होटलों को दिए नोटिस लेकिन कार्रवाई करना भूला जीडीए
गाजियाबाद। अग्नि सुरक्षा मानक का पालन किए बिना संचालित 80 होटलों को जीडीए नोटिस देकर कार्रवाई करना भूल गया। इनमें सबसे अधिक 30 होटल बजरिया क्षेत्र में संचालित हैं। अग्निशमन विभाग ने 118 से अधिक होटलों की जांच की थी, इसमें पता चला कि 80 होटल बिना फायर एनओसी के ही संचालित हो रहे हैं। यदि इनमें आग लग जाए तो भीषण जान-माल की हानि हो सकती है। यहां 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले होटल का जो नक्शा जीडीए ने पास किया है, वहां आग से बचाव के इंतजाम नहीं हैं। 15 मीटर से ऊंचे होटलों के मामले में जिला प्रशासन के स्तर पर सराय एक्ट के तहत कार्रवाई किए जाने के लिए कहा गया है।
बिना फायर एनओसी के अस्पताल, होटल और बैंक्वेट हॉल भी चल रहे हैं। इनमें अग्नि सुरक्षा उपकरण भी नहीं हैं। आरडीसी, इंदिरापुरम, वैशाली, वसुंधरा, बजरिया, कौशांबी के अलावा शहर के अन्य हिस्से में बड़ी संख्या में होटल, रेस्तरां बिना फायर एनओसी और अग्नि सुरक्षा संयंत्र के संचालित हो रहे हैं। जिले में 48 से अधिक बैंक्वेट हॉल असुरक्षित हैं, इनमें अग्नि सुरक्षा के उपकरण नहीं हैं और यहां होने वाले शादी समारोह में हादसा होेने पर स्थिति भयावह हो सकती है। सभी को तत्काल अग्नि सुरक्षा उपकरण लगवाने का निर्देश दिए गए। जीडीए के ओएसडी सुशील चौबे का कहना है कि जिन होटलों में कमियां पाईं गईं थीं उन्हें नोटिस भेजे गए हैं, जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
अस्थायी एनओसी से कराते हैं नक्शा पास
जब किसी इमारत का नक्शा पास कराया जाता है तो अग्निशमन विभाग की अस्थायी एनओसी लाते हैं। इसमें आग के बचाव के क्या-क्या उपाय होने चाहिए, इस आधार पर एनओसी दी जाती है, लेकिन ज्यादातर इसका पालन नहीं करते। ऐसे मामलों में अधिकारी भी चुप बैठे रहते हैं।
नहीं कराते हैं नवीनीकरण
नियम है कि बहुमंजिला आवासीय भवनों का हर पांच साल में अग्नि शमन विभाग का नवीनीकरण कराना होता है, जबकि अन्य निर्माण का तीन साल में नवीनीकरण कराने का नियम है, लेकिन लोग इसका नवीनीकरण नहीं कराते। अग्निशमन विभाग के साथ जिला प्रशासन और जीडीए भी कार्रवाई से बचता है। जब कोई हादसा होता है तो सब विभाग एक साथ जग जाते हैं।
बैठक के बाद होगी कार्रवाई
जीडीए सचिव बृजेश कुमार का कहना है कि जल्द ही सभी जोन के प्रवर्तन प्रभारियों के साथ बैठक कर पूरी जानकारी ली जाएगी, इसके बाद संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।