छात्रों में सोचने की शक्ति विकसित करें शिक्षक : प्रो. एचसी वर्मा
गाजियाबाद। विज्ञान के शिक्षकों को चाहिए कि वे छात्रों में सोचने की शक्ति को विकसित करें। वे ऐसी परिस्थिति पैदा करें जिनसे छात्र सोचने पर मजबूर हों। यह तब मुमकिन होता है जब अध्यापन के दौरान कुछ गुत्थियां उलझी छोड़ दी जाएं, छात्र दिमाग पर जोर डालें और खुद तरकीब सोचकर उन्हें सुलझाएं। एक बार उनमें सोचने की प्रवृति बन गई तो उनकी अंगुली पकड़कर नहीं चलना होगा, वे हर मुश्किल का हल खुद ढूंढ लेंगे... यही वो मंत्र है जो पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर हरीश चंद वर्मा ने शुक्रवार को आयोजित अमर उजाला विज्ञान संवाद में गाजियाबाद और नोएडा के विज्ञान के शिक्षकों को दिया।
एनएच-9 स्थित एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज के डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में प्रोफेसर वर्मा ने भौतिक विज्ञान को आसान और रुचिपूर्ण तरीके से पढ़ाने की कला बड़े ही रोचक अंदाज में सिखाई। उन्होंने कहा, बच्चों में सोचने की बड़ी शक्ति होती है। जब हर उसे हर चीज खुद समझाने लगते हैं, उसके अटकते ही रास्ता बताने लगते हैं तो इस शक्ति को विकसित करने वाली कोशिकाएं निष्क्रय हो जाती हैं।
उन्होंने कहा, हम देश को आत्मनिर्भर बनाने की बात करते हैं और बच्चों को हर चीज के लिए खुद पर निर्भर रखते हैं। उन्हें खुद ही कुछ करने दीजिए, तभी भी तो वे आत्मनिर्भर बनेंगे। शिक्षक पाठ्यक्रम पूरा कराने को ही अपनी जिम्मेदारी मान बैठे हैं। यह सही नहीं है। अगर छात्रों में सोचने की शक्ति है तो वे पाठ्यक्रम तो खुद पूरा कर लेंगे लेकिन अगर शक्ति नहीं तो क्लास में पाठ्यक्रम पूरा होने पर भी कोई फायदा नहीं। बच्चों को प्रयोगधर्मी बनाएं। वे खुद प्रयोग करके देखें, सिर्फ लैब में नहीं, घर पर भी। इससे वे कुछ नया सीखेंगे।
रटने में बुराई नहीं पर समझना भी जरूरी
प्रो. वर्मा ने शिक्षकों को क्यूट (सीयूटीई) लर्निंग का फार्मूला दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को विषय रटा दें, यानी विषय को बार-बार पढ़ाएं, उसे समझाएं, सोचने का अवसर दें और फिर उसे आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि समाज में ऐसी धारणा है कि विषय को रटने को बुरा माना जाता है लेकिन रटना गलत नहीं है। जब विद्यार्थी किसी विषय को बार-बार पढ़ लेता है तो बाद में उसे समझ भी आसानी से लेता है। रटने के बाद समझना जरूरी है। उन्होंने नर्सरी में सिखाई जाने वाली अंग्रेजी कविता ट्विंकल-ट्विंकल लिटिल स्टार.... का उदाहरण देते हुए कहा कि बचपन में सिखाई गई इस कविता को अर्थ उस वक्त बच्चे को भले न पता हो लेकिन कविता आजीवन याद रहती है। बाद में उसका अर्थ भी वह जान लेता है।
विषय पढ़ाएं तो प्रयोग करके भी दिखाएं
