फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हमले की घटनाएं बढ़ने से घटी गुस्सैल कुत्तों की बिक्री, छोड़ने लगे लोग

सार

हमले की घटनाएं बढ़ने से घटी गुस्सैल कुत्तों की बिक्री, छोड़ने लगे लोग गाजियाबाद।राजनगर एक्सटेंशन में पैट शॉप चलाने वाले अक्षय ने बताया कि कुत्तों के हमलों की घटनाओं से लोगों में डर पैदा हो गया है।इसकी वजह से उन्होंने रॉट विलर और पिटबुल प्रजाति के पिल्लों को बेचना छोड़ दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हमले की घटनाएं बढ़ने से घटी गुस्सैल कुत्तों की बिक्री, छोड़ने लगे लोग
विज्ञापन

गाजियाबाद। इंसानों पर हुए हमलों की कई घटनाओं के बाद अब गुस्सैल कुत्तों को चाहने वालों की संख्या घटी है। इसी का असर है कि बीते 15 दिनों में रॉट विलर, पिटबुल और मेस्टिफ प्रजाति के कुत्तों की बिक्री कम हुई है। रौद्र रूप देखकर और इसके बाद हुई पुलिसिया कार्रवाई के चलते पिटबुल को पाल रहे अधिकांश लोग भी अब उन्हें घर में रखना नहीं चाहते। कविनगर में एक दंपती ने पिटबुल को अडॉप्शन के लिए एक दुकानदार को दे दिया।
सितंबर महीने में राजनगर एक्सटेंशन, संजय नगर, कीर्तन वाली गली और नोएडा की कई सोसायटियों में खतरनाक प्रजाति के कुत्तों के हमला करने की घटनाएं सामने आई हैं। राजनगर एक्सटेंशन में लिफ्ट में बच्चे पर हमला करने और संजयनगर में पार्क में खेल रहे बच्चे पर हमले की घटना में पुलिस ने दोनों कुत्तों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। नगर निगम ने दोनों पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। इसके बाद से इन खतरनाक प्रजाति के कुत्तों के प्रति लोगों में दहशत बनने लगी है। शहर में इन प्रजातियों के कुत्तों की मांग तेजी से घटी है।
विज्ञापन

राजनगर एक्सटेंशन में पैट शॉप चलाने वाले अक्षय ने बताया कि कुत्तों के हमलों की घटनाओं से लोगों में डर पैदा हो गया है। मेरे एक परिचित ने अपने दो साल के पिटबुल को अडॉप्शन के लिए दे दिया है। उनका कहना है कि ऐसे हादसों की वजह कुत्तों से ज्यादा उनके पालने वाले दोषी है। उन्हें कुत्तों को पालना नहीं आता। छपरौला में डॉग शॉप चलाने वाले अंकित नागर का कहना है कि कुत्तों के काटने की घटनाएं पहले भी हो चुकी है। इसकी वजह से उन्होंने रॉट विलर और पिटबुल प्रजाति के पिल्लों को बेचना छोड़ दिया है। उनका कहना है कि कुत्ते अगर हमला कर देते हैं तो लोग दुकानदार को दोषी मानते हैं, जबकि उन्हें खुद को कुत्तों को पालने का सही तरीका नहीं पता है। नोएडा, गुड़गांव में पैट शॉप और एनजीओ संचालित करने वाले प्रियम तिवारी का कहना है कि इन घटनाओं के बाद कई लोग अपने कुत्तों को एनजीओ के बाहर बांधकर या कॉलोनियों में छोड़कर जाने लगे हैं, लेकिन जिन्हें कुत्तों को रखने की समझ हैं, उन्हें फर्क नहीं पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने सिर्फ स्टाइल दिखाने के लिए कुत्ते पाले हैं, वहीं छोड़ रहे हैं और ऐसे ही लोग अब इनसे डर रहे हैं।
विज्ञापन

कुत्तों के एनर्जी लेवल को पहचाने
पैट शॉप चलाने वाले प्रियम तिवारी का कहना है कि हर प्रजाति के कुत्ते का एनर्जी लेवल अलग है। इन्हें पालने वाले लोगों को इनका एनर्जी लेवल पहचानना होगा और उसी के अनुरूप उन्हें ढालना होगा। पिटबुल, रॉटविलर जैसी ज्यादा एनर्जी वाली प्रजाति के कुत्तों को रोजाना कम से कम आठ से 10 किलोमीटर टहलाना जरूरी है, वरना उसकी एनर्जी बर्न नहीं होगी। ऐसे कुत्तों को यह भी सिखाना जरूरी है कि बाहरी व्यक्तियों या कुत्तों से व्यवहार कैसा करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें