गाजियाबाद के वसुंधरा में 132केवी का विद्युत सब-स्टेशन बनाने के लिए डेढ़ साल मशक्कत हुई, लेकिन चार हेक्टेयर जमीन नहीं मिली। आवास विकास परिषद के अफसरों ने पहले पक्षी विहार के पास जमीन देने का आश्वासन दिया, लेकिन फिर इनकार कर दिया। इसके बाद यह प्रस्ताव अब फाइल में बंद हो गया। विद्युत सब-स्टेशन न बनने की वजह से अब गर्मी के सीजन में वसुंधरा, वैशाली और इंदिरापुरम क्षेत्र के लोगों को फिर बिजली कटौती से जूझना पड़ेगा।
दरअसल, हिंडनपार क्षेत्र में आबादी तेजी से बढ़ने के साथ ही बिजली की खपत भी बढ़ी है। इसकी वजह से इस क्षेत्र में बने ट्रांसमिशन विद्युत सब-स्टेशन ओवरलोड हो गए हैं। साहिबाबाद और करहेड़ा विद्युत सब-स्टेशन की दो बार क्षमता बढ़ाई जा चुकी है, अब इनमें फिर से क्षमता बढ़ाने की गुंजाइश नहीं बची है। बिजलीघरों की ओवरलोडिंग की वजह से क्षेत्र में कटौती बढ़ी है।
विद्युत निगम के अधिकारियों ने वसुंधरा में 132/33 केवी का सब-स्टेशन बनाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले प्रस्ताव बनाया था। इसके लिए आवास विकास परिषद से चार हेक्टेयर जमीन मांगी गई थी। विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि आविप के अफसरों ने जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया था।
इसके बाद फाइल आगे बढ़ाई गई, लेकिन बाद में जमीन पर कानूनी विवाद होने का हवाला देकर आविप के अधिकारियों ने जमीन देने से इनकार कर दिया। करीब डेढ़ माह पूर्व मंडलायुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी जमीन मिलने पर सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद फिलहाल यह प्रस्ताव स्थगित कर दिया गया है।
दूसरे क्षेत्र में होगी जमीन की तलाश
पक्षी विहार के पास जमीन का इंतजाम न होने की वजह से अब आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने किसी अन्य स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने का भरोसा विद्युत निगम के अधिकारियों को दिलाया है। इसके लिए वसुंधरा के ही अन्य सेक्टर में जमीन की तलाश की जाएगी। विद्युत निगम के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे स्थान पर जमीन चाहिए, जहां से विद्युत लाइन बनाना न सिर्फ आसान हो, बल्कि कम संसाधन विकसित करने की जरूरत हो।
बढ़ती आबादी के लिहाज से वसुंधरा में 132 केवी सब-स्टेशन बनाया जाना जरूरी हो गया है। आवास विकास परिषद से चार हेक्टेयर जमीन की मांग की गई थी। जमीन उपलब्ध न होने की वजह से फिलहाल प्रोजेक्ट के प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया है। जमीन का इंतजाम होने पर प्रस्ताव को दोबारा बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा।
- राधेश्याम सिंह, अधीक्षण अभियंता, ट्रांसमिशन