प्रो. वर्मा ने कहा कि भौतिक विज्ञान के शिक्षक जब क्लास में पढ़ाएं तो प्रयोग करके भी दिखाएं। इससे न केवल अध्यापन रोचक होगा बल्कि बच्चों का फोकस भी उन पर ही रहेगा। जैसे, आप लेंस के बारे में पढ़ा रहे हैं तो जेब में से निकालकर लेंस दिखा दें। होता यह है कि ब्लैक बोर्ड पर चाक से लेंस बनाकर दिखा दिया। इसमें क्या रोचक है? आपके झोले में से कुछ न कुछ ऐसी चीज निकले जो छात्रों का ध्यान खींचे। जैसे चुंबकत्व पढ़ाना है तो चुंबक दिखा दिया। रसायन, जीव विज्ञान या गणित के शिक्षकों के पास यह मौका नहीं है।
अंकों का जीवन छोटा होता है, हुनरमंद होना ज्यादा जरूरी
गाजियाबाद। कानपुर आईआईटी में लंबे समय तक भौतिक विज्ञान के एचओडी रहे प्रो. हरीश चंद्र वर्मा ने शिक्षकों से संवाद कार्यक्रम में कहा कि ‘अंकों का जीवनकाल बहुत छोटा होता है, यह बहुत थोड़े समय के लिए खुशी देते हैं। विद्यार्थियों में हुनर होना ज्यादा जरूरी है। शिक्षकों को उनमें योग्यता को विकसित करना होगा।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में अच्छे अंक लाना अच्छे भविष्य की गारंटी नहीं है। उन्होंने अपने बचपन के संस्मरण सुनाते हुए कहा कि नौंवी कक्षा तक उनके रिपोर्ट कार्ड में बहुत सारे लाल रंग के गोले बने होते थे। उनकी मां और भाई भी उनके भविष्य के लिए चिंतित रहते थे। परीक्षाएं आती थीं तो मुझे छोड़कर घर के सभी सदस्य तनाव में होते थे लेकिन एक दिन ऐसा भी आया कि उन्होंने आईआईटी में टॉप किया। उन्होंने कहा कि अच्छे अंक लाने से अगर आपको नौकरी मिल भी गई तो यह तय नहीं है कि आप उस नौकरी में तरक्की भी कर पाएंगे। तरक्की तभी मिलेगी जब आपमें हुनर होगा और आप अपने सहयोगियों से कुछ अलग करके दिखाएंगे। विद्यार्थियों में यह हुनर शिक्षक ही पैदा कर सकता है।
रोज-रोज वही दलिया, वही दाल
प्रो. वर्मा ने शिक्षकों से कहा कि क्लास में विविधता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आप चाहते हैं कि 40 मिनट विद्यार्थी आपको ध्यान से सुने। जहां पांच मिनट का ध्यान लगाना मुश्किल है, वहां 40 मिनट ध्यान लगाना संभव नहीं है। उनका ध्यान इधर-उधर होना बहुत स्वाभाविक है। उनका ध्यान खींचने के लिए आपको कुछ नए प्रयोग करने पड़ेंगे। क्लास में विविधता लानी पड़ेगी। लेक्चर लंबा नहीं होना चाहिए। उन्होंने मैथिलीशरण गुप्त की एक कविता की पंक्तियां सुनाते हुए बताया कि किसी का दिमाग कभी खाली नहीं रहता। फिर विद्यार्थियों के भरे हुए दिमाग में आप ज्ञान उड़ेल देंगे तो वह ओवरफ्लो हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान देने से पहले कुछ ऐसा करो कि उनमें रुचि पैदा हो।
अमर उजाला विज्ञान कार्यशाला सवाल-जवाब
1. सवाल: अक्तूबर तक पाठ्यक्रम और प्रयोगात्मक परीक्षाएं समय से खत्म करने के लिए क्या करें? (वरुण कुमार, अध्यापक , जीडी गोयनका)
जवाब: आप बहुत व्यस्त हैं। अगर अमिताभ बच्चन का आपके शहर में सत्र है तो आप जाना पसंद करेंगे। ऐसे ही जो चीज आपके दिल से जुड़ी हुई है तो वह जगह बना लेती है।
2. सवाल: प्रयोगात्मक कक्षाओं से जुड़ी व्यवहारिक बाधाओं से कैसे पार पाएं? (डीपी सिंह, अध्यापक सेठ मुकंदलाल इंटर कॉलेज)
