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एक साथ तीन पीढ़ियों के हत्यारे को सजा-ए-मौत

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एक साथ तीन पीढ़ियों के हत्यारे को सजा-ए-मौत
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गाजियाबाद। नई बस्ती की अनाज मंडी में एक ही परिवार की तीन पीढ़ियों के सात लोगों की हत्या करने के दोषी राहुल वर्मा (30) को सजा-ए-मौत सुनाई गई है। 21 मई 2013 की रात नौ बजे हुए इस चर्चित हत्याकांड की नौ साल चली सुनवाई के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश निर्मल चंद्र सेमवाल ने सोमवार दोपहर दो बजकर 52 मिनट पर फैसला सुनाते हुए कहा, यह अपराध विरल से विरलतम श्रेणी का है। छुरी से गला काटकर जिन लोगों की हत्या की गई, उनमें तीन मासूम बच्चे थे। राहुल वर्मा... तुम्हें इस गुनाह के लिए मृत्युदंड दिया जाता है।
बजरिया रोड निवासी राहुल ने लूटपाट के लिए घर में घुसकर खल-चूरी कारोबारी सतीश गोयल, पत्नी मंजू गोयल, बेटे सचिन गोयल, सचिन की पत्नी रेखा गोयल, बेटा-बेटी अमन, मेघा और हनी की बर्बरता से हत्या कर दी कर थी। सतीश गोयल के गुर्दे के प्रत्यारोपण के लिए घर में 26 लाख रुपये रखे होने की जानकारी पर वह लूटपाट के लिए आया था। उसने पुलिस पूछताछ में गुनाह कुबूल करते हुए कहा था, मैं लूट करने आया था, चेहरे पर नकाब डाल रखा था, लेकिन यह हट गया। पहचान होने पर पकड़े जाने के डर से सबकी हत्या कर दी।
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पेड़ के नीचे छिपाई थी छुरी
उसे वारदात के अगले दिन 22 मई को सुबह 11: 30 बजे रेलवे स्टेशन रोड पर से गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से सतीश गोयल के घर से लूटे गए गहने और नकदी बरामद हुई। उसके बैग में मिले कपड़ों पर खून लगा मिला। उसकी निशानदेही पर धोबीघाट के पास से पेड़ के नीचे छिपाई गई वह छुरी मिली, जिससे उसने हत्याकांड किया था। उसके खिलाफ घंटाघर कोतवाली में नामजद रिपोर्ट सतीश गोयल के दामाद सचिन मित्तल ने दर्ज कराई थी। जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा और संजय त्यागी ने बताया कि उसके खिलाफ 28 गवाह और 98 सुबूत पेश किए गए। इनके आधार पर उसे 30 जुलाई को दोषी करार दे दिया गया था। सजा के लिए एक अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई थी।
चश्मदीद नहीं था.... पांच सुबूतों ने दिलाई सजा
कारोबारी सतीश गोयल के घर में सात लोग थे, सातों की हत्या कर दी गई। इस वारदात का कोई चश्मदीद नहीं था। ऐसे में हत्यारे को सजा दिलाने में सबसे अहम भूमिका उन पांच सुबूतों की रही जो पुलिस ने जुटाए। डीएनए टेस्ट से साफ हो गया कि जघन्य कांड राहुल ने ही अंजाम दिया है।
1. छुरी : जिस छुरी से राहुल वर्मा ने पूरे परिवार का गला काटा, उसे 80 रुपये में डासना गेट की दुकान से खरीदा था। दुकानदार ने गवाही दी कि राहुल ही छुरी खरीदकर ले गया था।
2. सिगरेट का टुकड़ा : मौका-ए-वारदात पर पुलिस को सिगरेट का एक टुकड़ा मिला। इसमें लगी लार का डीएनए सैंपल लिया गया। राहुल वर्मा की लार का भी डीएनए लिया। दोनों डीएनए एक ही शख्स के पाए गए।
3. पंजे का निशान : मौका ए वारदात पर खून से सने पंजे का निशान दीवार पर मिला था। इसका डीएनए सैंपल लिया गया। राहुल के डीएनए से इसका मिलान कराया गया। दोनों एक ही शख्स के थे। इससे साबित हुआ कि वह मौके पर था।
4. खून से सने कपड़े : राहुल के कपड़ों पर मिले खून के छींटे का डीएनए परीक्षण कराया गया। मृतकों के डीएनए सैंपल लिए गए। दोनों के डीएनए का प्रोफाइल समान मिला।
5. लूटे गए गहने : हत्याकांड के बाद राहुल गहने लूटकर ले गया था। इनमें सचिन की अंगूठी भी थी। गहने राहुल से बरामद हुए। सचिन की बहनों ने अंगूठी सहित सभी गहनों की पहचान की।
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राहुल का कृत्य समाज में भय व आक्रोश उत्पन्न करने वाला
कोर्ट की टिप्पणी :
56 पेज के आदेश में सजा सुनाते हुए जज निर्मल चंद्र सेमवाल ने टिप्पणी की, अभियुक्त के पक्ष में कोई हल्की परिस्थिति नहीं बनती है। सभी परिस्थितियों को देखते हुए अभियुक्त के विरुद्ध उत्तेजक परिस्थितियां काफी हैं। उसके पक्ष में हल्की परिस्थिति नगण्य है। उत्तेजक परिस्थिति का पलड़ा हल्की परिस्थिति से काफी भारी है। अभियुक्त द्वारा बर्बरतापूर्ण तरीके से एक ही परिवार के सात लोगों जिनमें मासूम बच्चे भी थे, की छुरी से गला काट कर हत्या की गई है। ऐसे कृत्य से समाज में भय तथा आक्रोश उत्पन्न होगा। लोगों को समाज में शांतिपूर्ण तरीके से जीवनयापन करना दूभर हो जाएगा। यह गुनाह विरल से विरलतम श्रेणी का है। इसके लिए मृत्युदंड दिया जाता है।
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