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सजा मां का दरबार... आज से नौ दिन शक्ति की भक्ति

सार

दिल्ली गेट प्राचीन देवी मंदिर, डासना देवी मंदिर, श्री मनन धाम मंदिर, घंटाघर स्थित गुफा वाला मंदिर सहित सभी मंदिरों में रविवार की सुबह कलश स्थापना होगी। हे मां दुर्गा... आपके श्री चरणों में नस्कार है।सेहत का रखें ध्यानक्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक राणा ने बताया कि शारीरिक शुद्धि के लिए आयुर्वेद में प्रत्येक छह महीने या दो प्रमुख मौसम गर्मी और सर्दी के बाद पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। जिला एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि व्रत के दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी और गर्भवती महिलाओं को आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।मधुमेह के मरीज : लंबे समय तक भूखें न रहें, थोड़े-थोड़े समय पर कुछ खाते रहें जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहे।उच्च रक्तचाप के मरीज : चाय, कॉफी का अत्यधिक सेवन न करें, दवाओं को लेने से परहेज न करें।हृदय रोगी : व्रत करें लेकिन तला-भुना खाने से परहेज करें, फलों का और तरल पदार्थ का सेवन करें।गर्भवती महिलाएं : खाली पेट रहना नुकसानदायक होता है।
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विस्तार
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सजा मां का दरबार... आज से नौ दिन शक्ति की भक्ति
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गाजियाबाद। घर-घर मैया का दरबार सज गया है। सोमवार से नौ दिन तक शक्ति की भक्ति होगी। पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना की जाएगी। व्रत और पूजा के लिए रविवार को दिन भर तैयारी चलती रही। मैया हाथी पर सवार होकर आएंगी। नवरात्र के बाद नौका से वापस जाएंगी। इस बार नवरात्र नौ दिन के होंगे। एक भी तिथि का क्षय नहीं है। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। सुबह 7:30 बजे से 9:00 बजे तक राहु काल रहेगा। इसके बाद नौ बजकर एक मिनट से कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त हैं।
पंडित शिव कुमार शर्मा ने बताया कि तीन अक्तूबर को अष्टमी पूजा होगी और चार अक्तूबर को महानवमी होगी। पांच अक्तूबर को दशहरा मनाया जाएगा। दिल्ली गेट प्राचीन देवी मंदिर, डासना देवी मंदिर, श्री मनन धाम मंदिर, घंटाघर स्थित गुफा वाला मंदिर सहित सभी मंदिरों में रविवार की सुबह कलश स्थापना होगी। दिल्ली गेट प्राचीन देवी मंदिर के पुजारी आचार्य राम मनोहर अग्निहोत्री ने बताया कि मंदिर में सुबह 6:00 बजे से कलश स्थापना होगी। उसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा।
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कलश स्थापना का शुभ-मुहूर्त
सुबह 9:01 बजे से 10:08 बजे तक (तुला लग्न स्वामी शुक्र लक्ष्मीकारण ग्रह)
सुबह 10:08 से 12:25 तक वृश्चिक लग्न (स्थिर लग्न और अभिजीत मुहूर्त भी)
सुबह 6:14 बजे से 7:30 बजे तक (अमृत का चौघड़िया)
सुबह 9:14 बजे से 10:04 बजे तक (शुभ का चौघड़िया)
ऐसे करें मां की आराधना
सर्वप्रथम चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं, गंगाजल छिड़ककर शुद्ध करें।
इसके बाद चौकी पर मां की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
मां को पोशाक धारण कराएं, आभूषण पहनाएं। इसके बाद माला पहनाएं।
घट की स्थापना करें, फिर दीप प्रज्ज्वलित करें।
शुद्ध मिट्टी में जौ बोएं, श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करके धूप-दीप से आरती करें।
आम की लकड़ी पर शुद्ध घी, लौंग, गुग्गल, सामग्री डालकर हवन करें ।
(जैसा पंडित शिव कुमार शर्मा ने बताया)
वस्त्रों के रंग का भी है महत्व
आचार्य राम मनोहर अग्निहोत्री ने बताया कि मां शैलपुत्री की पूजा पीले, मां ब्रह्माचारिणी की हरे, चंद्रघंटा की स्लेटी, कूष्मांडा की नारंगी, स्कंदमाता की सफेद, कात्यायिनी की लाल, कालरात्रि की नीले, महागौरी की गुलाबी और सिद्धिदात्री की बैंगनी रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
इनसेट
प्रतिपदा 26 सितंबर मां शैलपुत्री
द्वितीय 27 सितंबर मां ब्रह्मचारिणी
तृतीय 28 सिंतबर मां चंद्रघंटा
चतुर्थी 29 सितंबर मां कूष्मांडा
पंचमी 30 सितंबर मां स्कंदमाता
षष्ठी 01 अक्तूबर मां कात्यायनी
सप्तमी 02 अक्तूबर मां कालरात्रि
अष्टमी 03 अक्तूबर मां महागौरी
नवमी 04 अक्तूबर मां सिद्धिदात्री
विजयादशमी 05 अक्तूबर (नवरात्र समापन )
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।
भावार्थ - नारायणी तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हो, कल्याणदायिनी शिवा हो, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हो। हे मां दुर्गा... आपके श्री चरणों में नस्कार है।
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सेहत का रखें ध्यान
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. अशोक राणा ने बताया कि शारीरिक शुद्धि के लिए आयुर्वेद में प्रत्येक छह महीने या दो प्रमुख मौसम गर्मी और सर्दी के बाद पंचकर्म कराने की सलाह दी जाती है। इसके लिए चैत्र (मार्च-अप्रैल)और अश्विन (सितंबर-अक्तूबर) का महीना बेहतर माना जाता है। इसलिए शारीरिक शुद्धि का एक आसान स्वरूप हमें नवरात्र में मिल जाता है। जिला एमएमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आरपी सिंह का कहना है कि व्रत के दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगी और गर्भवती महिलाओं को आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
मधुमेह के मरीज : लंबे समय तक भूखें न रहें, थोड़े-थोड़े समय पर कुछ खाते रहें जिससे ब्लड शुगर लेवल नियंत्रण में रहे।
उच्च रक्तचाप के मरीज : चाय, कॉफी का अत्यधिक सेवन न करें, दवाओं को लेने से परहेज न करें।
हृदय रोगी : व्रत करें लेकिन तला-भुना खाने से परहेज करें, फलों का और तरल पदार्थ का सेवन करें।
गर्भवती महिलाएं : खाली पेट रहना नुकसानदायक होता है। व्रत रखें लेकिन समय-समय पर फल-दूध और हल्के आहार का सेवन करती रहें।
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