टेंट गोदाम में लगी आग, दम घुटने से तीन की मौत
गाजियाबाद। शिब्बनपुरा कल्पना नगर में रविवार की रात करीब डेढ़ बजे कार्तिक टेंट हाउस में भीषण आग लग गई। इसके धुएं से दम घुट जाने से पहली मंजिल पर रह रहे डिलीवरी ब्वॉय पंकज (30) पत्नी कविता (26) और छह माह की बेटी कृतिका की मौत हो गई। विकराल होती आग की फैलती लपटों के बीच दस लोगों ने छत से कूदकर अपनी जान बचाई। आग की वजह शार्ट सर्किट मानी जा रही है। पांच दमकलों ने इस पर ढाई घंटे में काबू पाया।
यह टेंट हाउस शिब्बनपुरा के ही सुनील दत्त का है। जोमेटो में डिलीवरी ब्वॉय पंकज उनका साला था और टेंट हाउस के ऊपर वाली मंजिल में पत्नी और बेटी के साथ एक साल से किराये पर रह रहा था। पहली मंजिल पर ही विनोद यादव तीन साल से और दूसरी पर दुलीचंद का परिवार करीब पांच साल से रह रहा है। ये सभी लोग सो रहे थे।
टेंट हाउस के सामने वाले घर से प्रदीप की आंख खुली तो उन्होंने आग देखकर शोर मचाया और पुलिस को सूचना दी। दुलीचंद के बेटे प्रिंस ने बताया कि शोर सुनकर उन लोगों की आंख खुल गई और आग की लपटें देख सभी छत की तरफ भागे। आग फैलती जा रही थी। इमारत से निकलने का रास्ता लपटों से घिरा था। इसलिए एक-एक कर सभी लोग पड़ोस वाली छत पर कूद गए। पंकज, कविता और कृतिका वहां नहीं मिले तो सब परेशान हो गए। आग बुझने पर उनके कमरे में जाकर देखा तो तीनों मृत पड़े थे।
शोर न मचता तो जान न बचती
पहली मंजिल पर रहने वाले विनोद यादव, विनीता, आयुष और दूसरी पर रहने वाले दुलीचंद, सुनीता, विशाल, प्रिंस, निशा, मनीषा और संदीप छत से कूदकर जान बचाने वालों में शामिल हैं। उनका कहना था कि अगर शोर न मचता तो जान बचनी मुश्किल थी। छत पर जाने वाले रास्ते को थोड़ी ही देर में आग ने घेर लिया था। अगर थोड़ी देर हो जाती तो वहां से निकल पाना मुश्किल था। विनोद ने बताया कि धुएं से खांसी उठने पर उसकी आंख खुली। वह कमरे में अकेला था। परिवार के अन्य सदस्य छत पर ही सो रहे थे। आग देखकर वह भी छत पर भागा।
नींद में ही सो गए मौत की नींद
पंकज, कविता और कृतिका का शव बिस्तर पर मिला। तीनों जिस अवस्था में सोए थे, उसी में मृत मिले। उन्होंने जान बचाने की कोशिश भी नहीं की। सोते हुए ही मौत आई और तीनों मौत की नींद सो गए। सब यह सोचकर हैरान थे कि ऐसा कैसे हुआ, सबका एक ही सवाल था। कमरे में धुआं भरने पर वे लोग क्यों नहीं उठे और जान बचाने के लिए बाहर क्यों नहीं निकले। छत पर उन्हें न देख लोगों ने पंकज को फोन भी मिलाया था लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। लोगों ने सोचा कि वह शायद उनसे पहले निकल गया हो लेकिन जब आग बुझने के बाद कमरे में जाकर देखा तो तीनों के शव पड़े थे।
डेढ़ साल पहले हुई थी पंकज की शादी
पंकज का परिवार 30 साल पहले खुर्जा से गाजियाबाद आया था। परिवार के अन्य सदस्य मसूरी क्षेत्र की बांके बिहारी कॉलोनी में रहते हैं। पंकज अपनी बहन के यहां परिवार के साथ रह रहा था। उसकी डेढ़ साल पहले शादी हुई थी।
मीटर से निकली चिंगारी से भड़की आग
गोदाम में गेट के पास ही बिजली का मीटर लगा हुआ है। प्रथम दृष्टया माना जा रहा है कि मीटर से चिंगारी निकलने से टेंट के सामान, कालीन व पर्दों में आग पकड़ ली। काफी देर तक सुलगने के बाद आग ने भीषण रूप ले लिया। अग्निशमन अधिकारी शेषनाथ यादव ने बताया कि रात एक बजकर 57 मिनट पर सूचना मिली थी। शार्ट सर्किट से आग लगने का कारण सामने आया है।
कार्बन मोनोआक्साइड ने ली जान
पंकज, कविता और कृतिका की मौत के बारे में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. अरविंद डोगरा का कहना है कि आग लगने पर कार्बन मोनोक्साइड गैस भी निकलती है। यह ऑक्सीजन की अपेक्षा हीमोग्लोबिन में पहले घुलती है। अगर कोई व्यक्ति सो रहा है तो उस अवस्था में ऑक्सीजन के बजाय कार्बन मोनोक्साइड पहले सांस में जाती है। इससे वह कुछ ही पल में बेहोश हो जाता है। फेफड़ों में गैस की अधिकता होने से दम घुट जाता है। इस कारण से मौत हो जाती है। इस अवस्था में न खांसी आती है और न ही सोते हुए व्यक्ति को पता चल पाता है। इसी मामले में विनोद को धुएं से खांसी आई थी और वह उठ गया था। इस पर डॉक्टर का कहना है कि हो सकता है कि उसे तब तक नींद ही न आई हो या खांसी किसी और कारण से आई हो।