गाजियाबाद में संचालित करीब 2000 डेयरियों से चोक हो रही नालियों और जलभराव की समस्या से निजात पाने के लिए नगर निगम ने अभियान शुरू कर दिया है। शुक्रवार को नेहरू नगर सेकेंड एफ में संचालित एक डेयरी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
एनजीटी के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश शासन ने डेयरियों को आबादी से बाहर स्थापित कराने का आदेश दिया है। नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि जीडीए को डेयरी के लिए आबादी से बाहर जमीन दिलाने के लिए दोबारा पत्र लिखा जा रहा है।
इसके साथ अभी तक 10 डेयरी संचालकों को नोटिस भेजा जा चुका है। डेयरी हटाने नहीं हटाने पर जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी। यदि इसके बाद भी डेयरी आबादी से बाहर नहीं की गई तो पशुओं के जब्तीकरण की कार्रवाई हो सकती है।
बारिश के दिनों में गंदगी के साथ सड़कों पर होता है जलभराव
बारिश के बाद शहर की हालत डेयरियों से और खराब हो जाती है। नाली में गोबर और गंदगी से सड़क पर कीचड़ और जल जमाव होता है। अब तक दो लाख रुपये जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जा चुका है।
दो पशुओं के पालने पर नहीं कोई कार्रवाई
डा. आशीष ने बताया कि दो पशुओं को पालने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं करने का प्रावधान है। दो पशुओं से अधिक होने पर उसे डेयरी माना जाता है। अधिकतम 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
जुर्माने से पहले आने लगी सिफारिश
डेयरी संचालक पर जुर्माने की कार्रवाई को रोकने के लिए निगम के अधिकारियों के पास एक कर्मचारी का फोन आता रहा। सिफारिश के बाद भी जुर्माने की वसूली की गई। अधिकारी भी डेयरी संचालक का नाम बताने से कतराते रहे।