जवाब: ऐसी व्यवहारिक दिक्कतों के समाधान के लिए प्रशासनिक सहयोग और अभिभावकों की सहभागिता जरूरी है। रास्ता आसान नहीं हैं, लेकिन अगर उस दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जाएंगे तो नतीजे अच्छे आएंगे।
3. सवाल: 40 मिनट की क्लास में सभी के सवालों का जवाब कैसे दें? (पूर्णिमा त्रिपाठी, अध्यापिका)
जवाब: कक्षा में बच्चे सवाल पूछते हैं तो बहुत अच्छा है। ऐसे में आप अपनी कक्षा में बहुत अच्छा पढ़ाती हैं। बच्चों का सवाल करना बहुत जरूरी है। ऐसे में क्लास में विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं को जानकर और फिर मिलकर जवाब खोजेंगे तो अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
4. सवाल: यूरोडो बुक को कम समय में कैसे पढ़ाया जाए? (कृष्ण कुमार मिश्रा, जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल )
जवाब: क्लास में सभी बच्चों को साथ लेकर चलना जरूरी है। यूरोडो बुक से सभी विद्यार्थियों का सामंजस्य बिठाना मुश्किल होगा। ऐसे में कक्षा में आसान तरीके से बच्चों को समझाने का प्रयास करें।
5. सवाल: शिक्षा नीति में बदलाव की क्या जरूरत है? (केआर रंजन, अध्यापक, रायन इंटरनेशनल स्कूल)
जवाब: हमारी सिस्टम से लड़ाई नहीं हैं। हम एजुकेशन सिस्टम का सम्मान करते हैं। साथ ही सरकार की कोई पॉलिसी बेकार नहीं है। बदलाव के लिए शिक्षकों की जिम्मेदारी बड़ी है। हमें बच्चों को शिक्षित करने के साथ उनके दिमाग की शक्ति बढ़ाने की जरूरत है।
6. सवाल: कोरोना में दो साल खराब हुए, इस अंतराल को कैसे पाटा जाए? (शिवानी, अध्यापिका, दिल्ली वर्ल्ड स्कूल)
जवाब: आप सही दिशा में कार्यरत हैं। जितने भी प्रयास आप कर रही हैं, उसे निरंतर जारी रखें। तनाव लेने की जरूरत नहीं हैं। लगातार किए गए प्रयासों के सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।
7. सवाल: आपकी किताबों से किस तरीके से पढ़ें? (वंशिका, छात्रा, प्रज्ञान पब्लिक स्कूल)
जवाब: मेरी किताबें पढ़ने से पहले आपको अपनी सोचने की क्षमता बढ़ानी होगी। कॉंसेप्ट ऑफ फिजिक्स पुस्तक आपकी सोचने की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। सारी किताबों को पढ़ने की जगह तनाव मुक्त होकर तैयारी करें।
8. सवाल: थॉट परीक्षण के बारे में बताएं? (युग सक्सेना, छात्र, एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज)
जवाब: किसी परीक्षण की थ्योरी बनाने के बाद उसकी जांच पड़ताल के लिए मंथन जरूरी है। सत्यापित नियमों के तहत परिणाम में कोई विरोधाभास तो नहीं है, इसे जांच लें तो अच्छा रहेगा। लगातार शोध करते रहें।
प्रो. वर्मा के 7 मंत्र
- अच्छा शिक्षक वह होता है जो विद्यार्थियों को विषय समझाए भी और उन्हें सोचने भी दें।
- कभी किसी का दिमाग खाली नहीं होता। विषय पढ़ाने से पहले कुछ ऐसा करें कि उनमें रुचि बने।
- शिक्षण को जीवन के साथ जोड़ें। बच्चों के गेंद से खेलने में भी विज्ञान छिपा है।
- पहले रटना, फिर उसे समझना, उस पर विचार करना और फिर आगे बढ़ने के फार्मूले से पढ़ाएं।
