्लाई होने के बाद से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता पहले से भी कम होने लगी है। पहले जहां सरकारी अस्पतालों में भी इंसुलीन के इंजेक्शन, रेबीज के लिए सीरम सहित अन्य कई दवाएं मिलती थी वह मिलनी बंद हो गई हैं। इसके अलावा सामान्य दवाओें में शुगर की दवाएं पूरे जिले के सरकारी अस्पतालों में नहीं मिल रही हैं। जिला स्तर पर कुछ अस्पतालों में स्थानीय खरीद की जा रही है तो कहीं इसकी खरीद भी नहीं हो रही है। मरीजों को बाहर की दवाएं लिखी जा रही हैं। सरकारी अस्पतालों में जनऔषधि केंद्र खोले गए थे वह भी बंद हो चुके हैं। इसके अलावा अस्पतालों में बीपी, थायराइड, एंटी एलर्जिक टेबलेट्स, गैस की दवाएं भी नहीं हैं। किसी-किसी बीमारी की एक ही प्रकार की दवा अस्पताल में उपलब्ध होती है जिससे मरीजों को कोई फायदा नहीं होता है।
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फिजिशियन अंशुल वार्ष्णेय ने बताया कि शुगर और बीपी के इलाज में कई बार मल्टीड्रग का सहारा लेना पड़ता है। एक दवा से अगर शुगर या बीपी कंट्रोल नहीं हुआ तो दो तीन दवाओं का कम्बिनेशन देना पड़ता है।
वापस लौट रहे मरीज
डासना की मरीज कौसर ने बताया कि वह शुगर की बीमारी की मरीज है। पिछले कई दिनों से अस्पताल में न तो शुगर की दवा मिल रही है ना ही इंसुलीन के इंजेक्शन। पर्ची में छह दवाएं लिखी जाती हैं लेकिन उनमें से एक या दो ही दवाएं मिलती हैं बाकी बाहर से खरीदना पड़ता है।
मालीवाड़ा से अपने बच्चे का इलाज कराने आए विशाल ने बताया कि बच्चे को मौसमी बुखार है लेकिन उसकी भी दवा अस्पताल में नहीं मिली। इलाज के लिए अस्पताल आते हैं लेकिन बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं।
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सीएमओ भवतोष शंखधार ने बताया कि कुछ दवाओं की कमी अभी चल रही है बाकी अधिकतर दवाएं उपलब्ध हैं। सरकारी विभाग में बेसिक दवाएं उपलब्ध होती हैं। मरीज निजी अस्पतालों की तरह हर दवाई चाहते हैं।
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