साहिबाबाद। वायु प्रदूषण प्रबंधन आयोग के नए निर्देश के तहत सोमवार से जिले की 27 हजार औद्योगिक इकाइयों में उद्यमी डीजल से जनरेटर नहीं चला पाएंगे। ऐसा करना आयोग के निर्देश का उल्लंघन माना जाएगा। आयोग के सदस्य सचिव अरविंद नौटियाल ने बताया कि एनसीआर में वायुमंडल को साफ रखने की दिशा में यह नियम लागू किया है। आयोग का यह निर्देश जनपद के उद्यमियों के साथ व्यावसायिक क्षेत्र के कारोबारियों पर भी लागू होगा। उद्यमियों का कहना है कि अगर यह प्रभारी तरीके से लागू हुआ तो तय अवधि के बाद चार से पांच हजार उद्योगों पर सीधे तौर पर संकट आ जाएगा क्योंकि इन उद्योग को उत्पादन में बिना रुकावट लगातार ऊर्जा आपूर्ति मिलना जरूरी होता है।
गाजियाबाद में औद्योगिक नगरी सूक्ष्म, लघु एवं मझोले यानी एमएसएमई का हब है। यहां करीब 27 हजार इस श्रेणी के निर्यातक व निर्माता उद्योग हैं। इनमें से चार से पांच हजार कल कारखाने ऐसे हैं जो बिना पीएनजी ईधन के संचालित हो रहे हैं। उनमें स्वच्छ ईंधन की जगह अलग-अलग प्रकार के ईंधन प्रयोग होता है, जो गलत है। साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के सचिव मुकेश गुप्ता का कहना है कि एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उद्योगों में 15 मई के बाद बिना पीएनजी वाले जनरेटर सेट नहीं चल पाएंगे।
इससे पहले वायु प्रदूषण प्रबंधन आयोग ने कोयला, लकड़ी और तेल के प्रयोग पर प्रतिबंध लगाकर पीएनजी या फिर बायोफ्यूल्स का ही प्रयोग करने की अनुमति दी थी। जनपद के सभी औद्योगिक क्षेत्र में पीएनजी की आपूर्ति के लिए लाइन बिछाने का काम भी चल रहा है। ऐसे में कई इकाइयां ऐसी हैं जिनमें लाइन नहीं बिछाई जा सकी हैं। उनमें अभी तक काम चल रहा है। उद्यमियों को सबसे बड़ी चिंता है कि यदि आयोग के नियम को प्रभावी तरीके से लागू कर दिया गया तो ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने पर औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन की प्रक्रिया रुक जाएगी और इससे उद्यमियों को कच्चा माल खराब होने पर आर्थिक नुकसान भी झेलना होगा। उद्यमी मुकेश गुप्ता का कहना है कि आयोग के नए नियम को देखकर प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों से वार्ता कर समय बढ़ाने की मांग की है।
कई क्षेत्रों में पीएनजी उपलब्धता नहीं
आनंद औद्योगिक क्षेत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष किरनपाल पांचाल का कहना है कि क्षेत्र में पीएनजी लाइन को कंपनी ने बिछा दी है लेकिन गैस की आपूर्ति पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पाई है। पीएनजी आपूर्ति के लिए उद्यमियों ने लाखों रुपये खर्च करके ढांचा भी तैयार करा लिया था लेकिन उसका फायदा तो नहीं, नुकसान जरूर हो रहा है। अब वायु प्रदूषण प्रबंधन आयोग के नए निर्देश से उद्यमियों पर संकट बन गया है।
सूक्ष्म और माइक्रो उद्योग पर बड़ा संकट
कविनगर औद्योगिक एसोसिएशन के पदाधिकारी अरुण शर्मा का कहना है कि कविनगर, बुलंदशहर रोड, लोनी-भोपुरा, आनंद, राजेंद्र नगर, साहिबाबाद, मेरठ रोड, दिल्ली गेट समेत तमाम औद्योगिक क्षेत्रों में सूक्ष्म एवं माइक्रो उद्योग हैं। जहां 100 केवीए के कम क्षमता वाले जनरेटर का प्रयोग उद्योगों में होता है। यहां बिजली गुल होने पर फेब्रिकेशन, खराद मशीन, एवं कलपुर्जे की ड्रिलिंग मशीन में काम के लिए जनरेटर का प्रयोग होता है। अब इन उद्योगों पर संकट बन गया है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक उत्सव शर्मा का कहना है कि वायु प्रदूषण प्रबंधन आयोग का नया सर्कुलर सभी औद्योगिक इकाइयों को भेज दिया है। उद्यमियों को डीजी सेट 70 प्रतिशत गैस और 30 प्रतिशत डीजल युक्त ट्यूल फ्यूल सिस्टम चलाने के लिए कहा है। यदि कोई इसका उल्लंघन करता पकड़ा गया तो रिपोर्ट बनाकर आयोग को भेजी जाएगी।