- विज्ञान शिक्षक कभी खाली हाथ नहीं जाता, उसके बैग में पुस्तक और प्रयोग दोनों होने चाहिए।
- बच्चों को विज्ञान की पहेलियां खुद सुलझाने दें, ताकि उनमें क्षमताएं विकसित हों।
- परीक्षा में ज्यादा अंक लाना, बेहतर भविष्य की गारंटी नहीं।
घर बैठे करें प्रयोग, वैज्ञानिक बनें
नेस्ट-2022 के तहत माध्यमिक और उच्च शिक्षा के विद्यार्थी घर बैठे प्रयोग करें और वैज्ञानिक बनें। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स की ओर से आयोजित होने जा रहे %नेशनल अन्वेषिका एक्सपेरिमेंटल स्किल टेस्ट% के लिए इन दिनों आवेदन की प्रक्रिया चल रही है। आवेदन की अंतिम तिथि 29 जुलाई है। कक्षा नौ से लेकर एमएससी तक के विद्यार्थी इसे बारे में अधिक जानकारी के लिए ईमेल आईडी (ह्यशश्चड्डठ्ठड्ढड्डद्भश्चड्डद्बञ्चद्दद्वड्डद्बद्य.ष्शद्व) या व्हाट्सएप नंबर (9506611484) पर संपर्क कर सकते हैं। विज्ञान शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए परीक्षा से संबंधित सभी प्रक्रिया नि:शुल्क है।
9वीं से एमएससी तक के विद्यार्थी हो सकेंगे शामिल
नेस्ट-2022 में कक्षा नौ से एमएससी के विद्यार्थी शामिल हो सकेंगे। प्रो. वर्मा ने बताया कि अभी तक 35 हजार स्टूडेंट इसमें आवेदन कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि इनमें से एक हजार अभ्यर्थियों को प्रारंभिक टेस्ट के लिए चयनित करेंगे। उन्हें एक राइटअप देंगे और इसके आधार पर उन्हें घर पर ही एक्सपेरिमेंट करना होगा। इसके लिए प्रतिभागियों को पांच दिन का समय दिया जाएगा और वह इसमें परिजनों की मदद भी ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि यह परीक्षा कल्पनाओं की उड़ान नापने की कोशिश है। परीक्षा 100 अंकों की होगी। 70 अंक उन एक्सपेरिमेंट के लिए होंगे जो हमने करने के लिए कहा और 30 अंक उन कार्यों के लिए जो हमने नहीं दिए और प्रतिभागी अपनी बौद्धिक क्षमताओं का इस्तेमाल करते हुए करेंगे।
यह रहे मौजूद
अमर उजाला विज्ञान कार्यशाला में विशिष्ठ अतिथि के तौर पर एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज के वाइस चेयरमैन सचिन गोयल, निदेशक संजय कुमार सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन बेसिक शिक्षा विभाग की शिक्षिका पूनम शर्मा ने किया। अमर उजाला की ओर से अतिथियों और संचालिका को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर कॉलेज के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी सुरेंद्र शर्मा, महाराजा कान्वेंट स्कूल के डायरेक्टर वरुण त्यागी और शहर के नामचीन स्कूलों के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में विज्ञान कार्यशाला के दौरान सेल्फी लेते छात्र। संवाद- फोटो : GHAZIABAD City
एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित विज्ञान कार्यशाला में अध्यापकों को पढ़ाई के टिप्स देते प्र?- फोटो : GHAZIABAD City
एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित विज्ञान कार्यशाला में प्रोफेसर एचसी वर्मा के साथ सेल्फी ले?- फोटो : GHAZIABAD City