प्राधिकरण सचिव और अपर सचिव के निरीक्षण में माना है कि उस समय जो प्रवर्तन विभाग के अभियंता तैनात थे, उनके द्वारा अवैध निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा था, लेकिन जिन नए अभियंताओं को जिम्मेदारी दी गई है, वो भी ठीक प्रकार से अपना कार्य नहीं कर पा रहे हैं।
इंदिरापुरम क्षेत्र में जीडीए द्वारा सील की गई इमारतों में अधूरे काम पूरे किए जा रहे हैं। यही नहीं बिल्डरों द्वारा पार्किंग के लिए प्रस्तावित एरिया को भी व्यवसायिक गतिविधि के तौर पर बेचा जा रहा है। एक-एक दुकान की कीमत 60 से 70 लाख रुपये बतायी जा रही है। निर्माण कार्य जारी होने पर अपर सचिव ने जवाब-तलब किया है। सील इमारतों में निर्माण कार्य होने पर कई लोगों ने जीडीए में शिकायत भी की है।
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इंदिरापुरम में जीडीए के शाखा कार्यालय से चंद कदम की दूरी पर जिन बिल्डिंग को अपर सचिव सीपी त्रिपाठी के निर्देशन में सील किया गया था, उनमें अधूरे काम पूरे किए जा रहे है। प्राधिकरण के प्रवर्तन जोन छह के प्रभारी ओएसडी सुशील चौबे द्वारा लगातार आम लोगों को सलाह दी जा रही है कि बिल्डर से फ्लैट अथवा दुकान खरीदने से पहले जीडीए से एक बार जानकारी हासिल कर लें। कई बिल्डरों द्वारा पड़ोस का भूखंड भी खरीदने के बाद दोनों को जोड़ते हुए बहुमंजिला इमारत खड़ी की जा रही है।
नोडल अधिकारी ने प्रवर्तन जोन आठ में निर्माणाधीन इमारतों को लेकर मांगा जवाब
जीडीए के अपर सचिव एवं प्रवर्तन विभाग के नोडल अधिकारी सीपी त्रिपाठी ने प्रवर्तन जोन आठ में आने वाले रेल बिहार, अंकुर विहार आदि की 20 से ज्यादा भूखंड पर लीक से हटकर निर्माण किए जाने का मामला सामने आने पर अधीनस्थ से जवाब तलब किया है। बाकायदा निर्माणाधीन बिल्डिंग से जुड़ी फोटो भी भेजी है। अपर सचिव ने कहा कि किसी भी स्थिति में अवैध निर्माण बर्दास्त नहीं किया जाएगा।