लॉकडाउन में पाल लिए कुत्ते, अब छोड़ रहे
गाजियाबाद। दो साल पहले लॉकडाउन के दौरान लोगों का ऑफिस जाना छूटा तो उन्होंने अपने शौक को पूरा किया। तनाव को दूर करने के लिए लोगों ने कुत्ते पाल लिए, अब कामकाज फिर पहले की तरह सामान्य हो गया तो कुत्तों को घुमाने और देखभाल के लिए लोगों के पास समय नहीं है। इसी का असर है कि घरों में पाले गए इन कुत्तों को लोग छोड़ने लगे हैं। लोग कुत्तों को वापस लौटाने पैट शॉप संचालकों के पास पहुंच रहे हैं।
लॉकडाउन के दौरान घर में बंद रहने से लोगों में तनाव बढ़ने लगा था। खुद को व्यस्त रखने के लिए लोगों में न केवल बागवानी और कुकिंग का शौक बढ़ा, बल्कि कुत्तों को रखने का ट्रेंड भी बढ़ा था। पैट शॉप संचालक नितिन शर्मा ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से कुत्तों की बिक्री तेजी से बढ़ी थी। न केवल बड़े मकान वालों ने बल्कि फ्लैटों में रहने वाले लोगों ने भी अलग-अलग ब्रीड के कुत्ते खरीदे। नितिन का कहना है कि पालतू पशु घर के सदस्य के जैसे हो जाते हैं और उनका उछलकूद करना लोगों को अच्छा लगता है। यह तनाव को भी कम करता है।
नोएडा, गाजियाबाद और गुड़गांव में कुत्तों का कारोबार और एनजीओ संचालित करने वाले प्रियम तिवारी बताते हैं कि लॉकडाउन में पाले गए कुत्ते अब दो-ढाई साल के हो गए हैं। ऐसे में उन्हें घुमाने और देखभाल के लिए समय भी ज्यादा चाहिए। कोरोना संक्रमण के मुश्किल दौर से बाहर निकलने के बाद अब सभी दफ्तर, इंडस्ट्रीज में कामकाज सामान्य हो जाने से लोग अपने कारोबार में व्यस्त हो गए हैं। कुत्तों को टहलाने और उनकी देखभाल के लिए अब लोगों के पास फिर से समय की कमी हो गई है। इसकी वजह से लोग कुत्तों को छोड़ रहे हैं।
रात के वक्त छोड़ जाते हैं कुत्ते
पैट शॉप चलाने वाले दिनेश कुमार ने बताया कि खासतौर से फ्लैटों में रहने वाले लोगों में अब कुत्ते पालने के प्रति उदासीनता बढ़ी है। फ्लैटों में जगह की कमी होने की वजह से कुत्तों को घूमने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। इसकी वजह से उनका स्वभाव भी चिड़चिड़ा हो रहा है। बीते दिनों में कुत्तों के हमला करने की घटनाएं बढ़ने की वजह से अब लोगों को यह डर सताने लगा है कि छोटे से फ्लैट में रहकर उनका कुत्ता भी चिड़चिड़ा होकर हमला न कर दें। इसकी वजह से रात के वक्त लोग कुत्तों को दूर-दराज के इलाकों में छोड़ रहे हैं।
पूरे एनसीआर में घटा रुझान
कुत्तों का कैनाल और एनजीओ संचालित करने वाले प्रियम का कहना है कि कुत्तों को वापस लौटाने का यह सिलसिला पूरे एनसीआर में बढ़ा है। गुड़गांव में स्थित उनके एनजीओ के गेट पर लोग रात को अपने कुत्ते बांधकर चले जाते हैं। सुबह उनका स्टाफ उन कुत्तों को लाकर खाना-पानी देते हैं। यही नहीं पास में स्थित गांव के लोग भी उन्हें आकर सूचना देते हैं कि गांव में कोई पालतू कुत्ते को छोड़कर चला गया है। ऐसे कुत्तों को वह पशु प्रेमी लोगों को अडॉप्ट कराते हैं।