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बिल्डरों के 465 फ्लैट बिके, जीडीए का एक भी नहीं

सार

मधुबन बापूधाम योजना में कुल खाली 632 भवनों में से अकेले दो बीएचके के 435 फ्लैट हैं।मधुबन बापूधाम में सी-पॉकेट स्थित बहुमंजिला आवासीय योजना में दो बीएचके के फ्लैट की कीमत 50.58 लाख से 52.58 लाख तक है। चंद्रशिला योजना में दो बीएचके के खाली 43 फ्लैटों की कीमत 43 लाख से 55.93 लाख के बीच में है, जो कि बाजार में उपलब्ध फ्लैट की तुलना में ज्यादा है। अब सख्त निगरानी की जा रही है और बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।जीडीए के फ्लैट बिकने में परेशानीएक बार दाम तय होने के बाद भी लागत बढ़ाने के नाम पर जीडीए मूल्य बढ़ा देता है।समय पर ग्राहकों को फ्लैट मिल नहीं पाते हैं।
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विस्तार
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बिल्डरों के 465 फ्लैट बिके, जीडीए का एक भी नहीं
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गाजियाबाद। पिछले पांच साल में पहली बार ऐसा हुआ है जब नवरात्र में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कोई संपत्ति नहीं बिकी है, जबकि निजी विकासकर्ताओं (बिल्डरों) के इन आठ दिन में 465 फ्लैट में बिके हैं। जीडीए की छह मुख्य आवासीय योजनाओं में 1667 फ्लैट खाली पड़े हैं। पुरानी योजनाओं में खाली भवनों की लगातार योजना निकालने और फिर अब पहले आओ, पहले पाओ की स्कीम के बावजूद खरीदार आगे नहीं आ रहे हैं। निजी बिल्डरों के मुकाबले प्राधिकरण के फ्लैटों की अधिक कीमत भी लोगों की बेरुखी का कारण बन रही है। प्राधिकरण की विभिन्न योजनाओं में सबसे ज्यादा दो बीएचके के फ्लैट खाली हैं। मधुबन बापूधाम योजना में कुल खाली 632 भवनों में से अकेले दो बीएचके के 435 फ्लैट हैं।
मधुबन बापूधाम में सी-पॉकेट स्थित बहुमंजिला आवासीय योजना में दो बीएचके के फ्लैट की कीमत 50.58 लाख से 52.58 लाख तक है। जबकि निजी बिल्डरों के विभिन्न योजनाओं में दो बीएचके के फ्लैट 30 से 35 लाख तक उपलब्ध हैं। मधुबन बापूधाम के बाद कोयल एंक्लेव आवासीय योजना और इंद्रप्रस्थ आवासीय योजना में सर्वाधिक दो बीएचके के फ्लैट खाली पड़े हैं। इंद्रप्रस्थ योजना में दो बीएचके के 322 और कोयल एंक्लेव योजना में दो बीएचके के 340 भवन खाली हैं। चंद्रशिला योजना में दो बीएचके के खाली 43 फ्लैटों की कीमत 43 लाख से 55.93 लाख के बीच में है, जो कि बाजार में उपलब्ध फ्लैट की तुलना में ज्यादा है। इसमें रजिस्ट्री शुल्क मिला दें तो भवन की कीमत और ऊपर चली जाती है।
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एक साल में प्राधिकरण ने बेचे 179 फ्लैट
जीडीए ने पहले आओ, पहले पाओ योजना के तहत बीते एक साल में 179 फ्लैट को बेचने में सफलता हासिल की है। प्राइवेट बिल्डरों ने राजनगर एक्सटेंशन, क्रॉसिंग रिपब्लिक, एनएच-9, दिल्ली-मेरठ हाईवे, साहिबाबाद सहित अन्य क्षेत्रों में 30 हजार से अधिक फ्लैट बेचे हैं। मधुबन बापूधाम और कोयल एंक्लेव के बाद प्राधिकरण की कोई बहुमंजिला योजना भी नहीं आई है।
समय और गुणवत्ता पर उतरते हैं खरे
क्रेडाई के अध्यक्ष विपुल गिरि का कहना है कि निजी विकासकर्ता ग्राहकों की उम्मीदों पर खरा उतरते हैं और समय से फ्लैट उपलब्ध करा देते हैं, इसलिए ग्राहक निजी विकासकर्ताओं को अधिक महत्व दे रहे हैं।
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नक्शे के विपरीत करते हैं निर्माण
जीडीए के संपत्ति अधिकारी व अपर सचिव सीपी त्रिपाठी का कहना है कि कई बिल्डर नक्शा चार तल का पास कराते हैं और उस पर निर्माण आठ से 12 तल कर लेते हैं, इस कारण से उनकी लागत कम हो जाती है। अब सख्त निगरानी की जा रही है और बिना स्वीकृत नक्शे के निर्माण कार्य नहीं होने दिया जाएगा।
जीडीए के फ्लैट बिकने में परेशानी
एक बार दाम तय होने के बाद भी लागत बढ़ाने के नाम पर जीडीए मूल्य बढ़ा देता है।
समय पर ग्राहकों को फ्लैट मिल नहीं पाते हैं।
कई चार्ज ऐसे होते हैं जो रजिस्ट्री कराने के बाद भी भुगतान करना पड़ता है।
फ्लैट को लेकर किसी तरह की परेशानी आने पर सीधे संबंधित अधिकारी से हर कोई संपर्क नहीं कर पाता है।
निजी विकासकर्ताओं के बिकते हैं फ्लैट
एक बार दाम तय होने पर उसी दर पर ग्राहक रजिस्ट्री कराता है।
काम की गुणवत्ता और चमक जीडीए से अधिक होती है।
खरीददार सीधे संपर्क कर लेता है।
समय पर फ्लैट मिल जाता है।
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