गाजियाबाद। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के चार कर्मचारियों और एक दलाल के खिलाफ केस दर्ज किया है। पांचों पर लंबित पासपोर्ट जारी करने के लिए बदले 1.57 लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। रिश्वत की रकम बैंक खातों में जमा कराई गई। इसका भांडा फूट जाने के बाद अब पांचों पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। सीबीआई ने मंगलवार को कोर्ट में एफआईआर की काॅपी पेश कर आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए अनुमति मांगी है।
नामजद आरोपियों में वरिष्ठ पासपोर्ट सहायक रवि किशन, पासपोर्ट सहायक चंद्रकांत, वरिष्ठ पासपोर्ट सहायक पवन शर्मा और जंडैल सिंह व मुजफ्फरनगर का निवासी दलाल मोहम्मद फरहान शामिल हैं। एफआईआर में सीबीआई ने बताया है कि इन लोगों के खिलाफ लंबित पासपोर्ट जारी करने के लिए रिश्वत लेने की शिकायत मिली थी। इसकी पहले आंतरिक जांच कराई गई। इसमें रिश्वत लेने के साक्ष्य मिले। जांच में साफ हो गया कि पासपोर्ट के लिए चक्कर काटने वाले लोगों से दलाल रिश्वत लेकर अफसरों को पहुंचाता है। वह अपना हिस्सा भी लेता है।
आरोपियों के ठिकानों की ली तलाशी
जांच में पता चला कि 14 जून 2022 से दो जुलाई 2023 के बीच लंबित पासपोर्ट के निस्तारण के लिए 1.57 लाख रुपये की रिश्वत ली गई है। सीबीआई की एंटी करप्शन यूनिट ने इसका केस दर्ज कर गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर में आरोपियों के ठिकानों पर तलाशी ली। इसके बाद सीबीआई की टीम कोर्ट पहुंची। कोर्ट से अनुमति मिलते ही आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जाएगा।
दलाल के माध्यम से ली रिश्वत
पासपोर्ट सहायक रवि किशन ने मोहम्मद फरहान के माध्यम से 14 जून 2022 से 14 जून 2023 के बीच 73 हजार रुपये की रकम रिश्वत के रूप में ली। फरहान ने ये रुपये यूपीआई और अपने परिचित लोगों के वॉलेट व बैंक खाते से ट्रांसफर किए।
पासपोर्ट असिस्टेंट चंद्रकांत ने आठ अगस्त 2022 से 3 जनवरी 2023 के बीच 59,700 रुपये फरहान से लिए। इसी तरह वरिष्ठ पासपोर्ट सहायक पवन कुमार ने 28 सितंबर 2022 से 2 जुलाई 2023 के बीच फरहान से 22,900 रुपये लिए।
वरिष्ठ पासपोर्ट सहायक जंडैल सिंह ने भी 13 जून 2023 को एक लंबित पासपोर्ट जारी करने के बदले मोहम्मद फरहान से दो हजार रुपये लिए। यह रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की गई।
पुलिसवालों पर भी दर्ज हो चुके केस
पासपोर्ट के मामलों में पुलिस रिपोर्ट लगवाना भी आसान नहीं है। ऐसी कई शिकायतें आ चुकी हैं जिनमें पुलिसवालों पर सत्यापन रिपोर्ट लगाने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप लगा है। इसके केस भी दर्ज हुए हैं। कई पुलिसवालों के खिलाफ लाइन हाजिर और निलंबन जैसी कार्रवाई भी की गई। पासपोर्ट दफ्तर के कर्मचारियों के खिलाफ भी रिश्वत मांगने की शिकायतें आ चुकी हैं। देहरादून में ऐसे ही मामले में कर्मचारी को सजा भी हो चुकी है।
13 जिलों से आते हैं आवेदन
क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय के तहत पश्चिमी यूपी के आगरा, अलीगढ़, बागपत, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, हापुड़, हाथरस, मथुरा, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व शामली जिले के पासपोर्ट बनते हैं। इन जिलों से हर महीने हजारों आवेदन आते हैं।