एक दशक में बढ़ गई आक्रामक नस्लों के कुत्तों की बिक्री
गाजियाबाद। पहले तक लोग घरों में पालने के लिए छोटी और शांत नस्लों के कुत्तों को ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन एक दशक में इसमें बड़ा बदलाव आया है। बड़ी गाड़ियों के साथ-साथ कुत्ते भी लोगों को बड़ी नस्लों के पसंद आने लगे हैं। लोगों में आक्रामक नस्लों के कुत्तों को पालने का शौक बढ़ा है। यही वजह है कि एक दशक में बड़े और आक्रामक कुत्तों की नस्लों की बिक्री तीन से चार गुना तक बढ़ गई है।
पिटबुल, पाकिस्तानी बुली, रोट विलर, बुल मैस्टिफ, ग्रेटडेन जैसी खतरनाक और आक्रामक प्रजाति के कुत्ते लोगों को ज्यादा पसंद आ रहे हैं। डॉग क्लीनिक चलाने वाले डॉक्टर डीपी सिंह का कहना है कि इन प्रजातियों के कुत्ते अच्छे गार्ड तो होते हैं, लेकिन इन्हें हैंडल करना चुनौती भरा काम है। ऐसी नस्लों के कुत्ते ज्यादातर बड़े घरों या फार्म हाउस में पालना ठीक रहता है, जहां अपरिचित लोगों का आना जाना कम होता है। लोग इन्हें फ्लैटों में भी पालने लगे हैं। इसी का असर है कि इनके हमला करने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि हरियाणा, पंजाब में ऐसे कुत्तों को ज्यादा पाला जा रहा है। गाजियाबाद और आसपास के ज्यादातर लोग भी इन्हें वहां से खरीदकर ला रहे हैं।
सावधानी बरतें तो रुक सकती हैं घटनाएं
डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि कुत्तों को हैंडल करने में सावधानी बरतें तो ऐसी घटनाएं रुक सकती हैं। कुत्ते को जब भी घर से बाहर घुमाने ले जाएं, उसके मुंह पर जाली लगा लें। आक्रामक और बड़ी नस्लों के कुत्तों को घुमाने के लिए बच्चों या बुजुर्गों के हाथों में न दें। ऐसे व्यक्ति उन्हें बाहर ले जाएं जो नियंत्रित कर सके।
कई देशों में पिटबुल के पालने पर लग चुका प्रतिबंध
ताकतवर जबड़ों वाला पिटबुल प्रजाति का कुत्ता बेहद गुस्सैल होता है। गुस्सा आने पर मालिक भी उसे काबू नहीं कर पाता। इसी वजह से जर्मनी, डेनमार्क, स्पेन, आयरलैंड, रोमानिया, कनाडा, इटली और फ्रांस समेत दुनिया के कई देश इस प्रजाति के पालने पर प्रतिबंध लगा चुके हैं। अब यूपी में भी इस प्रजाति को पालने पर प्रतिबंध की मांग उठ रही है।