दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के मुआवजा घोटाले के आरोपियों का नहीं मांगा रिमांड, विवेचक निलंबित
गाजियाबाद। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए जमीन अधिग्रहण में हुए 22 करोड़ के मुआवजे घोटाले के दो मुख्य आरोपियों का पुलिस के जांच अधिकारी (विवेचक) ने रिमांड ही नहीं मांगा। महज पांच दिन में प्रशासन की ओर से इस मामले में पांच एफआईआर दर्ज करा दी गई थी, इसके बावजूद विवेचक ने अदालत में रिमांड के लिए अर्जी दाखिल नहीं की। पुलिस अधिकारी की इस लापरवाही की वजह से ही दोनों आरोपियों को जमानत मिली तो गाजियाबाद से लखनऊ तक पुलिस और प्रशासन की किरकिरी हुई। विवेचक सब-इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार को एसएसपी ने निलंबित कर दिया है।
पंजीकरण निरस्त होने के बावजूद सहकारी समिति के माध्यम से इस 22 करोड़ के मुआवजा घोटाले को अंजाम दिया गया है। 19 मई 2022 को यह घोटाला उजागर हुआ तो प्रशासन ने सिहानी गेट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद अलग-अलग खसरा नंबरों का मुआवजा लेने के लिए अलग एफआईआर दर्ज कराई। इस मामले में 12 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। मुआवजे का यह मामला लखनऊ तक पहुंचा तो एसटीएफ को जिम्मेदारी दी गई। एसटीएफ ने 21 मई को दोनों मुख्य आरोपियों गोल्डी गुप्ता और सुधाकर मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया था। जिला प्रशासन से लेकर एसटीएफ की टीम की इस पूरी मेहनत पर विवेचक अखिलेश कुमार की लापरवाही ने पानी फेर दिया। दोनों आरोपियों को जमानत मिल जाने का यह मामला लखनऊ तक पहुंच गया है।
रिमांड मिल जाती तो खुलती घोटाले की और परतें
जिला प्रशासन के अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में विवेचक ने सजगता बरतकर कोर्ट से आरोपियों का रिमांड मांगा होता तो उन्हें जमानत न मिलती। रिमांड मिलने पर पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों से मुआवजा घोटाले की और परतें खोलने में मदद मिलती।
अब पुलिस के हाथ नहीं आ रहे आरोपी
जमानत मिलने के बाद मुआवजा घोटाले के दोनों आरोपी गोल्डी गुप्ता और सुधाकर मिश्रा फरार हैं। इस मामले की जांच के लिए बनी एसआईटी अन्य मुकदमों में उनकी गिरफ्तारी का प्रयास कर रही है, लेकिन वह हाथ नहीं आ रहे हैं। एसआईटी टीम में शामिल अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपी अन्य मामलों में कोर्ट से अग्रिम जमानत लेने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन पुलिस की ओर से अब मजबूत पैरवी की जा रही है।
एसआईटी में शामिल अधिकारियों के साथ बैठक की गई है। मुआवजा घोटाले के अन्य मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। आरोपी अग्रिम जमानत न ले सके, इसके लिए भी पूरा प्रयास किया जा रहा है। एसआईटी की ओर से जांच शुरू कर दी गई है।
- ऋतु सुहास, एडीएम प्रशासन