कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण लेने के बाद बेरोजगारों की फौज तैयार हो रही है। पिछले तीन साल में कौशल विकास केंद्र में 26500 युवाओं ने 15 रोजगार परक विषयों का प्रशिक्षण लिया। इनमें से मात्र 1391 युवाओं को ही रोजगार मिल सका है। प्रशिक्षित 25109 लोगों को कोई रोजगार नहीं मिला। जबकि, युवाओं के स्किल को विकसित करने के लिए कंपनियों को शासन से लाखों का भुगतान किया जा रहा है।
कौशल विकास योजना के तहत ब्यूटीशियन, हेल्थ केयर, सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर, रिटेल, इलेक्ट्रिशियन, कंसट्रक्शन समेत 15 विषयों में एक साल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके लिए कौशल विकास निगम ने निजी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित किया है। युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रोजगार दिलवाने की जिम्मेदारी भी निगम और कंपनियों की है। बावजूद इसके प्रशिक्षण के बाद युवा नौकरी के लिए भटकने का मजबूर हो रहे हैं।
प्रशिक्षण पर खर्च हो गए 12 हजार
इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण लेने वाले मनोज ने बताया कि उन्हें नोएडा की एक कंपनी में बतौर ट्रेनी रखा गया था। एक साल के प्रशिक्षण में उनका करीब 10 से 12 हजार रुपये खर्च हो गया। सर्टिफिकेट तो मिला लेकिन नौकरी ढूंढने पर अनुभव और डिग्री नहीं होने से काम नहीं बना।
कम वेतन की दिलाई थी नौकरी
हेल्थ केयर क्षेत्र में एक साल का प्रशिक्षण लेने वाली प्रतिमा सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद नौकरी तो मिली लेकिन वेतन इतना कम था कि आर्थिक गतिविधियों के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करनी पड़ गई।
प्लेसमेंट में लग जाता है समय
कौशल विकास योजना के नोडल अधिकारी राधाकृष्ण का कहना है कि निगम और कंपनियां पूरी तरह रोजगार परक प्रशिक्षण देने के बाद रोजगार सृजन के लिए भी प्रशिक्षुओं के साथ खड़े रहते हैं। कई बार प्लेसमेंट मिलने में थोड़ा समय लग जाता है। ऐसे में युवा दूसरा विकल्प तलाश लेते हैं।
साल प्रशिक्षण लिया रोजगार मिला
2019-20 12285 172
2020-21 10000 1128
2022-23 4266 91
रोजगार क्षेत्र रोजगार मिला
सिलाई, कढ़ाई 660
ब्यूटीशियन- 332
हेल्थ केयर- 142
इलैक्ट्रीशियन- 125
कंसट्रक्शन- 23
रिटेल - 45
ऊर्जा - 20
कंप्यूटर ऑपरेटर- 45