गाजियाबाद में अपनी जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए तीन साल से दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके किसान सुशील कुमार (65) ने अफसरों के रवैये से आहत होकर शनिवार दोपहर को संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान तहसील परिसर में ब्लेड से बाएं हाथ की नस काट ली। अस्पताल ले जाते समय उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
फरियादी की इस तरह जान चली जाने से अपनी गर्दन फंसती देख हरकत में आए अफसरों ने फुर्ती दिखाते हुए आनन- फानन उनके केस की फाइल निकलवाई और जमीन पर किए गए कब्जे को देखने के लिए भी पहुंचे। लेकिन, समाधान दिवस के सिस्टम को सवालों के घेरे में खड़ा कर देने वाले इस मामले में फिलहाल किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। एडीएम प्रशासन रितु सुहास ने मामले की जांच कराने की बात कही है।
मूल रूप से मुरादनगर के डिडौली गांव के निवासी सुशील कुमार तीस साल पहले मुजफ्फरनगर की इंद्रा कॉलोनी में शिफ्ट हो गए थे। डिडौली में उनकी 1000 वर्ग गज जमीन में से 250 वर्ग गज पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। इसे कब्जामुक्त कराने के लिए वह अफसरों के चक्कर काट रहे थे। मुरादनगर में उनके प्लॉट पर भी कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है।
पहले भी कर चुके थे शिकायत:
वह संपूर्ण समाधान दिवस में पहले भी फरियाद कर चुके थे। प्रशासन के पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन जमीन से कब्जा नहीं हट सका था। वह जमीन का सौदा कर चुके थे लेकिन कब्जा न हटने के कारण बैनामा नहीं हो पा रहा था। लेखपाल ने शिकायत का निस्तारण हो जाने की रिपोर्ट लगा दी थी।