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राहत: इस साल लागू नहीं होगा सर्किल रेट पर गृहकर

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राहत: इस साल लागू नहीं होगा सर्किल रेट पर गृहकर
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गाजियाबाद। जमीनों के डीएम सर्किल रेट के आधार पर गृहकर निर्धारित करने का प्रस्ताव इस साल लागू नहीं हो पाएगा। नगर विकास विभाग ने नगर निगम के तीन में से दो प्रस्तावों (स्मार्ट पार्किंग और दुकानों का किराया बढ़ोतरी) को हरी झंडी दे दी है, लेकिन गृहकर बढ़ाए जाने का प्रस्ताव अभी सहमति नहीं मिली है। ऐसे में अब इस साल इस प्रस्ताव को सहमति भी मिल जाती है तो भी यह मौजूदा वित्तीय वर्ष में लागू नहीं हो सकेगा। यानी नगर निकाय के इस चुनावी साल में भवन मालिकों की जेब पर बोझ नहीं बढ़ेगा।
नगर निगम अधिकारियों ने लखनऊ, मेरठ की तर्ज पर कॉलोनियों में जमीनों के डीएम सर्किल रेट को आधार बनाकर गृहकर लागू करने का प्रस्ताव बोर्ड बैठक में पेश किया था। सर्किल रेट के आधार पर कॉलोनियों को ए, बी और सी श्रेणी में विभाजित किया गया था। यानी मंहगी जमीन वाली कॉलोनी में ज्यादा और सस्ती जमीन वाली कॉलोनियों में गृहकर की दरें कम की जानी थी। इस नए प्रस्ताव के लागू होने से कविनगर, राजनगर, इंदिरापुरम, वसुंधरा, वैशाली जैसी पॉश कॉलोनियों में गृहकर चार गुना तक बढ़ाए जाने की संस्तुति की गई थी। चुनावी साल में गृहकर की बढ़ोतरी के इस प्रस्ताव पर निगम कार्यकारिणी समिति ने तो चर्चा करने से ही इनकार कर दिया था, बोर्ड बैठक में पेश किया गया तो पार्षदों ने इसे खास रणनीति के तहत न तो पास किया और न ही निरस्त। निगम बोर्ड ने इसे स्थगित कर दिया था।
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इसके बाद नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने इस प्रस्ताव समेत निगम बोर्ड से निरस्त हो चुके आमदनी बढ़ाने के दो अन्य प्रस्तावों को भी नगर विकास विभाग को भेज दिया था। उन्होंने निगम बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णय से भी प्रमुख सचिव को अवगत करा दिया था। लंबे मंथन और राज्य वित्त विभाग से सलाह लेने के बाद नगर विकास विभाग से दुकानों का किराया बढ़ाने और स्मार्ट पार्किंग विकसित कराने के लिए प्राइवेट कंपनियों को ठेका देने पर सहमति मिल गई है। शासन ने सर्किल रेट के आधार पर गृहकर प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव को फिलहाल रोक लिया है। इस पर सैद्धांतिक सहमति तो मिल गई है, लेकिन आदेश जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में नगर विकास विभाग के आदेश जारी किए बिना इस प्रस्ताव को अधिकारी भी लागू नहीं कर सकेंगे।
चुनावी साल में जनप्रतिनिधि नहीं चाहते गृहकर बढ़ोतरी
इसी साल नगर निकायों के चुनाव प्रस्तावित हैं। सभी राजनीतिक दल चुनावी मोड में आ गए हैं और तैयारियां शुरू कर दी हैं। वार्डों से पार्षदों के टिकट के लिए दावेदारों ने आवेदन भी शुरू कर दिए हैं। ऐसे में सत्तारूढ़ दल के जनप्रतिनिधि नहीं चाहते कि चुनावी साल में गृहकर में बढ़ोतरी हो। इसका सीधा असर शहर के 5.5 लाख भवन मालिकों की जेब पर और साथ ही साथ वोटरों पर भी पड़ेगा। इसी वजह से बोर्ड बैठक में भी इस प्रस्ताव का जबरदस्त विरोध हुआ था।
जीआईएस सर्वे की रिपोर्ट तैयार, जोन कार्यालय में होगी चस्पा
शहर में जीआईएस (ज्योग्राफिकल इंफॉरमेशन सिस्टम) के जरिए किए गए भवनों के सर्वे की अंतिम रिपोर्ट तैयार हो गई है। पांचों जोन के प्रत्येक वार्ड में किस भवन पर कितना संपत्ति कर निर्धारित किया गया है, इसकी जानकारी रिपोर्ट में मौजूद हैं। नगर निगम के कर विभाग के अधिकारी एक सप्ताह में इस रिपोर्ट को पांचों जोन में प्रदर्शित करेंगे। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि संबंधित भवन मालिक जोनल कार्यालय में जाकर देख सकेंगे कि उनके भवन पर नया गृहकर कितना है। गृहकर निर्धारण में अगर कोई त्रुटि होगी तो वह जोनल कार्यालय में ही लिखित आपत्ति भी दर्ज करा सकेंगे। भवन मालिकों की ओर से मिलने वाली आपत्तियों का निस्तारण कराया जाएगा। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।
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सर्किल रेट के आधार पर गृहकर निर्धारण के प्रस्ताव पर शासन से सहमति मिलना बाकी है। इस पर अभी प्रक्रिया चल रही है। सहमति मिलने के बाद इसे लागू करने में कई महीने का समय लग जाएगा। इस साल प्रस्ताव लागू नहीं किया जा सकेगा। शासन से सहमति मिली तो इसे लागू करने की प्रक्रिया को पूरा कर आगामी वित्तीय वर्ष से लागू किया जा सकेगा।
- महेंद्र सिंह तंवर, नगरायुक्त
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