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Ghaziabad News: कमिश्नरी तो बनी संसाधन जुटाने में लगेगा समय

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कमिश्नरी तो बनी संसाधन जुटाने में लगेगा समय
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गाजियाबाद। कैबिनेट में शुक्रवार को गाजियाबाद में आयुक्त प्रणाली लागू करने की घोषणा के बाद प्रमुख सचिव प्रदेश सरकार ने शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी है। गाजियाबाद कमिश्नरेट तो बन गया है लेकिन अभी संसाधन जुटाने में समय लगेगा। हाल में विभाग के पास पुलिस अधिकारियों के लिए सीमित कार्यालय व संसाधन हैं। आयुक्त प्रणाली के अनुसार अधिकारियों की होने वाली तैनाती के बाद उनके कार्यालयों की व्यवस्था करना भी एक चुनौती होगा। क्योंकि आयुक्त प्रणाली में अधिकारियों की संख्या बढ़ जाएगी।
जिले में पुलिस विभाग के पास अभी केवल पुलिस ऑफिस और पुलिस लाइन का बड़ा परिसर है। ऐसे में कई अधिकारियों के कार्यालय बदल जाएंगे। पुलिस ऑफिस में एसएसपी के कार्यालय को कमिश्नर को दिया जा सकता है जबकि ज्वाइंट कमिश्नर का भी कार्यालय पुलिस ऑफिस में बनाया जाएगा। इनके अलावा अपर पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त के पद पर तैनात होने वाले अधिकारी के कार्यालय तय करने में समय लग सकता है। ऐसे में चर्चा है कि अन्य विभागों से समन्वय बनाकर उनकी खाली पड़ी बिल्डिंग में इन अधिकारियों के कार्यालय खोले जा सकते हैं या बिल्डिंग किराये पर ली जाएगी।
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अधिकारियों की सूची का इंतजार
प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव ने आयुक्त प्रणाली 26 नवंबर से लागू होने की अधिसूचना जारी कर दी है लेकिन अभी अधिकारियों की सूची सामने नहीं आई है। लोगों को इंतजार है कि गाजियाबाद कमिश्नरेट का पहला कमिश्नर कौन होगा।
शहर और देहात के सभी थाने रहेेंगे शामिल
पहले चर्चा थी कि जिले का ग्रामीण क्षेत्र कमिश्नरेट में शामिल न करके शहरी क्षेत्र नोएडा कमिश्नरेट में जोड़ा जा सकता है लेकिन शनिवार को जारी हुई अधिसूचना में गाजियाबाद कमिश्नरेट में सभी 23 थानों को शामिल किया गया है। इसमें कोतवाली, विजयनगर, सिहानीगेट, नंदग्राम, कविनगर, मधुबन बापूधाम, इंदिरापुरम, खोड़ा, कौशांबी, साहिबाबाद, लिंक रोड, टीलामोड, लोनी, लोनी बॉर्डर, ट्रोनिका सिटी, मुरादनगर, मसूरी, मोदीनगर, निवाड़ी, भोजपुर, वेव सिटी, क्रासिंग रिपब्लिक और महिला थाना हैं।
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कमिश्नर के लिए बन सकती है नई बिल्डिंग
पुलिस ऑफिस में सीमित कमरे होने और वर्तमान में एसएसपी कार्यालय छोटा होने के कारण कमिश्नरेट की जरूरतों के अनुसार नई बिल्डिंग बनाई जा सकती है। कमिश्नर के तैनात होने के बाद इसके लिए जमीन चिन्हित करने का काम शुरू होगा। ऐसे में संसाधनों को जुटाने में काफी समय लग सकता है।
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