प्रदूषण का स्तर बढ़ा, पराली जलाने पर लगेगा 15 हजार जुर्माना
गाजियाबाद। प्रदूषण का ग्राफ बढ़ने लगा है और धान की फसल का कटान जल्द ही शुरू हो जाएगा। ऐसी स्थिति में डीएम ने किसानों से पराली न जलाने के लिए कहा है। पराली जलाने पर रोक के लिए हर तहसील क्षेत्र में निगरानी की जाएगी। डीएम ने कहा कि पराली जलाई तो किसानों पर 2.5 हजार से लेकर 15 हजार रुपये तक जुर्माना वसूला जाएगा।
डीएम राकेश कुमार सिंह का कहना है कि गाजियाबाद समेत एनसीआर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति ने पराली या अन्य फसलों के अवशेष जलाए तो एनजीटी के निर्देेश पर उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। दो एकड़ से कम जमीन वाले किसान पर 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये और पांच एकड़ से ज्यादा जमीन वाले किसान पर 15 हजार का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए तहसील स्तर पर अधिकारियों को निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
डी-कंपोजर का इस्तेमाल करें
डीएम ने एक्यूआई को देखते हुए किसानों से पर्यावरण को शुद्ध रखने में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि खेत में फसलों के अवशेष जलाने पर प्रदूषण के साथ-साथ मृदा के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष का खेतों में प्रबंधन करने के लिए मल्चर, बेलर, सुपर सीडर, श्रब मास्टर यंत्रों का इस्तेमाल कर खेतों में ही मिला दें। इसके अलावा वेस्ट डी कंपोजर का प्रयोग कर फसल अवशेष को खाद में परिवर्तित सकते हैं। इससे जीवांश भी बढ़ेंगे।
वीडियो भेजें, होगी कार्रवाई
खुले में कूड़ा फेंकने और जलाने वालों की तस्वीर और वीडियो नगर निगम को भेज सकते हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथलेश ने बताया कि जीएनएन एप और समीर एप के माध्यम से लोकेशन और फोटो भेजने पर कूड़ा फेंकने और जलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। पांच सौ से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।
ग्रैप का पहला चरण लागू, रोकथाम सिर्फ कागजों में
गाजियाबाद। ग्रैप लागू होने के दो दिन बाद भी प्रदूषण रोकने के इंतजाम सिर्फ कागजों में हैं। एक्यूआई 200 से 300 के बीच पहुंचने पर पहला चरण लागू हो गया है। इसमें रोजाना कचरे और मलबे का उठान होना जरूरी है। निर्माण स्थलों पर एंटी स्मॉग गन स्थापित कर निर्माण सामग्री को ढंककर रखना भी अनिवार्य है, लेकिन इनमें से एक भी नियम का पालन नहीं हो रहा है।
रविवार को गोविंदपुरम, सदरपुर रोड, कलक्ट्रेट के सामने कविनगर की सर्विस रोड, नेहरू नगर समेत जगह-जगह कचरा सड़कों के किनारे पड़ा रहा। निर्माण स्थलों पर रेत, डस्ट, सीमेंट बिना ढंके ही रखा गया था। नगर निगम की ओर से सड़कों पर पानी का छिड़काव भी नहीं कराया गया। यह हाल तब है जब बीते साल ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिले 60 करोड़ रुपये से निगम ने एंटी स्मॉग गन, वाटर स्प्रिंकलर समेत अन्य उपकरण खरीदे थे।
टूटी सड़कों पर नहीं कराया पैचवर्क
नगर निगम, जीडीए और पीडब्ल्यूडी को ग्रैप लागू होने से पहले 30 सितंबर तक टूटी सड़कों पर पैचवर्क का काम पूरा कराना था। डीएम राकेश कुमार सिंह ने करीब 20 दिन पहले बैठक लेकर सभी विभागों को निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए।
नगर निगम के संसाधनों से पानी का छिड़काव कराया जाएगा। सभी जोन में इन मशीनों को लगाया जाएगा। नगर स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं कि डलावघरों से रोजाना कूड़ा उठवाना सुनिश्चित करें। सभी एजेंसियों को निर्माण सामग्री ढंककर रखने के भी निर्देश दिए गए हैं। निगरानी के लिए सभी जोन में टीम बना दी गई हैं। - डॉ. नितिन गौड़, नगरायुक्त
एक्यूआई 200 से 300 के बीच होने पर अनिवार्य
- 500 मीटर या इससे बड़े प्लाट पर निर्माण और विध्वंस (सीएंडडी) वेस्ट गतिविधियों पर रोक रहेगी।
- सॉलिड वेस्ट और निर्माण कचरे को रोजाना उठाना सुनिश्चित किया जाएगा।
- समय-समय पर मशीनों से सफाई और पानी का छिड़काव किया जाएगा।
- बिल्डिंग मैटेरियल को ढककर रखना अनिवार्य होगा।
- सभी निर्माण स्थल पर एंटी स्मॉग गन का इस्तेमाल किया जाएगा।
- कूड़ा जलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
- ट्रैफिक जाम होने पर यातायात को सुगम बनाया जाएगा।
- वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रमाण पत्र चेक किए जाएंगे।
- ईंट भट्ठों पर प्रदूषण नियंत्रण के मानक लागू किए जाएंगे।
- अवैध फैक्टरियों पर कार्रवाई कर बंद कराया जाएगा।
- डीजल जनरेटर को दिनभर चलाने की अनुमति नहीं होगी।