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इथाइल एल्कोहल से बना रहे थे नकली शराब, फैक्टरी का भंडाफोड़

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इथाइल एल्कोहल से बना रहे थे नकली शराब, फैक्टरी का भंडाफोड़
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गाजियाबाद। मसूरी क्षेत्र में आईडल कॉलेज के पास एक खंडहर मकान में चल रही नकली शराब बनाने की फैक्टरी का क्राइम ब्रांच की टीम ने सोमवार को भंडाफोड़ किया है। नकली शराब की तस्करी करने वाले प्रिंस चौहान को पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर फैक्टरी पर छापा मारा है। पकड़े गए तस्कर के पिता और भाई फरार हैं। क्राइम ब्रांच ने मौके से मिस इंडिया के स्टीकर लगी नकली देशी शराब की 15 पेटी, 1500 पैकिंग में इस्तेमाल प्लास्टिक की नकली बोतल, 1200 बोतलों के ढक्कन, 1500 मिस इंडिया ब्रांड के नकली रेपर, एक बंडल नकली क्यूआर कोड, 300 बोतल पर लगाने वाली सील, 30 देशी शराब के खाली पेटी, 50 लीटर अपमिश्रित शराब समेत सील व पैक करने वाले उपकरण समेत चोरी की गई सियाज कार, लैपटॉप, चार फर्जी आधार कार्ड, वाहनों की चार फर्जी आरसी, प्लास्टिक कार्ड आरसी पर लगने वाली चार चिप, एक फर्जी एनओसी और फास्टैग बरामद किए हैं। तस्करों ने एक माह पहले ही मसूरी थाना क्षेत्र में नकली शराब बनाने का काम शुरू किया था।
क्राइम ब्रांच प्रभारी अब्दुर रहमान सिद्दीकी ने बताया कि पकड़ा गया तस्कर हापुड़ के कुचेसर चौपला का रहने वाला प्रिंस चौहान है। इसका भाई दीपांशु और पिता विपिन चौहान फरार हैं। इनकी तलाश की जा रही है। पूछताछ में प्रिंस ने बताया कि वह पहले हापुड़ में ही नकली शराब बनाते थे लेकिन वहां पुलिस की सख्ती बढ़ने से काम बंद कर दिया। उनके एक परिचित ने मसूरी में यह खंडहर मकान दिखाया। जहां उन्होंने एक माह पहले काम शुरू किया है। प्रिंस ने बताया कि उसके पिता विपिन कई सालों से नकली शराब बनाने का काम कर रहे हैं तो वो केमिकल का इस्तेमाल करके शराब बनाते हैं। इसके बाद वह, पिता और भाई दीपांशु पैकिंग करते हैं और चोरी के वाहनों से शराब तस्करी करते हैं। पूछताछ में बताया कि उनका एक दोस्त केमिकल की व्यवस्था करता था और कबाड़ियों से देशी शराब की खाली पेटियां खरीदते हैं।
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गांवों में बेचते थे 52 रुपये का पव्वा
पिता और दोनों पुत्र तीनों मिलकर हापुड़, मेरठ और गाजियाबाद जिले के आसपास के गांवों में शराब की तस्करी करते हैं। उन्होंने कुछ लोगों से संपर्क साधा हुआ था, जिन्हें वह 52 रुपये पव्वे के हिसाब से बेचते थे और वह आगे 65 रुपये व इससे अधिक दामों में बेचते थे।
पिता बनाते थे शराब, दोनों भाई करते थे तस्करी
पुलिस ने प्रिंस से पूछताछ कि तो उसने बताया कि उसके पिता केमिकल से शराब बनाने में माहिर हैं, वो ही जानते हैं कि कितना केमिकल और कितना पानी मिलाना है। शराब बनाने में वह इथाइल अल्कोहल का इस्तेमाल करते हैं। शराब की पैकिंग करने के बाद वह शराब की तस्करी करते थे।
हापुड़ में सख्ती तो एक माह पहले मसूरी में शुरू किया काम
ये लोग काफी लंबे समय से नकली शराब बनाने का काम कर रहे हैं। पूर्व में ये लोग हापुड़ में अलग-अलग स्थानों पर शराब बना रहे थे। पुलिस की सख्ती देख उन्होंने काम बंद किया तो उनके एक परिचित ने मसूरी में आईडल कॉलेज के पास एक खंडहर मकान दिखाया, जहां उन्होंने एक माह पहले ही फिर से नकली शराब बनाना शुरू कर दिया।
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फर्जी दस्तावेज बनाकर बेच रहे थे चोरी के वाहन
शराब तस्करी के साथ वाहन चोरी का भी काम करते हैं। दो साल से वाहन चोरी करके उनका इस्तेमाल शराब तस्करी में करते हैं। इसके अलावा चोरी के वाहनों के फर्जी कागज बनाकर सस्ते दामों में आगे बेचते देते हैं। पकड़ा गया तस्कर प्रिंस ने बीकॉम की पढ़ाई कर रखी है और वह कंप्यूटर में एक्सपर्ट है। प्रिंस ही कंप्यूटर से गाड़ियों की फर्जी आरसी, इंश्योरेंस व अन्य दस्तावेज बनाता है और बैंक के एनओसी भी बनाता है। ऐसा करके वे कई गाड़ियां बेच चुके हैं।
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