बिना प्रशिक्षण पाले जा रहे खतरनाक नस्ल के कुत्ते कर रहे हमले
गाजियाबाद। विदेशी नस्लों के कुत्तों को पालने का चलन गाजियाबाद में भी बढ़ा है। लोग पिटबुल, रॉट विलर, डॉबर मैन, साइबेरियन हस्की जैसी नस्ल के कुत्तों के व्यवहार को लोग नहीं समझ पाए हैं। पशु चिकित्सकों और कुत्ता प्रशिक्षकों का कहना है कि ऐसी नस्लों के कुत्तों को घर में पालने के लिए प्रशिक्षित कराना चाहिए। कुत्तों के हमलों की घटनाओं को रोकने के लिए मालिकों को कुत्तों का व्यवहार समझना भी जरूरी है। नगर निगम ने भी एडवाइजरी जारी कर रहा है कि खतरनाक नस्ल के कुत्ते प्रशिक्षण दिलाने के बाद ही पाले जाएं।
पालतू कुत्तों के हमलों की घटनाएं लगातार हो रही हैं। लखनऊ, मेरठ के बाद गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन में महिला के साथ लिफ्ट में जा रहे बीगल प्रजाति के पालतू कुत्ते के बच्चे पर हमला करने की घटना सामने आई है। इसके अगले दिन बजरिया में रॉट विलर प्रजाति के कुत्ते ने एक बच्चे पर हमला कर दिया। नोएडा में भी लिफ्ट में जर्मन शेफर्ड प्रजाति के कुत्ते के युवक पर हमला करने का मामला सामने आया है। लोनी में पिटबुल ने बच्चे पर हमला किया था।
डॉग क्लीनिक चलाने वाले पशु चिकित्सक डॉ. पीपी सिंह का कहना है कि पहले भारत में कुत्तों की विदेशी प्रजाति के नाम पर जर्मन शेफर्ड, लेब्राडोर, डॉबर मैन और चंद प्रजातियां थीं। अब अन्य विदेशी नस्लों के खतरनाक कुत्तों के पालने का ट्रेंड बढ़ा है। लेब्राडोर और जर्मन शेफर्ड आज्ञाकारी नस्लों के कुत्ते हैं और यह कम खतरनाक हैं। रॉटवेलर, पिटबुल, ग्रेटडेन, साइबेरियन हस्की समेत कई ऐसी प्रजाति के कुत्ते भी पाले जा रहे हैं जो ज्यादा आक्रामक हैं। यह अपने हैंडलर के अलावा घर के अन्य सदस्यों पर भी हमला करने से परहेज नहीं करते। बाहरी लोगों को देखकर यह आक्रामक हो जाते हैं।
प्रशिक्षण से व्यवहार में आता है बदलाव
कुत्ता प्रशिक्षक विपिन सिंह का कहना है कि प्रशिक्षण केवल इंसान ही नहीं, बल्कि जानवरों के व्यवहार में भी परिवर्तन ला देता है। उनका कहना है कि जिस तरह से इंसानों में शिक्षा से सभ्यता बढ़ती है, उसी तरह जानवरों में प्रशिक्षण से संयम और नियंत्रण बढ़ता है। प्रशिक्षित कुत्तों में यह समझ पैदा हो जाती है कि उन्हें कब और किससे खतरा है। खतरा पैदा होने पर ही वह किसी पर हमला करते हैं, या हैंडलर के आदेश पर वह किसी पर हमला करते हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कुत्ता अगर किसी पर हमला करता है तो हैंडलर के डांटने पर वह रुक भी जाता है लेकिन प्रशिक्षण के बिना कुत्ता मालिक के आदेश को भी नहीं मानता। खतरनाक प्रजाति के कुत्तों को ट्रेंड करा लेना बेहतर होता है।
नसबंदी से भी आक्रामकता हो जाती है कम
डॉ. पीपी सिंह का कहना है कि जो लोग ब्रीडिंग के लिए कुत्तों को नहीं पालते, उन्हें एक समय पर उनकी नसबंदी करा देनी चाहिए। इससे कुत्तों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव नहीं होता। इस हार्मोन के स्राव होने पर उनमें आक्रामकता बढ़ जाती है।
नगर निगम अधिकारियों की अपील
- पालतू कुत्ते का नगर निगम में पंजीकरण जरूर कराएं।
- समय पर कुत्तों का टीकाकरण कराएं।
- हिंसक कुत्तों को ट्रेनिंग दिलाएं।
- कुत्तों को बाहर घुमाते समय उनके मुंह पर मजल (प्लास्टिक की प्लेटनुमा वस्तु) लगाए, ताकि वह काट न पाए।
- बाहर घुमाते समय कुत्तों को नियंत्रण में रखें और रस्सी मजबूती से पकड़ें।
ये हैं कुत्तों की आक्रामक नस्ल
पिटबुल : सबसे आक्रामक है, लखनऊ में महिला की जान ली, 41 देशों में इसके पालने पर रोक लग चुकी है।
रोटविलर : कई देशों में इस नस्ल को पालने पर भी प्रतिबंध लग चुका है।
जर्मन शेफर्ड : इस नस्ल का इस्तेमाल ज्यादातर पुलिस और बचाव दल में होता है। प्रशिक्षित कराने के बाद बेहतर।
