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दसवीं में छह छात्राओं ने टॉप-तीन में बनाई जगह

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दसवीं में छह छात्राओं ने टॉप-तीन में बनाई जगह
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गाजियाबाद। सीबीएसई दसवीं के नतीजों में इस बार भी छात्राओं का दबदबा रहा। टॉप-तीन में शामिल कुल 10 विद्यार्थियों में से छह छात्राएं शामिल हैं। पहले पायदान पर डीपीएसजी की आशी के साथ इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल की त्रिशा व कनव के साथ जयपुरिया स्कूल की आरोही शामिल हैं। दसवीं में छात्राओं का उत्तीर्ण प्रतिशत छात्रों से ज्यादा रहा।
दसवीं टॉपर: आशी बी बंसल
अंक: 99.8 प्रतिशत
दसवीं टॉपर आशी की एयरोस्पेस इंजीनियर बनने की ख्वाहिश:
सीबीएसई 10वीं में जिला टॉप करने वाली डीपीएसजी मेरठ रोड की छात्रा आशी बी बंसल का सपना हवाई जहाज और रॉकेट उड़ाने का है। कल्पना चावला को अपना आदर्श मानने वाली आशी एयरोस्पेस इंजीनियर बनना चाहती हैं। आशी ने विज्ञान, सामाजिक अध्ययन, गणित के साथ संस्कृत विषय में 100 में से 100 अंक हासिल किए। केवल अंग्रेजी में एक नंबर कम आया। नेहरूनगर सेकेंड में रहने वाली आशी की मां पल्लवी बंसल प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका हैं। नानी बबीता से खास लगाव की वजह से उन्होंने अपने नाम के बीच में बी लगाया है। मां, नानी के साथ मौसी प्रियंका के मार्गदर्शन को सफलता का आधार मानती हैं। आशी ने सोशल मीडिया से किनारा करने के साथ पढ़ाई के तनाव को दूर करने के लिए बांसुरी बजाने और कविता लेखन का सहारा लिया। आशी को बैडमिंटन खेलना पसंद है।
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दसवीं टॉपर: कनव
अंक: 99.8 प्रतिशत
सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन देश सेवा करना चाहते हैं कनव :
इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल के कनव ने 99.8 प्रतिशत अंक हासिल कर जनपद में संयुक्त तौर पर प्रथम रहे। अहिंसा खंड दो में कनव अपने पिता विनोद कुमार, मां मृदुला के साथ रहते हैं। उनके पिता एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। कनव का कहना है कि वह अपने पिता से प्रेरित हैं। अच्छे सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनाना चाहते हैं, जो शिक्षा, सुरक्षा व अन्य क्षेत्रों में देश के विकास में सहयोगी साबित होंगे। उनकी इस सफलता से पूरा परिवार खुश है।
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दसवीं टॉपर: तृषा
अंक: 99.8 प्रतिशत
बॉयोटेक्नोलॉजी में करिअर बनाएंगी तृषा:
दसवीं में जनपद टॉपर तृषा का लक्ष्य आईआईटी मुंबई से बॉयोटेक्नोलॉजी में बीटेक करना है। ज्ञानखंड-तीन में रहने वाली तृषा विस्वाल पिता जीएच विस्वाल और मां ममतामई गिरि विस्वाल के साथ रहती हैं। उन्होंने इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल से 10वीं में 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। उनके पिता एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं जबकि माता होम्योपैथिक डॉक्टर हैं। तृषा ने बताया कि वह इंजीनियर बनकर देश सेवा करना चाहती हैं। इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है।
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दसवीं टॉपर: आरोही
अंक: 99.8 प्रतिशत
अब बारहवीं टॉप करना आरोही का लक्ष्य:
सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल की आरोही यादव ने 10वीं कक्षा में 500 में से 499 अंक प्राप्त कर संयुक्त तौर पर जिला टॉप किया है। आरोही ने चार विषयों में 100 में से 100 अंक जबकि सोशल साइंस में 99 अंक पाए हैं। आरोही यादव ने बताया कि उनकी माता प्रियंका यादव प्राइमरी अध्यापक व पिता सुधीर कुमार फिटजी कोचिंग दिल्ली में शिक्षक हैं। उनका छोटा भाई पार्थ 10वीं कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। आरोही ने कहा कि उन्होंने हमेशा सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी। हालांकि यूट्यूब का प्रयोग पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजन के लिए वीडियो देखना व गाने सुनने के लिए किया। आरोही को कोडिंग काफी पसंद है। वह 12वीं की पढ़ाई पीसीएम विषय से जारी रखेंगी। आरोही का कहना है कि अब वह बारहवीं में भी जिला टॉप करना चाहती हैं। इसके बाद सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनना चाहती हैं।
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बारहवीं में टॉप-पांच में कुल 16 बेटियां:
माई सिटी रिपोर्टर
गाजियाबाद। सीबीएसई 12वीं के नतीजों में भी बेटियों ने एक बार फिर लड़कों को पछाड़ दिया। टॉप-पांच में जगह बनाने वाले कुल 17 विद्यार्थियों में से 16 छात्राएं हैं। वहीं जनपद के ओवरऑल उत्तीर्ण प्रतिशत में लड़कियां लड़कों से आगे हैं।
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बारहवीं टॉपर: वंशिका गर्ग
अंक: 99.8 प्रतिशत
सफल कारोबारी बनना वंशिका का सपना:
बारहवीं में 99.8 प्रतिशत अंक हासिल कर जनपद टॉप करने वाली उत्तम स्कूल फॉर गर्ल्स की छात्रा वंशिका गर्ग का सपना एक सफल बिजनेस वुमेन बनने का है। कॉमर्स की छात्रा वंशिका ने अकाउंट, बिजनेस स्टडी, अर्थशास्त्र और अंग्रेजी में 100 में से 100, जबकि गणित में उन्हें 99 अंक मिले। नेहरू नगर थर्ड निवासी वंशिका के पिता पुनीत गर्ग व्यापारी और मां बबीता गर्ग गृहणी हैं। बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद वंशिका दिल्ली यूनिवर्सिटी से प्रबंधन कोर्स की पढ़ाई करेंगी। दसवीं में 95.8 प्रतिशत अंक आने के बावजूद संतुष्ट न होने पर उन्होंने बारहवीं में और अच्छे अंक लाने का लक्ष्य तय किया। प्रतिशत सात से आठ घंटे पढ़ाई की बदौलत जनपद में पहला स्थान प्राप्त किया। वंशिका को पेंटिंग बहुत पसंद हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया।
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