एसी कोच में चोरी, स्टेशन मास्टर और रेलवे महाप्रबंधक पर 83 हजार का अर्थदंड
गाजियाबाद। कामाख्या एक्सप्रेस में जोधपुर से बरेली जाते समय एसी कोच में सामान चोरी होने पर उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने उत्तर रेलवे जोन के महाप्रबंधक, गाजियाबाद रेलवे स्टेशन मास्टर और ट्रेन के टीटीई पर 78392 रुपये का अर्थदंड लगाया है। आयोग के अध्यक्ष प्रवीण कुमार जैन ने यह भी आदेश दिया है कि पीड़ित को परिवाद खर्च के रूप में पांच हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएं। आयोग ने यह भी कहा है कि निर्णय के 60 दिन के अंदर अगर भुगतान नहीं किया गया तो परिवादी छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी पाने का अधिकारी होगा।
बरेली के वाटिका सनसिटी निवासी सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी आठ अगस्त 2017 को कामाख्या एक्सप्रेस में अपने परिवार के साथ जोधपुर से बरेली जा रहे थे। उन्होंने एसी कोच में सात व नौ नंबर सीट का रिजर्वेशन कराया था। गाजियाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने पर उनकी पत्नी नीति त्रिपाठी ने पर्स देखा तो वह चोरी हो गया था। पर्स में 32990 रुपये की कीमत वाले तीन मोबाइल फोन, नौ हजार रुपये के कान के सोने के दो टॉप्स, 30 हजार रुपये कीमत के 10 ग्राम सोने की चेन, 13 हजार रुपये नकद, बैंक के एटीएम कार्ड, पैन कार्ड सहित अन्य सामान थे। इस मामले में उन्होंने बरेली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना गाजियाबाद में पता चली थी, इसलिए यहीं पर प्रतितोष आयोग में परिवाद दर्ज कराया था।
इस मामले में रेलवे ने अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि परिवादी ने अपने कथन के समर्थन में कोई साक्ष्य दाखिल नहीं किया है, जिससे उसकी बात सही सिद्ध हो। धारा100 इंडियन रेलवे एक्ट1989 के तहत रेलवे में सामान बुक नहीं है, उसके लिये जिम्मेदार नहीं है। परिवादी के अनुसार उसे घटना के स्थान की जानकारी नहीं है। गाजियाबाद के पास उसे सामान गुम होने की जानकारी हुई। रिपोर्ट बरेली में दर्ज कराई गई है इसलिए यह परिवाद गाजियाबाद परिक्षेत्र में नहीं आता है। वहीं आयोग ने माना कि सुरक्षा व्यवस्था सही नहीं होने से एसी-2 टायर ट्रेन के कोच से सामान चोरी हुआ है। यह रेलवे के प्रति सेवा में कमी प्रकट करता है।