डॉबर मैन : इस आक्रामक प्रजाति का इस्तेमाल भी मुख्यत: पुलिस करती है, कई लोगों ने इसे पाल रखा है।
चाउ-चाउ : चीन में पाई जाने वाली इस नस्ल को भारत में भी पाला जाता है। दिखने में शांत लेकिन बेहद खतरनाक होते हैं।
साइबेरियन हस्की : यह दिखने में सुंदर और भेड़िये की तरह के होते हैं, बेहद आक्रामक हैं।
बुलमैस्टीफ : यह दिखने में कुछ पिटबुल की तरह होते हैं, आक्रामकता में उससे कम होते हैं।
मालाम्यूट : यह नस्ल उत्तरी अमेरिका में मिलती है और भेड़ियों की तरह दिखती है। समझदार के साथ आक्रामक भी होते हैं।
बॉक्सर : इन्हें शिकारी कुत्ता भी कहा जाता है। सुरक्षा के लिए अच्छे लेेकिन कई बार हमला कर देते हैं।
ग्रेटडेन : बेहद आक्रामक इस नस्ल को ट्रेनिंग के बाद ही पाला जाता है। बेकाबू होने के बाद संभालना मुश्किल।
(जैसा पशु चिकित्सकों ने बताया)
एक और वीडियो वायरल
चार्म्स कैसल सोसायटी का एक और वीडियो वायरल हो रहा है। कुत्ते के काटने से जख्मी बच्चे के पिता को कुत्ता मालकिन गंवार और जाहिल कहती नजर आ रही है। बच्चे के पिता का कहना है कि वह थाने में शिकायत करेंगे। वहीं कुत्ता मालकिन ने नगर निगम दफ्तर में अधिकारियों को बताया है कि उसकी बेटी के मोबाइल नंबर पर भद्दे कमेंट पोस्ट की जा रही है। इसकी शिकायत वह थाने में करेंगी।
पांच माह में चार पर जुर्माना, 37 को नोटिस
बिना रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालने पर पांच महीने में चार लोगों पर जुर्माना लगाया गया है जबकि 37 लोगों को नोटिस भेजा जा चुका है। नोटिस के बाद भी रजिस्ट्रेशन न कराने वालों पर जुर्माना लगाया है। अन्य लोग भी अगर पंजीकरण नहीं कराते हैं तो उन पर जुर्माना लगेगा। अब तक आकाश डागर व सुमनलता, राजेंद्र नगर, संजय सिंह बृजविहार और राजनगर एक्सटेंशन की पूनम चंदोक पर जुर्माना लगा है।
इनको भेजा गया नोटिस
कंचनलता, शाहबेरी, मित्तर पाल, राहुल विहार, जैन साहब, विक्रम एंक्लेव, आरडब्ल्यूए शिप्रा सृष्टि, मोहित, वैशाली, अखिलेश वैशाली, गोविंदपुरम के राजीव गुप्ता, वैभव, अशोक कुमार, सरस्वती, सुशील पाल, अजय कुमार, सुमेघा अग्रवाल, नीलम बंसल, नलिनी सिंह, लैंडक्राफ्ट सोसायटी के ममता सब्बरवाल, सोनू पूर्व प्रधान राजनगर एक्सटेंशन, राम सिंह, क्रासिंग रिपब्लिक, सीमा प्रताप विहार, मनोज भाटिया, जीआर सिंह सूर्यनगर, अनुष्का सिंह, जयपाल, गीता सक्सेना संजय नगर, ऋषभ अग्रवाल अभयखंड, राजेंद्र नगर में सुमन आहुजा, एसपी सिंह, शिव कुमार, गौरव, कल्लुपरा, वसुंधरा के रितु, मनमोहन और हेमलता, सोनू व पूनम राजनगर एक्सटेंशन को नोटिस भेजा गया है।
जुर्माना भरने के लिए मांगी मोहलत
राजनगर एक्सटेंशन की चार्म्स कैसल सोसायटी की लिफ्ट में बच्चे पर कुत्ते के हमले के मामले में कुत्ते की मालकिन ने पांच हजार का जुर्माना लगाने के लिए नगर निगम से दस दिन की मोहलत मांगी है। साथ ही, जुर्माना कम करने के लिए कहा है। पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि दस दिन का समय दे दिया गया है।
25 लाख की आबादी पर दो निरीक्षक
नगर निगम क्षेत्र में करीब 25 लाख की आबादी पर करीब 20 हजार पालतू कुत्ते होने का अनुमान लगाया गया है। इनमें से अभी तक करीब ढाई हजार कुत्ता पालकों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पशु चिकित्सा विभाग में केवल दो निरीक्षक हैं। इनसे ही सर्वे कराया जा रहा है। जब भी कोई शिकायत मिलती है तो जांच कर रजिस्ट्रेशन चेक किया जाता है और नहीं होने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाती है।
घर बैठे कराएं रजिस्ट्रेशन
नगर निगम की ओर से घर बैठे रजिस्ट्रेशन की सुविधा भी दी गई है। कोई भी कुत्ता पालक gmc pet app प्ले स्टोर से डाउनलोड कर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।