आरोपियों की जमानत के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची पुलिस
गाजियाबाद। मुआवजा घोटाले के मास्टरमाइंड गोल्डी गुप्ता और उसके साथी सुधाकर मिश्रा की जमानत के खिलाफ पुलिस ने हाईकोर्ट में अर्जी दी है। दोनों पुलिस की लापरवाही से ही जेल से बाहर आए थे। इन्हें दो मामलों में जमानत मिली थी। उनके अलावा दर्ज 11 अन्य मुकदमों में उन्हें अग्रिम जमानत न देने की अर्जी जिला कोर्ट में डाली गई है। भारी किरकिरी होने के बाद दोनों की तलाश में स्पेशल टास्क फोर्स को लगाया गया है। हालांकि, उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है।
दोनों के खिलाफ 13 केस दर्ज थे जबकि पुलिस ने वारंट सिर्फ दो में लिए थे। गोल्डी को 29 जून को दोनों में जमानत मिल गई थी। सुधाकर उससे पहले बाहर आ गया था। उनके जेल से बाहर आने के बाद पुलिस को बाकी 11 केस की याद आई। तब तक देर हो चुकी थी। इस मामले में विवेचना अधिकारी को निलंबित किया गया। कोर्ट से गोल्डी और सुधाकर मिश्रा के खिलाफ कुर्की पूर्व नोटिस जारी हो चुका है। पुलिस उनकी संपत्ति कुर्क करने के लिए कोर्ट में अर्जी देगी।
एसपी क्राइम डॉ. दीक्षा शर्मा ने हाईकोर्ट में अर्जी की पुष्टि करते हुए बताया कि घोटाले में बनाई गई एसआईटी में क्राइम ब्रांच, प्रशासन और एसटीएफ भी शामिल है। मामले में तत्कालीन अधिकारियों के नाम खोलने के लिए प्रशासन अपने स्तर पर जांच कर रहा है। जबकि पुलिस सर्विलांस की मदद से गोल्डी के संपर्क में आए अधिकारी व अन्य लोगों के नामों को निकाला जा रहा है। इसके बाद प्रशासन को देकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह था मामला
गोल्डी गुप्ता और उसके साथियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों की सांठगांठ से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण में जमीन देकर मुआवजा लिया। जमीन अशोक सहकारी समिति के नाम से दी गई। समिति के भंग होने के बाद मुआवजा लिया गया। कुल 22 करोड़ का मुआवजा था। छह करोड़ लिया जा चुका था। 16 करोड़ लेने की तैयारी की जा चुकी थी। अधिग्रहण होने के बाद भी जमीन की खरीद-फरोख्त कर बैनामे किए गए। साथ ही ग्राम सभा की बंजर जमीन का मुआवजा भी ले लिया गया।
अफसरों के नाम नहीं खोले
घोटाले की एफआईआर में साफ तौर पर लिखा है कि आरोपियों की अफसरों और कर्मचारियों से सांठगांठ थी। इसके बावजूद उन अफसरों के नाम नहीं खोले गए हैं जिन्होंने घोटाले में गोल्डी गुप्ता और अन्य आरोपियों का साथ दिया।