साहिबाबाद। वसुंधरा सेक्टर 15 स्थित 14 मंजिला द्रोणागिरी सोसायटी में बुधवार और बृहस्पतिवार को ट्रांसफार्मर, वीसीवी, क्यूबिकल मशीन और सीटी उपकरणों में फॉल्ट हुए। इससे 38 घंटे बिजली और पानी नहीं होने से 358 फ्लैट में रहने वाले लोग घरों में कैद रहे और बच्चे स्कूल नहीं जा पाए। फॉल्ट का कारण पैनल बॉक्स के कमरे में सीलन आना भी रहा। वहीं, सोसायटी का खाता फ्रिज होने के कारण रखरखाव प्रबंधन को डीजीसेट को लगातार चलाने में दिक्कत आई।
स्थानीय निवासी अमित किशोर ने बताया कि बुधवार को बारिश होने के दौरान दिनभर में अधिकांश समय बिजली गुल रही। देर रात तीन बजे सोसायटी के ट्रांसफार्मर में फॉल्ट हो गया। ऊर्जा निगम अधिकारियों से शिकायत करने पर बृहस्पतिवार सुबह साढ़े छह बजे टीम मरम्मत करने पहुंची। टीम ने उड़े जंपर को ठीक किया। वीसीवी और ट्रांसफार्मर में दिक्कत होने के मेंटीनेंस प्रबंधन को जानकारी देकर टीम चली गई। रात साढ़े 11 बजे सोसायटी की ओर से आंतरिक काम कराने पर बिजली आपूर्ति शुरू करा दी गई, लेकिन कुछ देर बाद ही पैनल बॉक्स में तेज आवाज के साथ फॉल्ट हुआ। पूरी रात लोग बिन बिजली के रहे।
सहायक अभियंता अमर पाल ने बताया कि शुक्रवार सुबह ऊर्जा निगम की टीम सोसायटी पहुंची। पैनल बॉक्स में लगे दूसरे क्यूबिक मशीन पर लोड डालकर सुबह नौ बजे सोसायटी की बिजली चालू कराई गई। दोपहर तक मरम्मत कार्य पूरा कर पहली क्यूबिक मशीन के फुंके सीटी को बदल दिया गया। सहायक अभियंता ने बताया कि पैनल रूम पूरी तरह से खराब है। कमरा नीचे कच्चा होने और ऊपर पटिया की छत होने से सीलन व नमी बनी रहती है। इसके चलते ही फॉल्ट की समस्या आई।
तीन दिन बाहर से मंगाकर खाया खाना
14वीं मंजिल पर रहने वालीं विजय शर्मा ने बताया कि बुधवार रात एक बजे बेटा आया था। लिफ्ट बंद होने के कारण बेटे को तीन बैग लेकर सीढ़ियों से ही आना पड़ा। नीलम सक्सेना ने बताया कि पानी नहीं होने के बाहर से ही खाना मंगाकर खाना पड़ा। अनंत सिंह ने बताया कि दो दिन सोसायटी के 80 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा सके। वहीं, रखरखाव प्रबंधन देखने वाले विपिन दीक्षित ने बताया कि बिजली गुल होने पर खुद से रुपये की व्यवस्था कर डीजल मंगाया गया। बुधवार को सात से आठ घंटे ही डीजीसेट चल सका। शुक्रवार सुबह को 17500 रुपये का दोबारा डीजल मंगाया गया।
खाता फ्रिज होने से आई दिक्कत
विपिन ने बताया कि मार्च 2023 में सोसायटी की कमेटी भंग हो चुकी है। सोसायटी की देखरेख जिलाधिकारी व उपजिलाधिकारी स्तर से हो रही है। दीपावली पर उपजिलाधिकारी से पास कराकर 40 लाख रुपये निकाले गए थे। उससे सोसायटी के 25 कर्मचारियों का पूरा मानदेय भी नहीं दिया जा सका जबकि सोसायटी रखरखाव का खर्चा प्रतिमाह 15 लाख रुपये है। सोसायटी स्टाफ रामचंद्र ने बताया कि अभी भी तीन माह से वेतन नहीं मिला है।