अमर तिरंगा शंघाई की सीमा तक लहरा देना...
गाजियाबाद। देश के अमर शहीदों और क्रांतिकारियों को समर्पित मां तुझे प्रणाम कार्यक्रम के तहत मंगलवार को लोहिया नगर हिंदी भवन सभागार में नामचीन कवियों की महफिल सजी। कवियों ने देशभक्ति तराने और रचनाएं सुनाकर श्रोताओं को देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत कर दिया। कवियों ने देश की शान और शहीदों के सम्मान में एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाईं। वीर रस के कवि विनीत चौहान की रचना ‘ओ रण बांकुरों भारत मां के सारे शूल हटा देना, अमर तिरंगा शंघाई की सीमा तक लहरा देना, सुनकर लोगों में जोश भर दिया।
मेरी कलम कथा कहती है उनके ही बलिदानों की, कैसे भर पाएंगे अम्मा की खाली गोदी रचना पढ़ी तो माहौल भाव विभोर हो गया। देशभक्ति की रचना पढ़ते पढ़ते कवि विनीत चौहान की आंखें भर आईं। मंच के सामने बैठीं महापौर आशा शर्मा भी अपने आंसुओं को नहीं रोक पाईं। मंच संभालते हुए कवि व शायर राज कौशिक ने कहीं मोहन, कहीं अब्दुल...कहीं करतार है भारत। हर इक हिंदू, हर इक मुस्लिम, हर इक सरदार है भारत... सुनाकर देश में सामाजिक समरसता और भाईचारे की तस्वीर के दर्शन कराए। शायरा मुमताज नसीम ने किस कदर साफ है आजादी की रोशन तस्वीर, जगमगाएगी क्यों नहीं भला अपनी तकदीर.., सुनाया। उन्होंने आजाद हिंदुस्तान में बदल रही तस्वीर और दुनिया में भारत की बढ़ रही ताकत का अहसास कराया। हर एक नज्म और हर एक गजल पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो रहा था।
हास्य कवि रमेश मुस्कान की रचना तुम फैशन टीवी सी लगती मैं संस्कार का चैनल हूं... सुन सभागार ठहाकों से गूंज उठा। लोग अपने आप को ठहाके लगाने से रोक नहीं पाए। रमेश की कविताओं ने लोगों को खूब गुदगुदाया।
कवि प्रियांशु गजेंद्र ने जैसे जैसे उमर बिता ली मैंने तेरे प्यार में रात रात भर तुमको गाया सुबह छपे अखबार में सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।
शायरा मुमताज नसीम ने अपनी गजलों से समां बांध दिया। लोग अपनी कुर्सियों से उठकर दाद देने लगे। मेरा दिल ही रखने को कह दे, तुझे मेरी बात कुबूल है, तेरी शेरवानी में टांक दूं मेरे हाथ में जो ये फूल है। ये जमाना कर दे हमें जुदा तो ये जमाने भर की भूल है, तेरे साथ जीना कुबूल है तेरे साथ मरना कुबूल है। नज्म पढ़कर नसीम ने खूब वाहवाही बटोरी।
कार्यक्रम में पहुंचे नगर आयुक्त महेंद्र सिंह तंवर ने भी मंच अपनी रचना आओ चलो अपने हिस्से का उजाला करते हैं, अंधेरों का क्या है लड़ाई तो चरागों को लड़नी है। तुमसे मिलके मेरी हसरतों को मुकाम मिल गया, किताब में कैद गजलों को भी काम मिल गया...सुनाई तो सभागार तालियों से गूंज उठा।
कवि सम्मेलन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई। मेयर आशा शर्मा, सिटी मजिस्ट्रेट गंभीर सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव शर्मा, समर कूल के चेयरमैन संजीव गुप्ता, भाजपा नेता पृथ्वी सिंह कसाना और सभी कवियों ने दीप प्रज्ज्वलित किया। सभागार में प्रमुख रूप से शहर विधायक अतुल गर्ग, रालोद नेता इंद्रजीत सिंह टीटू, अरुण चौधरी भुल्लन, पार्षद जाकिर सैफी, पार्षद तेजपाल राणा, राजनगर एक्सटेंशन से गजेंद्र आर्य, गिरीश सारस्वत, संजीव शर्मा, मनोज यादव, अमरजीत सिंह बिड्डी, गौरव गर्ग, गौरव बंसल, व्यापारी नेता अशोक भारती, राजदेव त्यागी, यश्वनी गोयल, आईआईए के अध्यक्ष अरुण शर्मा, अमित त्यागी समेत काफी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।