गाजियाबाद। जीडीए का एक और कारनामा सामने आया है। 10 साल पहले वैशाली आवासीय योजना में जीडीए ने बिल्डर के सात प्लाॅटों को अपना बता नीलाम कर दिया। बिल्डर के कोर्ट में जाने के बाद जहां छह लोगों को जीडीए ने रुपये वापस कर दिए वहीं, एक प्लॉट की रजिस्ट्री होने के बाद खरीदार को न रुपये वापस मिला और न ही आज तक प्लॉट पर कब्जा। खरीदार प्राधिकरण के चक्कर लगा लगाकर थक गया है।
2013 में वैशाली सेक्टर एक में आर-1 से आर सात तक के प्लॉटों को जीडीए ने नीलामी में लगाया था। 51.54 वर्ग मीटर के एक प्लॉट की कीमत 55 लाख से ऊपर थी। प्लॉट आर चार को वसुंधरा 14 निवासी अभिषेक सिंह ने जीडीए से नीलामी में खरीदा और जीडीए से रजिस्ट्री करा ली। कुछ ही दिनों में इन्होंने रिश्ते के चाचा भावनी शकंर जौहरी को रजिस्ट्री कर दी। भवानी शंकर ने बताया कि जब वह प्लॉट पर गए तो पता चला कि यह प्लॉट जीडीए का नहीं है बल्कि गरिमा बिल्डर का है। यह भी पता चला कि बिल्डर ने सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है। इसके बाद अभिषेक सिंह और भवानी शंकर जीडीए पहुंचे और अधिकारियों से पूछताछ की। अधिकारियों ने कहा कि वह चिंता न करें उन्हें दूसरा प्लॉट दिया जाएगा। अन्य आवंटियों ने जिन्होंने रजिस्ट्री नहीं कराई थी उन्होंने जीडीए से रकम वापस ले ली।
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10 साल में 20 बार लगा चुके हैं जीडीए का चक्कर, न रुपये मिला न कब्जा
जिला वनाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त भवानी शंकर जौहरी का कहना है कि पिछले 10 साल में कम से कम 20 बार जीडीए के चक्कर लगा चुके हैं। जब भी वह आते हैं उन्हें कभी संपत्ति विभाग तो कभी बाबू के पास भेज दिया जाता है। हर बार अधिकारी टाल मटोल करके उन्हें वापस भेज देते हैं। शुक्रवार को उन्होंने जीडीए वीसी को पत्र दिया है। पत्र में लिखा है कि उन्हें पूरी रकम ब्याज के साथ दिलाया जाए या फिर उसी क्षेत्रफल का प्लॉट इंदिरापुरम, वैशाली या कौशांबी में आवंटित किया जाए।
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जीडीए वीसी अतुल वत्स का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी। यह गड़बड़ी कैसे हुई इसका पता लगाया जाएगा। आवंटी की समस्या का त्वरित समाधान कराया जाएगा।
जीडीए की संपत्ति खरीद रहे हैं तो रजिस्ट्री से पहले कर लें जांच
भाजपा नेता राजेंद्र त्यागी का कहना है कि जीडीए की संपत्ति खरीद रहे हैं तो रजिस्ट्री से पहले जांच पड़ताल करा लें। जमीन या संपत्ति पर कोई विवाद तो नहीं है। दस्तावेजों को खंगालने के बाद ही संपत्ति खरीदें। बसपा और सपा के शासनकाल में जीडीए में कई संपत्तियों के आवंटन और बिक्री में दस्तावेजों में हेरफेर और घपले के मामले सामने आ चुके हैं। पिछले दिनों कर्पूरीपुरम और इंदिरापुरम आवासीय योजनाओं में घपले उजागर हो चुके हैं। रजिस्ट्री किसी प्लॉट की और आवंटन किसी प्लॉट का करने का मामला आ चुका है। कई मामले कोर्ट में पिछले कई सालों से चल रहे हैं।